UPI के 10 साल में बदल गया पूरा पेमेंट सिस्टम, अब अगले दौर में बदल सकती है पूरी तस्वीर
UPI ने 10 साल में भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम की तस्वीर बदल दी है। ट्रांजैक्शन वॉल्यूम से लेकर बैंकिंग नेटवर्क और ग्लोबल पहुंच तक इसका दायरा तेजी से बढ़ा है। अब UPI का अगला चरण सिर्फ पेमेंट तक सीमित नहीं रहकर वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने की दिशा में बढ़ रहा है।

In Short
- UPI ने 10 साल में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 13,000 गुना बढ़ोतरी दर्ज की
- जुलाई 2026 तक UPI से जुड़े बैंकों की संख्या बढ़कर 741 हो गई
- UPI अब 11 देशों में ऑपरेशनल है और ग्लोबल रियल टाइम पेमेंट में बड़ी हिस्सेदारी रखता है
भारत में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदलने वाला यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI अब 10 साल पूरे कर चुका है। घरेलू डिजिटल पेमेंट सिस्टम के रूप में शुरू हुआ UPI अब वैश्विक स्तर पर भी बड़ी पहचान बना चुका है। 2025 में दुनिया के रियल टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 49 फीसदी रही।
2016 में हुई थी UPI की शुरुआत
UPI को 25 अगस्त 2016 को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने लॉन्च किया था। यह भारतीय रिजर्व बैंक की रेगुलेटरी निगरानी में काम करता है। UPI के जरिए एक ही प्लेटफॉर्म पर व्यक्ति से व्यक्ति और व्यक्ति से व्यापारी तक तुरंत भुगतान किया जा सकता है।
पिछले एक दशक में इसके इस्तेमाल में तेज बढ़ोतरी हुई है। FY2016-17 में UPI से 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। FY2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गया। इसी दौरान ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर करीब ₹314 लाख करोड़ तक पहुंच गई।
रोजाना 66 करोड़ ट्रांजैक्शन
2026 में UPI पर रोजाना औसतन 66 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस हुए। जुलाई में मासिक ट्रांजैक्शन वॉल्यूम रिकॉर्ड 2,366 करोड़ तक पहुंच गया जबकि ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹29.88 लाख करोड़ रही। FY2025-26 में भारत के कुल डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी 84 फीसदी रही।
ऑनलाइन कारोबार के लिए भी बदला माहौल
Cashfree Payments के को फाउंडर और CEO Akash Sinha के मुताबिक UPI का असर सिर्फ ट्रांजैक्शन की संख्या तक सीमित नहीं है। एक दशक पहले ऑनलाइन कारोबार शुरू करने वालों को सीमित डिजिटल पेमेंट विकल्पों की वजह से कैश ऑन डिलीवरी पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता था।
इससे रिटर्न ज्यादा होते थे और वर्किंग कैपिटल पर दबाव पड़ता था। UPI के बढ़ते इस्तेमाल से ऑनलाइन कारोबार के लिए डिजिटल पेमेंट आसान हुआ और स्टार्टअप्स के लिए बाजार भी बड़ा हुआ।
बैंकों की संख्या 21 से बढ़कर 741
UPI की तेज ग्रोथ में बैंकों की भागीदारी का भी बड़ा योगदान रहा। लॉन्च के समय प्लेटफॉर्म पर 21 बैंक जुड़े थे। जुलाई 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 741 हो गई। इनमें सरकारी बैंक प्राइवेट बैंक स्मॉल फाइनेंस बैंक पेमेंट बैंक और कोऑपरेटिव बैंक शामिल हैं।
P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी भुगतान की हिस्सेदारी कुल UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 63 फीसदी रही। FY2026 में 86 फीसदी P2M ट्रांजैक्शन ₹500 से कम के थे।
11 देशों तक पहुंचा UPI
UPI अब 11 देशों में ऑपरेशनल है। इनमें UAE फ्रांस सिंगापुर श्रीलंका नेपाल मॉरीशस कतर कंबोडिया ग्रीस और मालदीव शामिल हैं। सरकार के मुताबिक IMF ने UPI को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा रियल टाइम पेमेंट सिस्टम माना है।
अब फोकस वित्तीय सेवाओं पर
Kiwi के को फाउंडर और COO Siddharth Mehta के मुताबिक UPI की अगली ग्रोथ वित्तीय उत्पादों तक पहुंच सकती है। UPI Lite और Credit on UPI जैसे फीचर रोजमर्रा के भुगतान के साथ क्रेडिट और दूसरी वित्तीय सेवाओं को भी आसान बना सकते हैं। उनके मुताबिक UPI का पहला दशक डिजिटल पेमेंट को आसान बनाने का रहा और अगला दशक वित्तीय उत्पादों को इसी तरह सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।