• BUSINESS TODAY
  • BT BAZAAR
  • INDIA TODAY
  • AAJ TAK
  • GNTTV
  • BRIDE'S TODAY
  • COSMOPOLITIAN
  • HARPERS'S BAZAAR
  • INDIA TODAY GAMING
  • ISHQ FM
  • KISAN TAK
  • LALLANTOP
  • NORTHEAST
  • होम
  • शेयर बाज़ार
  • वीडियो
  • ट्रेंडिंग
  • बिजनेस न्यूज
  • पर्सनल फाइनेंस
  • टेक्नोलॉजी
  • म्यूचु्अल फंड
  • ऑटो
  • मार्केट
Advertisement
Homeट्रेंडिंगPhotosपटरी पर आते ही छा गई Namo Green Rail! 5 दिन में 900 KM का पूरा किया सफर, एक समोसे जितना है किराया

पटरी पर आते ही छा गई Namo Green Rail! 5 दिन में 900 KM का पूरा किया सफर, एक समोसे जितना है किराया

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन नमो ग्रीन रेल ने जींद-सोनीपत रूट पर सिर्फ 5 दिनों में 900 किलोमीटर का सफर पूरा किया है। इसमें करीब 2600 यात्री बैठ सकते हैं और टिकट की कीमत 10 से 25 रुपये है। यह ट्रेन धुआं नहीं छोड़ती और इससे सिर्फ पानी की भाप निकलती है।

पांच दिन में 900 किमी दौड़ी नमो ग्रीन रेल
1/7

भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल यात्री ट्रेन नमो ग्रीन रेल का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन पर किया था। यह ट्रेन 90 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रूट पर चलती है और कमर्शियल सेवा शुरू होने के पहले पांच दिनों में करीब 900 किलोमीटर का सफर पूरा कर चुकी है।

Advertisement
2/7

ट्रेन में हाइड्रोजन गैस भरी जाती है। यह गैस ट्रेन में लगे फ्यूल सेल तक पहुंचती है और हवा की ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली बनाती है। इसी बिजली से ट्रेन चलती है। इस दौरान सिर्फ पानी की भाप और गर्मी निकलती है। ट्रेन से धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती और शोर भी बहुत कम होता है।

3/7

नमो ग्रीन रेल में 10 कोच हैं और इसमें करीब 2600 यात्री सफर कर सकते हैं। यात्री क्षमता के हिसाब से यह दुनिया में चल रही सबसे बड़ी हाइड्रोजन ट्रेन है। ट्रेन में दो पावर कार लगी हैं और हर पावर कार में 1200 किलोवाट का फ्यूल सेल सिस्टम है। इस तरह ट्रेन की कुल ताकत 2400 किलोवाट है। इसे चेन्नई की ICF में डिजाइन और तैयार किया गया है।

4/7

हाइड्रोजन से यात्री ट्रेन चलाने वाले देशों की सूची में अब भारत भी शामिल हो गया है। इससे पहले जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका में ऐसी ट्रेनें चल रही थीं। जर्मनी में हाइड्रोजन ट्रेन 2018 से चल रही है। भारत की नमो ग्रीन रेल में 10 कोच हैं और यह आकार व यात्री क्षमता में दुनिया की दूसरी हाइड्रोजन ट्रेनों से बड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दुनिया के लिए नया उदाहरण बताया है।

Advertisement
5/7

नई हाइड्रोजन तकनीक से चलने के बाद भी नमो ग्रीन रेल का किराया सामान्य DMU ट्रेन जितना ही रखा गया है। यात्रियों को एक सफर के लिए सिर्फ 10 से 25 रुपये देने होते हैं। यह ट्रेन 90 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रूट पर रोज दो बार आना-जाना करती है। इसकी सबसे ज्यादा रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा है।

6/7

ट्रेन में हाइड्रोजन भरने के लिए जींद में देश में तैयार किया गया खास स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाया गया है। इसकी क्षमता 3000 किलोग्राम है। यहां बिजली और पानी की मदद से ग्रीन हाइड्रोजन तैयार की जाती है, यानी इसे कोयला या पेट्रोलियम जैसे ईंधन से नहीं बनाया जाता। यह स्टेशन 17 जुलाई से ट्रेन की रोजाना कमर्शियल सेवा के लिए हाइड्रोजन की सप्लाई कर रहा है।

7/7

भारतीय रेलवे हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज योजना के तहत 35 हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी कर रहा है। इन ट्रेनों को दार्जिलिंग और ऊटी जैसी पहाड़ी और पुरानी हेरिटेज रेल लाइनों पर चलाया जाएगा। एक ट्रेन की कीमत करीब 80 करोड़ रुपये है, जबकि हर रूट पर जरूरी सुविधाएं तैयार करने में करीब 70 करोड़ रुपये और खर्च हो सकते हैं। भारतीय रेलवे का लक्ष्य 2030 तक रेल से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह खत्म करना है।

Advertisement
Advertisement
Follow Us On:
  • ABOUT US
  • CONTACT US
  • TERMS AND CONDITIONS
Copyright © 2025 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today