लोकसभा से पास हुआ पेपर लीक विरोधी बिल, राहुल गांधी के आरोपों पर सदन में हंगामा

लोकसभा में पेपर लीक रोकने वाला बिल पास हो गया, लेकिन चर्चा के दौरान राहुल गांधी के आरोपों ने सदन का माहौल गरमा दिया। बिल में सजा कितनी बढ़ाई गई है, फास्ट-ट्रैक कोर्ट कैसे काम करेंगे और सरकार ने आरोपों पर क्या जवाब दिया, जानने के लिए पढ़ें खबर।

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In Short

  • लोकसभा ने पेपर लीक विरोधी संशोधन बिल 2026 को ध्वनि मत से पास किया।
  • पेपर लीक के दोषी को 10 साल जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना हो सकता है।
  • राहुल गांधी के अमित शाह पर लगाए आरोपों को लेकर सदन में हंगामा हुआ।

By Gaurav Kumar:

Public Examination Amendment Bill 2026: लोकसभा ने बुधवार को ‘सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पास कर दिया। इस बिल का मकसद पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करना और ऐसे मामलों की जांच जल्दी पूरी करना है। बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के एक बयान को लेकर सदन में जोरदार हंगामा भी हुआ।

अब राज्यसभा में जाएगा बिल

लोकसभा से पास होने के बाद अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

यह बिल देशभर में हुए पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के कुछ हफ्ते बाद लाया गया है। इसमें हर राज्य में पेपर लीक के मामलों की जल्दी सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही गई है।

इसके अलावा, जांच करने वाली एजेंसियों को पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के अंदर पूरी करनी होगी।

पेपर लीक पर कड़ी सजा का प्रावधान

नए विधेयक में पेपर लीक करने वाले लोगों के लिए सजा को और सख्त किया गया है। परीक्षा का पेपर लीक करने का दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 10 साल तक की जेल हो सकती है। उस पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

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संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले सिंडिकेट पर इससे भी बड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे संगठित गिरोहों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

राहुल गांधी ने अमित शाह पर लगाए आरोप

बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन के समय छात्रों पर पुलिस कार्रवाई अमित शाह के आदेश पर हुई थी।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया और उनके शरीर में छर्रे लगे। उन्होंने यह भी कहा कि बल प्रयोग की मंजूरी केवल मंत्री या प्रधानमंत्री ही दे सकते हैं।

सत्ता पक्ष ने मांगे सबूत

राहुल गांधी के बयान के बाद बीजेपी और एनडीए के सांसदों ने विरोध शुरू कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी को अपने आरोपों के सबूत देने चाहिए।

सत्ता पक्ष के सांसदों ने राहुल गांधी से माफी की भी मांग की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें याद दिलाया कि सदन में लगाए गए किसी भी आरोप के समर्थन में सबूत होना जरूरी है।

जितेंद्र सिंह ने आरोपों को गलत बताया

बहस का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान न तो गोली चलाई गई और न ही गोली चलाने का कोई आदेश दिया गया था।

उनके मुताबिक, पुलिस ने केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि गोली चलाने का आदेश मजिस्ट्रेट दे सकते हैं, पुलिस नहीं। उन्होंने अमित शाह के 30 गाड़ियों के काफिले वाले राहुल गांधी के दावे को भी गलत बताया।

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