BRICS 2026 में पीएम मोदी की मांग पर UN भी सहमत, कहा- अब 1945 नहीं, 2026 की दुनिया दिखनी चाहिए

BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UNSC की मौजूदा व्यवस्था को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया। खास बात यह रही कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी इस मांग पर अहम प्रतिक्रिया सामने आई। आखिर 1945 की व्यवस्था बदलने और 2026 की हकीकत दिखाने की बात क्यों उठी? जानिए।

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In Short

  • प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS Summit 2026 में UNSC सुधार के लिए तय समयसीमा और ठोस नतीजों की मांग की।
  • UN ने भी माना कि Security Council की मौजूदा व्यवस्था 21वीं सदी की वास्तविकताओं को नहीं दिखाती।
  • New Delhi Declaration में विकासशील और Least Developed Countries को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया गया।

By Gungun Mishra:

BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार की मांग को एक बार फिर मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि अब इन सुधारों में और देरी नहीं हो सकती और इसके लिए तय समयसीमा के साथ ठोस नतीजे सामने आने चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के इस रुख को संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी समर्थन मिला है।

2026 की दुनिया को दिखाए वैश्विक संस्थाएं

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता Stéphane Dujarric ने कहा कि मौजूदा Security Council आज की दुनिया की सही तस्वीर नहीं दिखाती। उन्होंने कहा कि परिषद के पांच स्थायी सदस्यों वाली मौजूदा व्यवस्था 21वीं सदी की वास्तविकताओं से मेल नहीं खाती।

Dujarric ने कहा कि चाहे Security Council हो या अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं, उन्हें 2026 की दुनिया को दिखाना चाहिए, न कि 1945 की व्यवस्था को। उन्होंने यह भी कहा कि UN Secretary-General लंबे समय से Security Council में बुनियादी सुधार की जरूरत पर जोर देते रहे हैं।

मोदी ने उठाया Global South का मुद्दा

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक फैसले लेने वाली व्यवस्था में बढ़ते असंतुलन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि Global South के देश दुनिया की कई बड़ी चुनौतियों का सबसे ज्यादा असर झेलते हैं, लेकिन जब बड़े फैसले लेने की बात आती है तो उन्हें पीछे की कतार में रखा जाता है।

प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को “pyramid of privilege” जैसा बताया और कहा कि इसे बदलकर ऐसा “platform of partnership” बनाया जाना चाहिए, जहां हर देश की आवाज को जगह मिले।

BRICS Reform Roadmap का दिया सुझाव

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS देशों के सामने एक और प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि सदस्य देश representation, responsiveness और rule-making से जुड़े 10 साझा प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं। इन प्रस्तावों के आधार पर अगले BRICS Summit तक एक औपचारिक “BRICS Reform Roadmap” बनाया जा सकता है।

इसका मकसद वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी और भूमिका को मजबूत करना है।

New Delhi Declaration में भी सुधार पर जोर

BRICS Summit में सर्वसम्मति से अपनाए गए New Delhi Declaration में भी वैश्विक शासन व्यवस्था में बदलाव की जरूरत दोहराई गई। घोषणा में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला बनाया जाना चाहिए, खासकर Asia, Africa और Latin America के विकासशील और Least Developed Countries के लिए।

Dujarric ने भारत की BRICS Chairship की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी देशों के बीच सहमति से संयुक्त बयान सामने आना महत्वपूर्ण है और बदलती आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच वैश्विक संस्थाओं को प्रभावी और प्रतिनिधित्व वाला बनाए रखना जरूरी है।

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