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Homeट्रेंडिंगPhotosक्या होता है सोलर स्टॉर्म और कितना है इंसानों को खतरा? NASA ने बताया CME का असली असर

क्या होता है सोलर स्टॉर्म और कितना है इंसानों को खतरा? NASA ने बताया CME का असली असर

सूरज से निकलने वाले कोरोनल मास इजेक्शन यानी CME को लेकर अक्सर धरती पर खतरे की चर्चा होती है। NASA और NOAA के मुताबिक, ये विशाल प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र के बादल होते हैं, जो सैटेलाइट, पावर ग्रिड और नेविगेशन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन इंसानों को सीधे नुकसान नहीं पहुंचाते।

Coronal Mass Ejection
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कोरोनल मास इजेक्शन यानी CME सूर्य के कोरोना से निकलने वाला प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का एक बड़ा विस्फोट होता है। NOAA के अनुसार, CME में अरबों टन सामग्री बाहर निकल सकती है और इसकी रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति सेकंड से लेकर करीब 3,000 किलोमीटर प्रति सेकंड तक हो सकती है।
 

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CME तब बन सकते हैं जब सूर्य के निचले कोरोना में मौजूद तनावग्रस्त और मुड़ी हुई चुंबकीय संरचनाएं मैग्नेटिक रीकनेक्शन की प्रक्रिया से दोबारा व्यवस्थित होती हैं। इस प्रक्रिया में ऊर्जा रिलीज हो सकती है, जिससे सोलर फ्लेयर बन सकता है और प्लाज्मा सूर्य से दूर तेजी से निकल सकता है।
 

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सोलर फ्लेयर से निकलने वाला रेडिएशन प्रकाश की गति से चलता है और करीब 8 मिनट में धरती तक पहुंच सकता है। वहीं CME प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का चलता हुआ बादल होता है। धरती की ओर आने वाले सबसे तेज CME करीब 15 से 18 घंटे में पहुंच सकते हैं, जबकि धीमे CME को कई दिन लग सकते हैं।
 

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CME की गतिविधि सूर्य के करीब 11 साल के चक्र से जुड़ी होती है। NASA के अनुसार, सोलर मिनिमम के समय करीब एक CME प्रति सप्ताह और सोलर मैक्सिमम के समय औसतन दो से तीन CME रोजाना हो सकते हैं। अगर CME सही दिशा में धरती की ओर आता है, तो यह जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म पैदा कर सकता है। इसके कारण पावर ग्रिड में बदलाव, सैटेलाइट संचालन में समस्या, नेविगेशन में गलती और जियोमैग्नेटिक करंट जैसी स्थितियां बन सकती हैं।

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NASA के अनुसार, CME के कण धरती के वायुमंडल को पार करके सतह पर मौजूद लोगों को सीधे नुकसान नहीं पहुंचा सकते। कुछ अध्ययनों में CME गतिविधि और हार्ट अटैक, स्ट्रोक, माइग्रेन या ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों के बीच संबंध की बात कही गई है, लेकिन इसका कारण साबित नहीं हुआ है।

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सोलर एक्टिविटी धरती के ऊपरी वायुमंडल को गर्म और फैला सकती है, जिससे लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट्स पर ड्रैग बढ़ सकता है। NASA के नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी में बढ़े हुए वायुमंडलीय ड्रैग के कारण ऑर्बिट में बदलाव की जरूरत पड़ी। अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रेडिएशन का खतरा ज्यादा सीधे तौर पर सोलर एनर्जेटिक पार्टिकल इवेंट्स से जुड़ा होता है, जो बड़े सोलर विस्फोटों के साथ हो सकते हैं। धरती के मैग्नेटोस्फेयर से बाहर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों पर इसका असर ज्यादा हो सकता है।
 

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