अमेरिका में सस्ता भारत में महंगा, आखिर क्यों iPhone और Pixel की कीमतों में है इतना अंतर?
अमेरिका में जो iPhone और Pixel सस्ते मिलते हैं वही भारत आते ही महंगे क्यों हो जाते हैं? क्या इसकी वजह सिर्फ टैक्स है या कंपनियां भी अपनी कीमतें तय करने में बड़ा खेल करती हैं? iPhone 18 Pro से लेकर Google Fitbit Air तक समझिए इस कीमत के अंतर की पूरी कहानी।

In Short
- iPhone 18 Pro की कीमत भारत में ₹1,64,900 और अमेरिका में $1,199 है।
- भारत में मोबाइल फोन पर 18% GST लगता है।
हर साल Apple का नया iPhone या Google का Pixel फोन लॉन्च होते ही भारतीय ग्राहकों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि जो फोन अमेरिका में सस्ता मिलता है वही भारत में इतना महंगा क्यों है? इस बार iPhone 18 Pro और Google Pixel 11 सीरीज के साथ Google Fitbit Air की कीमतों को लेकर भी यही सवाल उठ रहा है। Fitbit Air अमेरिका में 100 डॉलर से कम कीमत पर उपलब्ध है जबकि भारत में इसकी लॉन्च कीमत 13,000 रुपये रखी गई है।
लेकिन इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि Apple और Google भारत में ज्यादा कीमत वसूलते हैं। इसके पीछे टैक्स से लेकर इंपोर्ट ड्यूटी और कंपनियों की प्राइसिंग स्ट्रैटिजी तक कई बातें काम करती हैं।
iPhone 18 Pro की कीमत में कितना अंतर?
Apple ने iPhone 18 Pro की अमेरिकी शुरुआती कीमत 1,199 डॉलर रखी है। वहीं भारत में इसकी शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये है। 1 अक्टूबर 2026 के आसपास डॉलर की कीमत करीब 96 रुपये मानें तो 1,199 डॉलर लगभग 1.15 लाख रुपये होते हैं।
इस हिसाब से अमेरिकी कीमत और भारत की कीमत में करीब 50,000 रुपये का अंतर दिखाई देता है। हालांकि, दोनों कीमतों की सीधे तुलना करना पूरी तरह सही नहीं है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका में वेबसाइट पर दिखाई जाने वाली कीमत में आमतौर पर सेल्स टैक्स शामिल नहीं होता। यह टैक्स राज्य और शहर के हिसाब से अलग हो सकता है और भुगतान के समय जुड़ता है।
वहीं भारत में दिखाई जाने वाली कीमत में GST पहले से शामिल होता है।
भारत में कीमत के अंदर ही शामिल है 18% GST
भारत में मोबाइल फोन पर 18% GST लगता है। GST काउंसिल के रिकॉर्ड के मुताबिक मोबाइल फोन और उनके पार्ट्स पर GST को 12% से बढ़ाकर 18% किया गया था। यह बदलाव 1 अप्रैल 2020 से लागू हुआ।
अगर iPhone 18 Pro की 1,64,900 रुपये की कीमत से 18% GST को अलग करके देखें तो इसकी प्री-GST कीमत करीब 1.40 लाख रुपये बैठती है। यानी पूरी रकम Apple की कमाई नहीं होती। इसके बावजूद भारत में फोन की कीमत अमेरिकी प्री-टैक्स कीमत से ज्यादा रहती है। इसलिए इस अंतर को सिर्फ GST के आधार पर नहीं समझा जा सकता।
इंपोर्ट ड्यूटी से लेकर प्राइसिंग स्ट्रैटिजी तक का खेल
फोन की कीमत तय होने में इंपोर्ट ड्यूटी, कंपोनेंट्स की लागत, डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल मार्जिन की भी भूमिका होती है। इसके अलावा कंपनियां भारत में अपने प्रोडक्ट को किस प्राइस सेगमेंट में रखना चाहती हैं, यह भी कीमत को प्रभावित करता है।
भारत में बनता है iPhone फिर भी क्यों महंगा?
Apple ने भारत में iPhone मैन्युफैक्चरिंग और असेंब्ली का बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। लेकिन भारत में फोन बनने का मतलब यह नहीं है कि उसके सभी कंपोनेंट्स भी यहीं बनते हैं। कई कंपोनेंट्स अब भी ग्लोबल सप्लाई चेन से आते हैं।
यानी भारत और अमेरिका में फोन की कीमतों का अंतर समझने के लिए सिर्फ टैक्स नहीं, बल्कि सप्लाई चेन, डिस्ट्रीब्यूशन और कंपनियों की प्राइसिंग स्ट्रैटिजी को भी देखना जरूरी है।