BT India@100: Gen Z की बेचैनी के पीछे क्या है असली वजह? पी चिदंबरम ने शिक्षा और रोजगार पर उठाए सवाल

Gen Z की बढ़ती बेचैनी के पीछे सिर्फ राजनीति नहीं बल्कि शिक्षा और रोजगार से जुड़ी मुश्किलें भी बड़ी वजह हैं। पी चिदंबरम ने कहा कि खराब शिक्षा, नौकरी की कमी और वेतन में धीमी बढ़ोतरी युवाओं की चिंता बढ़ा रही है। उन्होंने स्कूलों की हालत और रोजगार के मौके बढ़ाने पर जोर दिया।

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By Gaurav Kumar:

देश में Gen Z की बढ़ती नाराजगी और बेचैनी को लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शिक्षा और रोजगार की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि युवा सिर्फ राजनीतिक दलों से नाराज नहीं हैं, बल्कि उनकी असली परेशानी खराब शिक्षा, नौकरी की कमी और वेतन में ठहराव से जुड़ी है।

उन्होंने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवा मौजूदा अर्थव्यवस्था के हिसाब से नौकरी के लिए तैयार नहीं हैं। इसका कारण यह है कि उन्हें उन नौकरियों के मुताबिक शिक्षा और ट्रेनिंग नहीं मिल रही, जो बाजार में उपलब्ध हैं।

पढ़ाई के बाद भी नौकरी की गारंटी नहीं

BusinessTodayIndia@100Summit में चिदंबरम ने कहा कि यह समस्या सिर्फ ग्रेजुएट युवाओं तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में छात्र पांचवीं, आठवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं।

उनके मुताबिक, अलग-अलग स्तर की शिक्षा वाले लोगों के लिए अलग तरह की नौकरियों की जरूरत है, लेकिन आज ऐसी नौकरियां पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं।

नौकरी है तो वेतन क्यों नहीं बढ़ रहा?

चिदंबरम ने वेतन बढ़ोतरी को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में कैजुअल और अनियमित नौकरियों में वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

उन्होंने एक आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि रेगुलर नौकरियों में वेतन बढ़ोतरी सिर्फ 0.4 फीसदी और ज्यादा स्किल वाली ब्लू कॉलर नौकरियों में करीब 0.7 फीसदी रही है।

उन्होंने सवाल किया कि अगर अर्थव्यवस्था 6.5 से 7 फीसदी की दर से बढ़ रही है तो लोगों की आय उसी रफ्तार से क्यों नहीं बढ़ रही।

स्कूलों की हालत पर भी उठाए सवाल

चिदंबरम ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की हालत देशभर में चिंताजनक है। उन्होंने माना कि तमिलनाडु में स्थिति कुछ बेहतर है और केरल में भी हालात अच्छे हैं, लेकिन कई स्कूल अब भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि करीब 6,000 स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षक हैं लेकिन छात्र नहीं हैं। वहीं लगभग 1 लाख स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।

एक शिक्षक पांच कक्षाएं कैसे संभाले?

चिदंबरम ने पूछा कि एक शिक्षक एक साथ पांच अलग-अलग कक्षाओं को कैसे पढ़ा सकता है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में शिक्षक का काम बच्चों को मिड डे मील दिलाने तक सीमित हो सकता है।

उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा पर ज्यादा बजट खर्च करने और स्कूलों की हालत सुधारने की जरूरत है, तभी युवाओं को बेहतर रोजगार के लिए तैयार किया जा सकेगा।
 

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