इस बार बाजार से गायब हो सकता है आपका पसंदीदा अल्फांसो आम! 90% तक फसल बर्बाद - जानें क्या है वजह
कभी मीठी खुशबू और शानदार स्वाद के लिए पहचान रखने वाले ये आम अब बागानों में मुश्किल से नजर आ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के कई आम बगानों में फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसान, व्यापारी और एक्सपोर्ट सभी परेशान हैं।

Alphonso Mango: महाराष्ट्र का मशहूर अल्फांसो आम (Alphonso Mango) इस साल मौसम की मार से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कभी मीठी खुशबू और शानदार स्वाद के लिए पहचान रखने वाले ये आम अब बागानों में मुश्किल से नजर आ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के कई आम बगानों में फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसान, व्यापारी और एक्सपोर्ट सभी परेशान हैं।
देवगड, जो अल्फांसो आम की सबसे प्रसिद्ध बेल्ट मानी जाती है, वहां हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। 26 साल की बागवानी एक्सपर्ट कोमल वालके बताती हैं कि उनके परिवार के तीन एकड़ के बाग में इस बार लगभग कोई आम नहीं हुआ। हालत इतने खराब है कि उन्हें ऑनलाइन ग्रॉसरी कंपनियों के ऑर्डर पूरे करने के लिए दूसरे बड़े बागानों से आम खरीदने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि अगर इस बार ऑर्डर पूरे नहीं किए, तो अगले साल बड़े ग्राहक वापस नहीं आएंगे।
भारत, दुनिया का सबसे बड़ा आम प्रोड्यूर देश
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम का उत्पादन करने वाला देश है। CRISIL के डेटा के मुताबिक 2024-25 में देश में करीब 28 मिलियन मीट्रिक टन आम का प्रोडक्शन हुआ। इनमें महाराष्ट्र का अल्फांसो खास पहचान रखता है, जिसे आमों का राजा भी कहा जाता है। लेकिन इस साल बदलते मौसम ने इसकी पूरी फसल सिस्टम काफी नुकसान पहुंचाया है।
बिजनेस टूडे की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर और जनवरी में दिन-रात के तापमान में तेज उतार-चढ़ाव ने पेड़ों में फूल आने की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद अप्रैल और मई की असामान्य गर्मी ने बची हुई फसल पर भी असर डाला। देवगड के सरकारी कृषि ऑफिसर बापुसाहेब लांबाडे के मुताबिक, इस बार मौसम इतना अस्थिर रहा कि फल बनने और बढ़ने की पूरी प्रक्रिया बुरा असर डाला।
पांच साल में आम इंडस्ट्री 3.4 बिलियन डॉलर की होगी
मॉर्डर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार भारत का आम इंडस्ट्री पिछले साल करीब 2.3 अरब डॉलर करीब ₹22,180 करोड़ की थी और 2031 तक यह 3.4 बिलियन डॉलर करीब ₹32,790 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत हर साल बड़ी मात्रा में आम और आम का पल्प एक्सपोर्ट करता है। 2025 में भारत ने करीब 56 मिलियन डॉलर के आम और 80 मिलियन डॉलर के आम पल्प का एक्सपोर्ट किया था।
आम की फसल को 85% से 90% तक हुआ नुकसान
सरकारी सर्वे में देवगड में 85% से 90% तक फसल नुकसान का अनुमान लगाया गया है। महाराष्ट्र के दूसरे आम प्रोडक्शन क्षेत्रों में भी लगभग ऐसे ही हालात देखने को मिले हैं। एक्सपर्ट् का मानना है कि इसके पीछे एल नीनो का असर भी एक बड़ी वजह है।
यह जलवायु पैटर्न दुनियाभर में मौसम को प्रभावित करता है और इस साल एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कई हिस्सों में कृषि पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी अप्रैल से जून के बीच देश के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा हीटवेव की चेतावनी दी है। इसका असर सिर्फ आम ही नहीं, बल्कि दूसरी फसलों पर भी पड़ सकता है।
एक्सपोर्ट करना हुआ महंगा
पश्चिम एशिया में तनाव और शिपिंग बाधाओं की वजह से आम भेजना महंगा और मुश्किल हो गया है। दुबई और ओमान जैसे गल्फ देशों के लिए शिपमेंट में देरी और कैंसिलेशन बढ़ गए हैं। शिपिंग लागत दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है।