AI को लेकर World Bank की बड़ी सलाह! भारत के 3 करोड़ किसानों का उदाहरण देकर समझाई ये अहम बात

AI की बढ़ती दौड़ के बीच विश्व बैंक ने विकासशील देशों को बड़ी सलाह दी है। अपनी वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 में बैंक ने बताया है कि बिना अरबों रुपये खर्च किए भी AI से बड़े फायदे हासिल किए जा सकते हैं। रिपोर्ट में भारत के करोड़ों किसानों का उदाहरण भी दिया गया है। जानिए AI को लेकर विश्व बैंक ने क्या सुझाव दिए हैं।

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AI से विकासशील देशों को होगा फायदा (AI Generated Image)
AI से विकासशील देशों को होगा फायदा (AI Generated Image)

In Short

  • विश्व बैंक ने विकासशील देशों को महंगे AI सिस्टम बनाने के बजाय मौजूदा तकनीक अपनाने की सलाह दी।
  • भारत में AI से 3 करोड़ से ज्यादा किसानों को बारिश के मौसम की जानकारी पहले मिली।
  • विकासशील देशों में AI से नौकरियों पर खतरा कम, लेकिन इंटरनेट और तकनीकी कौशल जरूरी।

By Shakshi:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या विकासशील देशों को इसका फायदा उठाने के लिए अरबों रुपये खर्च करके अपनी तकनीक तैयार करनी चाहिए? विश्व बैंक (World Bank) ने अपनी वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 में इस सवाल का जवाब दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देशों को महंगे AI सिस्टम शुरू से बनाने के बजाय पहले से मौजूद तकनीक को अपनी जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल करना चाहिए।

AI पर अरबों खर्च करने की जरूरत नहीं

विश्व बैंक का कहना है कि विकासशील देश कम खर्च में भी AI से बड़े फायदे हासिल कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि मौजूदा AI टूल्स को स्थानीय जरूरतों के मुताबिक बदला जाए।

रिपोर्ट में सरकारों को सस्ते AI टूल्स अपनाने, बिजली और इंटरनेट जैसी सुविधाएं बेहतर बनाने और लोगों को तकनीकी ट्रेनिंग देने की सलाह दी गई है।

भारत के 3 करोड़ से ज्यादा किसानों को फायदा

रिपोर्ट में भारत का उदाहरण भी दिया गया है। यहां AI की मदद से मौसम का पूर्वानुमान 3 करोड़ से ज्यादा किसानों तक पहुंचाया गया।

इस तकनीक के जरिए ज्यादातर किसानों को बारिश के मौसम की जानकारी पहले के मुकाबले ज्यादा जल्दी मिली। इससे पता चलता है कि AI का इस्तेमाल आम लोगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने में किया जा सकता है।

केन्या और बांग्लादेश में भी AI का इस्तेमाल

रिपोर्ट के मुताबिक, केन्या में न्यायपालिका ने AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल करके हर साल 10,000 से ज्यादा मामलों को 1,500 से अधिक मध्यस्थों के बीच बांटने में मदद ली। इससे लंबित मामलों को कम करने में सहायता मिली।

वहीं बांग्लादेश में AI की मदद से मेडिकल इमेजिंग का इस्तेमाल करने पर डायबिटीज से जुड़ी एक समस्या की जांच कराने वाले मरीजों की दैनिक संख्या में 39.5% की बढ़ोतरी हुई।

नौकरियों पर AI का कितना खतरा?

विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि विकसित देशों के मुकाबले विकासशील देशों में AI से नौकरियों पर असर पड़ने का खतरा फिलहाल कम है। इसकी वजह यह है कि विकासशील देशों में ऐसी नौकरियों की हिस्सेदारी कम है, जिनमें AI का आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालांकि रिपोर्ट ने यह भी साफ किया कि AI का फायदा तभी मिलेगा, जब देशों में बिजली, इंटरनेट और जरूरी तकनीकी कौशल उपलब्ध होंगे।

सरकारों को क्या करना चाहिए?

विश्व बैंक ने सरकारों को छोटे स्तर पर AI प्रोजेक्ट शुरू करने और सफल प्रयोगों को बड़े स्तर पर लागू करने की सलाह दी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के लिए शुरुआत में लचीले नियम और स्वैच्छिक मानक अपनाए जा सकते हैं। साथ ही मौजूदा कानूनों के आधार पर भरोसेमंद AI सिस्टम तैयार किए जाने चाहिए।

रिपोर्ट ने अमेरिका और चीन की बड़ी AI कंपनियों पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता के जोखिम को भी उठाया है। इसके लिए ऐसे AI सिस्टम अपनाने की सलाह दी गई है, जो अलग-अलग तकनीकों के साथ काम कर सकें।

कुल मिलाकर विश्व बैंक का संदेश है कि विकासशील देशों के लिए AI की दौड़ में सबसे महंगी तकनीक बनाना जरूरी नहीं है। ज्यादा जरूरी यह है कि उपलब्ध तकनीक का इस्तेमाल स्थानीय समस्याओं को हल करने और लोगों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने में किया जाए।

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