BRICS: पहलगाम पर सख्त रुख से भारत की UNSC दावेदारी तक... जानें दिल्ली घोषणापत्र की बड़ी बातें
BRICS शिखर सम्मेलन में दिल्ली डिक्लेरेशन को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। इसमें आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, एकतरफा टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों के विरोध के साथ ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर दिया गया। घोषणापत्र में वैश्विक संस्थानों में सुधार, व्यापार सहयोग और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रुख सामने आया।

In Short
- BRICS ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की बात कही।
- घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध किया गया।
- ग्लोबल साउथ को ज्यादा आवाज देने और वैश्विक संस्थानों में सुधार पर जोर दिया गया।
BRICS के दिल्ली घोषणापत्र में भारत की कई प्रमुख प्राथमिकताओं को जगह मिली है। घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की एंट्री, एकतरफा व्यापार बाधाओं का विरोध और डिजिटल व वित्तीय सहयोग जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया गया है।
खास बात यह है कि घोषणापत्र को किसी भी सदस्य देश की आपत्ति के बिना मंजूर किया गया। सभी 11 सदस्य देशों की सहमति को भारत की अध्यक्षता के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस
BRICS देशों ने आतंकवाद के किसी भी रूप के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात कही। समूह ने आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंड नहीं अपनाने की भारत की मांग का समर्थन किया।
घोषणापत्र में पिछले साल जम्मू-कश्मीर में हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। BRICS ने आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद की फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराई।
साथ ही कहा गया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल और उनका समर्थन करने वालों को कानून के मुताबिक जवाबदेह ठहराने की बात कही गई।
गाजा और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा
घोषणापत्र में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों का भी जिक्र किया गया। BRICS नेताओं ने टकराव रोकने की कोशिशें तेज करने और बातचीत व कूटनीति के जरिए विवाद सुलझाने के संकल्प को दोहराया।
गाजा को लेकर BRICS ने युद्धविराम बनाए रखने और बिना रुकावट मानवीय सहायता पहुंचाने की मांग की। साथ ही दो-देश समाधान का समर्थन किया गया। फिलिस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता देने की बात भी कही गई।
एकतरफा टैरिफ और प्रतिबंधों का विरोध
BRICS घोषणापत्र में एकतरफा आर्थिक और सेकेंडरी प्रतिबंधों की निंदा की गई। समूह ने कहा कि ऐसे कदम विकास, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानवाधिकारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
एकतरफा टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाओं और दूसरे संरक्षणवादी उपायों पर भी चिंता जताई गई।
परमाणु खतरे पर चिंता
BRICS ने परमाणु खतरे और परमाणु संघर्ष के बढ़ते जोखिम पर भी चिंता जाहिर की। घोषणापत्र में इस मुद्दे को लेकर बढ़ती चिंता को सामने रखा गया।
ग्लोबल साउथ को ज्यादा आवाज देने पर जोर
घोषणापत्र में ग्लोबल साउथ को ज्यादा आवाज देने और वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की मांग की गई। BRICS ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार का समर्थन किया।
साथ ही संयुक्त राष्ट्र में ब्राजील और भारत की बड़ी भूमिका के लिए चीन और रूस के समर्थन का स्वागत किया गया। IMF, विश्व बैंक और अन्य संस्थानों में भी सुधार की मांग की गई, ताकि विकासशील देशों को ज्यादा आवाज, वोटिंग पावर और नेतृत्व के पदों पर बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके।
कुल मिलाकर, दिल्ली घोषणापत्र BRICS देशों की वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में बड़ी भूमिका की कोशिश को दिखाता है। सभी 11 देशों की सहमति भारत की अध्यक्षता के लिए अहम मानी जा रही है।