क्या होती है GPS स्पूफिंग? विमानों को भटकाने वाला यह 'साइबर हथियार' कितना खतरनाक?

दिल्ली एयरपोर्ट पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के दौरे के कुछ घंटों बाद GPS Spoofing की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी। 10 से ज्यादा विमानों को गलत लोकेशन सिग्नल मिले, जिससे फ्लाइट्स प्रभावित हुईं। जानिए GPS Spoofing क्या है, यह कितना खतरनाक है और क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं।

Advertisement

By Gaurav Kumar:

What is GPS Spoofing: 23 मई को जैसे ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो दिल्ली पहुंचे, कुछ ही घंटों बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक गंभीर तकनीकी गड़बड़ी सामने आई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयरपोर्ट के आसपास उड़ रहे करीब 10 से 12 विमानों ने GPS Spoofing की शिकायत की। इसके बाद सरकारी एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं और मामले की जांच शुरू कर दी गई।

आखिर हुआ क्या था?

दिल्ली एयरपोर्ट के करीब पहुंच रहे कई विमानों के नेविगेशन सिस्टम को गलत लोकेशन सिग्नल मिलने लगे। स्थिति को गंभीर मानते हुए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने तुरंत कदम उठाए और विमानों के बीच की दूरी बढ़ा दी, ताकि पायलट्स को सुरक्षित तरीके से लैंडिंग कराने के लिए ज्यादा समय मिल सके।

इस वजह से एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए भीड़भाड़ बढ़ गई और कई फ्लाइट्स में देरी भी हुई। एयर ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में उन्हें GPS आधारित आधुनिक सिस्टम की बजाय पुराने समय की नेविगेशन प्रक्रिया अपनानी पड़ती है, जैसा GPS आने से पहले किया जाता था।

GPS Spoofing आखिर होता क्या है?

GPS Spoofing एक तरह का साइबर हमला होता है। इसमें नकली GPS सिग्नल भेजकर किसी डिवाइस या विमान के नेविगेशन सिस्टम को कंफ्यूज  किया जाता है।

सरल भाषा में समझें तो विमान का सिस्टम यह मानने लगता है कि वह किसी दूसरी जगह पर मौजूद है, जबकि उसकी असली लोकेशन कुछ और होती है। यानी पायलट के सिस्टम में गलत दिशा या गलत लोकेशन दिखाई देने लगती है।

यह कितना खतरनाक हो सकता है?

आज के समय में विमान, जहाज, मोबाइल फोन, बैंकिंग सिस्टम और कई सरकारी नेटवर्क GPS पर निर्भर हैं। ऐसे में GPS Spoofing सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा खतरा माना जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया जाए, तो इससे  विमानों की नेविगेशन प्रणाली प्रभावित, उड़ानों की सुरक्षा पर असर, एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट में गड़बड़ी और सैन्य और सेंसिटिव इन्स्टिट्यूट, क्षेत्रों को खतरा हो सकता है

GPS Spoofing काम कैसे करता है?

GPS सैटेलाइट पृथ्वी पर लगातार कमजोर सिग्नल भेजते हैं, जिनकी मदद से विमान या डिवाइस अपनी लोकेशन तय करते हैं। स्पूफिंग करने वाला व्यक्ति या सिस्टम नकली GPS सिग्नल तैयार करता है, जो असली सिग्नल से ज्यादा ताकतवर होते हैं। फिर डिवाइस या विमान का रिसीवर इन नकली सिग्नल्स को ही असली मान लेता है और गलत लोकेशन दिखाने लगता है।

क्यों बढ़ रही हैं GPS Spoofing की घटनाएं?

पहले इस तरह की तकनीक बेहद महंगी और सीमित थी, लेकिन अब सस्ते हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की मदद से नकली GPS सिग्नल बनाना आसान हो गया है। इसी वजह से दुनिया भर में एयरपोर्ट्स, रक्षा एजेंसियों और साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ती जा रही है।

क्या मार्को रूबियो की यात्रा से इसका कोई संबंध है?

फिलहाल अधिकारियों ने इस घटना को सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की यात्रा से जोड़कर कुछ नहीं कहा है। लेकिन चूंकि यह घटना उनके दिल्ली पहुंचने के कुछ घंटों बाद हुई, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां मामले को बेहद गंभीरता से लेकर जांच कर रही हैं।

अभी तक यह साफ नहीं है कि यह तकनीकी गड़बड़ी थी, साइबर हमला था या फिर किसी अन्य वजह से GPS सिग्नल प्रभावित हुआ। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली सिग्नल कहां से और कैसे आया।

Read more!
Advertisement