मनमाने टैरिफ पर BRICS का कड़ा रुख, दिल्ली डिक्लेरेशन में बोले- अब नहीं चलेगी ऐसी मनमानी
BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी पर जोर दिया। BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं पर चिंता जताई। साथ ही WTO के विवाद सुलझाने की व्यवस्था को फिर से मजबूत करने की मांग की और वैश्विक फैसलों में सभी देशों की भागीदारी पर जोर दिया।

In Short
- प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल साउथ को फैसले लेने में बराबर भागीदारी देने पर जोर दिया।
- BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं पर चिंता जताई।
- BRICS ने WTO के विवाद सुलझाने की व्यवस्था को फिर से मजबूत करने की मांग की।
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS के भविष्य को लेकर एक रोडमैप रखा। इस रोडमैप पर बाकी सदस्य देशों ने भी सहमति जाहिर की। BRICS देशों ने वैश्विक स्तर पर सभी देशों की समान भागीदारी और फैसले लेने की प्रक्रिया में बराबर भूमिका पर जोर दिया।
ग्लोबल साउथ को भी मिले फैसले लेने का अधिकार
BRICS देशों का रोडमैप रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को भी वैश्विक फैसले लेने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि फिलहाल वैश्विक शक्ति का ढांचा एक पिरामिड की तरह है। इसमें ऊपर के स्तर पर मौजूद कुछ देश ही दुनिया से जुड़े बड़े फैसले लेते हैं, जबकि बाकी देशों को इन फैसलों का असर झेलना पड़ता है।
BRICS देशों ने वैश्विक मुद्दों पर ऐसा तरीका अपनाने की बात कही, जिसमें सभी देशों को समान अधिकार मिले। साथ ही सभी देशों को वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में भूमिका मिलनी चाहिए और उनके हितों का भी सम्मान किया जाना चाहिए।
जंग और टकराव को लेकर चिंता
BRICS देशों ने दुनिया में जारी जंग और टकराव को लेकर भी चिंता जाहिर की। सदस्य देशों ने वैश्विक मुद्दों पर ऐसा रास्ता अपनाने पर जोर दिया, जिसमें सभी देशों की भागीदारी हो और उनके हितों का सम्मान किया जाए।
मनमाने टैरिफ पर BRICS की चिंता
BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को लेकर भी चिंता जाहिर की। BRICS के मुताबिक ऐसे टैरिफ वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन में बाधा डालते हैं। सदस्य देशों ने कहा कि किसी भी देश पर एकतरफा तरीके से टैरिफ नहीं लगाया जाना चाहिए।
BRICS देशों ने एकतरफा आर्थिक और सेकेंडरी प्रतिबंधों की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और विकास, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानवाधिकारों के लिए नुकसानदेह हैं।
WTO के विवाद सुलझाने की व्यवस्था को बहाल करने की मांग
घोषणापत्र में WTO की विवाद सुलझाने वाली व्यवस्था को पूरी तरह से फिर शुरू करने की मांग की गई। इसमें अपील करने वाली संस्था के नए सदस्यों की नियुक्ति भी शामिल है।
BRICS ने WTO में शामिल होने की इथियोपिया और ईरान की कोशिश का समर्थन किया। साथ ही चीन की उस जीरो-टैरिफ सुविधा का भी जिक्र किया गया, जो उसके साथ राजनयिक संबंध रखने वाले 53 अफ्रीकी देशों के लिए है।
अमेरिका के टैरिफ के बीच आया BRICS का बयान
BRICS देशों के घोषणापत्र में टैरिफ को लेकर ये बातें ऐसे समय सामने आई हैं, जब अमेरिका ने चीन, भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया था।
अमेरिका ने रूसी और ईरानी तेल खरीदने को लेकर भी देशों को चेतावनी दी है। रूसी तेल खरीदने पर 100 फीसदी टैरिफ और ईरानी तेल खरीदने पर व्यापार बंद करने की बात कही गई है। इन्हीं मुद्दों को लेकर BRICS देशों ने चिंता जाहिर की है।