UPI से पेमेंट पर लगेगा चार्ज तो क्या महंगा होगा सामान? छोटे दुकानदारों को लेकर स्टडी में चौंकाने वाली बात

UPI पर ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर 0.40% चार्ज लगाने की योजना को लेकर नई चिंता सामने आई है। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस की स्टडी बताती है कि इसका असर सिर्फ बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं रह सकता। छोटे दुकानदारों की कमाई और ग्राहकों के सामान की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका है। जानिए स्टडी में क्या सामने आया।

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UPI पर प्रस्तावित MDR चार्ज से छोटे दुकानदारों की बढ़ सकती है मुश्किल, सामान की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका। (AI Generated Image)
UPI पर प्रस्तावित MDR चार्ज से छोटे दुकानदारों की बढ़ सकती है मुश्किल, सामान की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका। (AI Generated Image)

In Short

  • ₹2,000 से ज्यादा के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.40% MDR का प्रस्ताव।
  • ISB सर्वे में 70% दुकानदार ₹2,000 से ज्यादा का सप्लायर पेमेंट करते हैं।
  • अतिरिक्त चार्ज से सामान महंगा होने और नकद भुगतान बढ़ने की आशंका।

By Shakshi:

UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की योजना छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। सितंबर 2026 में घोषणा की गई थी कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.40% MDR लगाया जाएगा। इसे पहले 15 अक्टूबर से लागू किया जाना था, लेकिन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने दिवाली के बाद तक टाल दिया। अब इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) की एक स्टडी में इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई है।

छोटे दुकानदारों पर कैसे पड़ेगा असर?

ISB ने 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 722 रेहड़ी-पटरी वालों का सर्वे किया। इसमें सामने आया कि करीब 70% दुकानदार अपने सप्लायर्स को एक बार में 2,000 रुपये से ज्यादा का भुगतान करते हैं।

अगर सप्लायर्स UPI पेमेंट पर अतिरिक्त चार्ज वसूलते हैं, तो लगभग सभी ऐसे दुकानदार नकद भुगतान की तरफ लौट सकते हैं। सर्वे में 10.4% दुकानदारों ने बताया कि उनसे पिछले 10 दिनों में UPI पेमेंट के लिए अतिरिक्त पैसे मांगे गए थे।

₹15,000 के पेमेंट पर कितना लगेगा चार्ज?

स्टडी के सह-लेखक आनंद सुधाकरण ने उदाहरण देकर समझाया कि अगर कोई दुकानदार सप्लायर से 15,000 रुपये का सामान खरीदता है, तो 0.40% MDR के हिसाब से करीब 60 रुपये का चार्ज बनेगा।

यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन अगर दुकानदार रोजाना 1,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाता है, तो 60 रुपये उसके मुनाफे के 6% के बराबर होंगे।

स्टडी के मुताबिक, सप्लायर्स से सामान खरीदने की लागत बढ़ने पर दुकानदार ग्राहकों के लिए कीमतें भी बढ़ा सकते हैं। हालांकि, नियमों के मुताबिक MDR का भुगतान कारोबारियों को करना होगा, ग्राहकों को नहीं।

बड़े और छोटे शहरों में UPI का कितना इस्तेमाल?

सर्वे के मुताबिक, टियर-1 शहरों में 82% दुकानदार डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते हैं। वहीं, टियर-2 शहरों में यह आंकड़ा 66% और टियर-3 शहरों में 64% है।

प्रस्तावित चार्ज की जानकारी भी सभी दुकानदारों को नहीं है। टियर-1 शहरों में 66%, टियर-2 में 55% और टियर-3 में सिर्फ 47% दुकानदारों ने इसके बारे में सुना था।

MDR लागू करने पर क्या कहती है स्टडी?

ISB की स्टडी में MDR लागू करने से पहले इसके व्यापक असर को समझने की जरूरत बताई गई है। छोटे पेमेंट को चार्ज से छूट देने के बावजूद दुकानदारों को थोक खरीदारी पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

ISB के प्रोफेसर प्रसन्न तंत्री का कहना है कि UPI की लागत के साथ उसके फायदों को भी देखना जरूरी है। UPI ट्रांजैक्शन डेटा से फिनटेक कंपनियों को दुकानदारों की कमाई और कैश फ्लो समझने में मदद मिलती है। उनके मुताबिक, अगर पूरी समीक्षा के बाद सिस्टम को टिकाऊ बनाने के लिए MDR जरूरी साबित होता है, तो इसे लगाया जाना चाहिए।

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