BT Exclusive: अमीरात और फ्लाईदुबई को छूट तो हमें क्यों नहीं? इंडियन एयरलाइन कंपनियों ने मंत्रालय से की शिकायत

बिजनेस टुडे टेलीविजन के सूत्रों के अनुसार, भारतीय कंपनियां इस बात से नाराज हैं कि दुबई जैसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय रूट पर विदेशी एयरलाइंस के ऑपरेशंस पर पाबंदियां लगाई गईं, जबकि अमीरात और फ्लाईदुबई जैसी यूएई की कंपनियां भारत के लिए अपनी सेवाएं जारी रख पाईं।

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In Short

  • दुबई फ्लाइट बाधाओं पर भारतीय एयरलाइंस नाराज, सरकार से दखल की मांग।
  • विदेशी एयरलाइंस पर पाबंदी, लेकिन UAE की कंपनियां जारी, ऑपरेशंस में असमानता का आरोप।
  • एयरस्पेस बंद, महंगा ईंधन और बढ़ती लागत से पहले ही दबाव में भारतीय एविएशन सेक्टर।

By Gaurav Kumar:

भारतीय एयरलाइंस ने दुबई में हाल ही में हुई उड़ानों की बाधाओं को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सामने अपनी चिंताएं जताने का फैसला किया है। बिजनेस टुडे टेलीविजन के सूत्रों के अनुसार, भारतीय कंपनियां इस बात से नाराज हैं कि दुबई जैसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय रूट पर विदेशी एयरलाइंस के ऑपरेशंस पर पाबंदियां लगाई गईं, जबकि अमीरात (Emirates) और फ्लाईदुबई (flydubai) जैसी यूएई की कंपनियां भारत के लिए अपनी सेवाएं जारी रख पाईं। भारतीय ऑपरेटर इसे असमानता का मामला मान रहे हैं और सरकार से इस पर दखल देने की मांग कर रहे हैं।

संदिग्ध ड्रोन हमला और उड़ानों पर असर

खबरों के मुताबिक, दुबई एयरपोर्ट के पास एक फ्यूल डिपो में संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद आग लग गई थी, जिसके कारण उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। हालांकि यूएई के अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर इसके पीछे की वजह साफ नहीं की है, लेकिन इस घटना ने फ्लाइट शेड्यूल को बुरी तरह बिगाड़ दिया।

भारतीय एयरलाइंस का मानना है कि द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौतों के तहत ऑपरेटिंग स्थितियां अधिक संतुलित और अनुमानित होनी चाहिए, ताकि संकट के समय किसी एक देश की एयरलाइंस को नुकसान न उठाना पड़े।

एयरलाइंस पर चौतरफा दबाव

यह संकट ऐसे समय में आया है जब भारतीय विमानन क्षेत्र पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रहा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कई प्रमुख हवाई क्षेत्रों (Airspaces) के बंद होने से उड़ानें संचालित करना मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान के एयरस्पेस के लगातार बंद रहने के कारण यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों को लंबे रास्तों का चुनाव करना पड़ रहा है। इन लंबे चक्करों की वजह से ईंधन की खपत काफी बढ़ गई है, जिससे एयरलाइंस की परिचालन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है।

लागत में बढ़ोत्तरी और सरकारी रुख

विमानन ईंधन (ATF) की ऊंची कीमतें और घरेलू टैक्स ढांचा पहले से ही कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल रहे हैं। इसके अलावा, संवेदनशील क्षेत्रों के पास उड़ान भरने के कारण 'वार-रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम' यानी युद्ध-जोखिम बीमा की दरों में भी इजाफा हुआ है। हालांकि सरकारी अधिकारी इस स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि फिलहाल एटीएफ पर टैक्स कम करने या इकोनॉमी क्लास के किराए पर लगने वाले स्थानीय शुल्कों में बदलाव करने का कोई विचार नहीं है। इससे एयरलाइंस के लिए आने वाले दिन और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

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