UPI पर लगेगा MDR? सरकार ने साफ किया कौन देगा चार्ज और किसके लिए रहेगा फ्री

UPI पेमेंट पर MDR को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। क्या ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज लगेगा और इसका पैसा ग्राहक को देना होगा? सरकार ने संसद में इससे जुड़ी तस्वीर साफ कर दी है। जानिए MDR क्या है, किस पर लग सकता है और किसके लिए UPI फ्री रहेगा।

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In Short

  • आम UPI यूजर्स को ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा, P2P पेमेंट फ्री रहेंगे।
  • MDR लागू हुआ तो यह तय सीमा से ऊपर के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही लग सकता है।
  • NPCI ने MDR पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है, RBI ने भी कहा कि चर्चा जारी है।

By Gaurav Kumar:

UPI Payment Charge: UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर पिछले कुछ दिनों से चर्चा तेज है। लोगों के मन में सवाल था कि क्या अब UPI से 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट करने पर उन्हें कोई चार्ज देना पड़ेगा? इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार पर सवाल उठाए। अब सरकार ने संसद में इससे जुड़ी स्थिति साफ कर दी है।

लोकसभा ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में बदलाव से जुड़े विधेयक को पारित कर दिया है। इसके बाद सरकार ने बताया कि MDR की जरूरत क्यों पड़ सकती है और इसका आम UPI यूजर्स पर क्या असर होगा।

आखिर क्या होता है MDR?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह चार्ज है, जो व्यापारी डिजिटल ट्रांजैक्शन पूरा करने के लिए बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देते हैं। यानी यह चार्ज आम ग्राहक की जगह मर्चेंट से जुड़ा होता है।

नया विधेयक सरकार को बैंकों और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स को UPI और अन्य नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड से किए गए भुगतानों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार देता है।

आम UPI यूजर को नहीं देना होगा ट्रांजैक्शन चार्ज

सरकार ने साफ किया है कि UPI के जरिए पेमेंट करने वाले आम यूजर्स को कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा। भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो यह सीमित संख्या में मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगाया जा सकता है।

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वित्त मंत्रालय के मुताबिक, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे। व्यापारियों के ज्यादातर लेनदेन पर भी इसका असर नहीं होगा।

MDR लगा तो सभी पेमेंट पर नहीं होगा लागू

सरकार के मुताबिक, अगर MDR लागू किया जाता है तो यह एक तय सीमा से ऊपर के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही लगेगा। इसकी दर भी डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR के मुकाबले काफी कम रखी जा सकती है। यानी सभी UPI ट्रांजैक्शन पर एक जैसा MDR लगाने की बात नहीं है।

सरकार का कहना है कि UPI ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए लगातार निवेश की जरूरत है।

MDR पर अभी अंतिम फैसला नहीं

वित्त मंत्री ने भी साफ किया है कि अगर MDR लागू होता है तो इसका बोझ व्यापारियों पर होगा, ग्राहकों पर नहीं। साथ ही NPCI की अध्यक्षता वाली UPI और सेवा संचालन समिति ने MDR पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा है कि MDR के मुद्दे पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी और भुगतान व्यवस्था को लेकर विचार-विमर्श जारी है।

सरकार ने बाहरी दबाव के दावे किए खारिज

वित्त मंत्रालय ने उन रिपोर्ट्स को भी खारिज किया है, जिनमें नीतिगत बदलाव के पीछे बाहरी प्रभाव होने की बात कही गई थी। सरकार ने ऐसे दावों को बेबुनियाद, झूठा और भ्रामक बताया है। सरकार का कहना है कि अगर बाहरी दबाव नीति को प्रभावित करता तो 2016 में UPI शुरू नहीं होता और जनवरी 2020 से इसे व्यापारियों और नागरिकों के लिए फ्री नहीं किया जाता।

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