फूड वेस्ट से बनेगी पानी सोखने वाली शीट! 17 साल के छात्र का अनोखा प्रोजेक्ट, पेपर प्रोडक्ट्स का बनेगा विकल्प

कैलिफोर्निया के 17 साल के छात्र अर्नव कोडावती ने फूड वेस्ट से बायोडिग्रेडेबल और लिक्विड सोखने वाली शीट बनाने का प्रयोग किया है। इस प्रोजेक्ट का मकसद खाने की बर्बादी और डिस्पोजेबल पेपर प्रोडक्ट्स से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करना है। शुरुआती टेस्ट के नतीजे भी सामने आए हैं।

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Meet Arnav Kodavati, the California teen giving food waste a new life as biodegradable paper towels (Image: isef.net)
Meet Arnav Kodavati, the California teen giving food waste a new life as biodegradable paper towels (Image: isef.net)

In Short

  • 17 वर्षीय कैलिफोर्निया छात्र अर्नव कोडावती ने फूड वेस्ट से बायोडिग्रेडेबल और पानी सोखने वाली पेपर टॉवल शीट बनाने का प्रयोग किया है।
  • इस प्रक्रिया में खाने के कचरे से सेलुलोज निकालकर पेक्टिन और कैल्शियम ट्रीटमेंट की मदद से मजबूत शीट तैयार की गई।
  • रिसर्च में सामने आया कि यह सामग्री भविष्य में पेपर टॉवल के अलावा पैकेजिंग, वाइप्स और अन्य सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स के लिए इस्तेमाल हो सकती है।

By Gaurav Kumar:

अमेरिका के कैलिफोर्निया के 17 वर्षीय छात्र अर्नव कोडावती ने ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसमें फेंके जाने वाले फूड वेस्ट से बायोडिग्रेडेबल और लिक्विड सोखने वाली शीट बनाने की कोशिश की गई है। उनका यह रिसर्च इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर में पेश किया गया।

यह प्रोजेक्ट दो बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं को कम करने की कोशिश करता है- खाने की बर्बादी और डिस्पोजेबल पेपर प्रोडक्ट्स से होने वाला पर्यावरण को नुकसान।

फूड स्क्रैप से निकाला जाता है सेलुलोज

कोडावती के तरीके में सबसे पहले फूड स्क्रैप को सुखाकर छोटे कणों में बदला जाता है। इसके बाद एसिड, अल्कलाइन और ब्लीचिंग प्रक्रिया से सेलुलोज फाइबर को अलग किया जाता है। सेलुलोज पौधों में पाया जाने वाला रेशेदार पदार्थ है, जो शीट बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इसके बाद सेलुलोज को पेक्टिन नाम के प्राकृतिक प्लांट पॉलिमर के साथ मिलाकर पतली शीट बनाई जाती है। कैल्शियम क्लोराइड ट्रीटमेंट से इसकी मजबूती बढ़ाने की कोशिश की जाती है, ताकि पानी सोखने के बाद भी शीट जल्दी टूटे नहीं।

मजबूती बढ़ी, लेकिन सोखने की क्षमता पर असर

टेस्ट में सामने आया कि कैल्शियम ट्रीटमेंट से शीट की गीली अवस्था में मजबूती बढ़ी। बिना ट्रीटमेंट वाली सामग्री की वेट स्ट्रेंथ करीब 0.19 न्यूटन थी, जो प्रक्रिया के बाद बढ़कर 0.34 न्यूटन तक पहुंच गई।हालांकि, कुछ फॉर्मूलेशन में पानी सोखने की गति 20 से 40 फीसदी तक कम हुई। तैयार किए गए 5x5 सेंटीमीटर के प्रोटोटाइप ने करीब 5 से 6 मिलीलीटर तरल सोखा।

क्या यह बाजार में सस्ता ऑप्शन बन सकता है?

कोडावती ने अनुमान लगाया कि बड़े स्तर पर उत्पादन होने पर 100 शीट की लागत करीब 2.98 डॉलर हो सकती है, जबकि तुलना के लिए इस्तेमाल किए गए सस्टेनेबल पेपर टॉवल की कीमत करीब 3.40 डॉलर प्रति 100 शीट थी। हालांकि, यह सिर्फ अनुमान है।

कमर्शियल प्रोडक्शन के लिए फूड वेस्ट कलेक्शन, ट्रांसपोर्ट, प्रोसेसिंग, ऊर्जा और क्वालिटी कंट्रोल जैसी चुनौतियों का सामना करना होगा।यह तकनीक भविष्य में पेपर टॉवल के अलावा वाइप्स, पैकेजिंग मटेरियल और एब्जॉर्बेंट मैट जैसे उत्पादों में भी इस्तेमाल हो सकती है। फिलहाल यह प्रयोग शुरुआती चरण में है, लेकिन यह दिखाता है कि आज का कचरा कल की टिकाऊ सामग्री बन सकता है।

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