दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन से 4 घंटे से कम में होगा सफर! जानिए रूट, स्पीड और किन शहरों को मिलेगा फायदा
दिल्ली–वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर 865 किलोमीटर लंबा होगा। इस रूट पर आगरा, लखनऊ और प्रयागराज समेत करीब 12 स्टेशन बनाने की योजना है, जबकि अयोध्या के लिए अलग लिंक प्रस्तावित है। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद दिल्ली से वाराणसी का 10 घंटे से ज्यादा का सफर घटकर 4 घंटे से कम रह सकता है। जानें इसका पूरा रूट, लागत और प्रोजेक्ट का स्टेटस।

दिल्ली–वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई–अहमदाबाद लाइन के बाद भारत का सबसे एडवांस प्रस्तावित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट है। यह करीब 865 किलोमीटर लंबा होगा और दिल्ली के साथ उत्तर प्रदेश के 22 जिलों से गुजरेगा। इसके शुरू होने के बाद दिल्ली से वाराणसी का सफर 10 घंटे से घटकर करीब 3 घंटे 55 मिनट रह सकता है।
इस कॉरिडोर को 350 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड के हिसाब से डिजाइन किया गया है। हालांकि, कमर्शियल ऑपरेशन के दौरान ट्रेन की रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की उम्मीद है, जो मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन लाइन के बराबर है। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद दिल्ली से वाराणसी का सफर करीब 3 घंटे 55 मिनट में पूरा हो सकेगा। अभी सबसे तेज एक्सप्रेस ट्रेन से यह यात्रा 10 घंटे से ज्यादा समय लेती है।
यह कॉरिडोर भारत के चार बड़े धार्मिक और पर्यटन स्थलों को एक ही लाइन से जोड़ेगा। इनमें आगरा का ताजमहल, प्रयागराज का संगम, लिंक रूट के जरिए अयोध्या का राम मंदिर और वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर शामिल हैं। गौतम बुद्ध नगर में बन रहा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी इस रूट का एक स्टेशन होगा। इससे यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक अहम इंटरचेंज बन सकता है।
भारत में प्रस्तावित सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में दिल्ली–वाराणसी प्रोजेक्ट सबसे एडवांस माना जा रहा है। NHSRCL ने इसकी पहली डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट 29 अक्टूबर 2020 को रेल मंत्रालय को सौंप दी थी। 865 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के लिए LiDAR एरियल सर्वे भी पूरा हो चुका है। इस सर्वे में लेजर सेंसर लगे हेलीकॉप्टर की मदद से प्रस्तावित रूट के दोनों तरफ 300 मीटर तक के इलाके की मैपिंग की गई। अकेले रायबरेली में यह सर्वे 60 गांवों से होकर किया गया।
दिल्ली–वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 1.21 लाख करोड़ रुपये से 1.71 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। NHSRCL ने इसकी पहली Detailed Project Report 29 अक्टूबर 2020 को रेल मंत्रालय को सौंपी थी। 865 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के लिए LiDAR एरियल सर्वे भी पूरा किया जा चुका है। हालांकि अभी कानपुर को स्टेशन के रूप में शामिल नहीं किया गया है। कानपुर के सांसद अवस्थी ने संसद में इसे लेकर मुद्दा उठाया है और DPR की समीक्षा कर शहर को जोड़ने की मांग की है। साथ ही 320 kmph की रफ्तार के लिए रूट में तेज मोड़ कम करने के मकसद से अलाइनमेंट में भी बदलाव किया जा रहा है।