AI निवेश बूम पर श्रीधर वेम्बू की चेतावनी, बोले टेलीकॉम बबल जैसी बन सकती है बाजार की स्थिति!

जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने AI निवेश बूम को लेकर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह 1990 के दशक के टेलीकॉम बबल जैसा हो सकता है। वे AI टेक्नोलॉजी को लेकर सकारात्मक हैं लेकिन निवेशकों को बढ़ते उत्साह और बाजार के जोखिम से सावधान रहने की सलाह दी है।

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In Short

  • श्रीधर वेम्बू ने AI निवेश बूम की तुलना 1990 के दशक के टेलीकॉम बबल से की
  • AI टेक्नोलॉजी को मजबूत बताते हुए निवेश में ज्यादा जोखिम से बचने की सलाह दी
  • बढ़ती मेमोरी कीमतों और AI डिमांड से कई इंडस्ट्री पर बढ़ रहा दबाव

By Gaurav Kumar:

जोहो के फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि AI टेक्नोलॉजी में हो रही तेज निवेश की रफ्तार कहीं 1990 के दशक के टेलीकॉम बबल जैसी स्थिति न बना दे। हालांकि उनका मानना है कि AI का भविष्य मजबूत है और यह टेक्नोलॉजी अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचेगी, लेकिन निवेश में बढ़ता उत्साह बाजार के लिए खतरा बन सकता है। यही वजह है कि उन्होंने AI निवेश बूम को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

AI निवेश ने कई सेक्टर पर बढ़ाया दबाव

श्रीधर वेम्बू के मुताबिक AI निवेश बूम ने कई इंडस्ट्री की मांग को काफी बढ़ा दिया है। इसमें इलेक्ट्रिक पावर जनरेशन, ट्रांसफॉर्मर, डीजल बैकअप जनरेटर, कूलिंग सिस्टम, मेमोरी, CPU और GPU जैसे सेक्टर शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि 2026 में स्मार्टफोन और लैपटॉप की बढ़ती कीमतें भी इसी AI निवेश बूम का असर दिखाती हैं। उनके अनुसार यह पूरा निवेश आखिरकार महामारी के बाद बने बड़े क्रेडिट बबल से जुड़ा हुआ है, जिसने बाजार को कई जगह प्रभावित किया है।

टेलीकॉम बबल से की मौजूदा दौर की तुलना

वेम्बू ने मौजूदा AI निवेश चक्र की तुलना 1995 से 2000 के बीच आए टेलीकॉम निवेश बूम से की। उन्होंने कहा कि किसी टेक्नोलॉजी का असली होना जरूरी नहीं कि उससे जुड़ा निवेश भी हमेशा सफल रहे।

उन्होंने हाई स्पीड ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का उदाहरण देते हुए कहा कि आज दूरदराज के गांवों तक इंटरनेट पहुंच रहा है, लेकिन इसके बावजूद 2001 से 2003 के बीच कई टेलीकॉम इक्विपमेंट कंपनियां दिवालिया हो गई थीं।

AI को लेकर सकारात्मक लेकिन निवेश में सावधानी जरूरी

वेम्बू का मानना है कि AI टेक्नोलॉजी अपनी क्षमता हासिल करेगी, लेकिन निवेशकों को इस बूम में जरूरत से ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI की संभावनाओं पर भरोसा रखना जरूरी है, लेकिन इस टेक्नोलॉजी के नाम पर बने निवेश बुलबुले से बचना भी उतना ही जरूरी है।

उनके मुताबिक आज की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि AI के विकास को अपनाया जाए और साथ ही बाजार में बढ़ते उत्साह के कारण होने वाले नुकसान से बचा जाए।

मेमोरी कीमतों ने बढ़ाई कंपनियों की मुश्किल

श्रीधर वेम्बू ने मेमोरी कीमतों में तेज बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 महीनों में मेमोरी कीमतों में 500 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है और ये अपने सबसे निचले स्तर से 10 गुना तक ऊपर पहुंच गई हैं।

उन्होंने बताया कि बढ़ती मेमोरी कीमतों और AI टोकन कीमतों ने बिजनेस के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जोहो ने अभी तक कीमतें बढ़ाने से परहेज किया है, लेकिन लगातार बढ़ती लागत के कारण यह चुनौती बनती जा रही है।

प्रोग्रामिंग में भी आएगा बड़ा बदलाव

वेम्बू ने कहा कि लंबे समय तक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज इस सोच के साथ बनाई गईं कि मेमोरी आसानी से उपलब्ध रहेगी, लेकिन अब यह दौर बदल रहा है।

उनके अनुसार आने वाले समय में ज्यादा मेमोरी एफिशिएंट प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और बेहतर कंपाइलर की जरूरत होगी। AI एप्लिकेशन में भी कोड की सुरक्षा और बेहतर प्रोडक्टिविटी के साथ मेमोरी का सही इस्तेमाल जरूरी होगा।

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