सैटेलाइट से डेटा तक बदल रहा स्पेस बिजनेस! अब इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा बनेंगे सबसे बड़े गेमचेंजर

स्पेस सेक्टर में कमर्शियल गतिविधियां बढ़ने के साथ लॉन्च क्षमता सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग ऑर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेस डेटा नई वैल्यू चेन की अहम कड़ियां बन रहे हैं। Goldman Sachs Global Institute के मुताबिक इन क्षेत्रों पर मजबूत पकड़ रखने वाली कंपनियां बढ़ती ग्लोबल स्पेस इकोनॉमी में ज्यादा फायदा उठा सकती हैं।

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In Short

  • लो अर्थ ऑर्बिट में एक किलोग्राम भेजने की लागत 1981 के 65,400 डॉलर से घटकर करीब 1,500 डॉलर हुई
  • छोटे और सस्ते सैटेलाइट से कम्युनिकेशन अर्थ ऑब्जर्वेशन और जियोलोकेशन जैसे सेक्टर में नए मौके बने
  • लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेस डेटा पर मजबूत पकड़ रखने वाली कंपनियां ज्यादा वैल्यू हासिल कर सकती हैं

By Gaurav Kumar:

स्पेस सेक्टर में बढ़ता कमर्शियल कारोबार एक नई इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन तैयार कर रहा है। इसमें रॉकेट लॉन्च क्षमता, सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग, ऑर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेस से मिलने वाला डेटा अहम भूमिका निभा सकते हैं। Goldman Sachs Global Institute की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल स्पेस इकोनॉमी के विस्तार के साथ इन अहम हिस्सों पर मजबूत पकड़ रखने वाली कंपनियां ज्यादा फायदा उठाने की स्थिति में हो सकती हैं।

लॉन्च क्षमता बनी पहली अहम कड़ी

रीयूजेबल रॉकेट और छोटे सैटेलाइट ने अंतरिक्ष तक पहुंचने का खर्च काफी कम किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, लो अर्थ ऑर्बिट में एक किलोग्राम वजन भेजने की लागत 1981 में 65,400 डॉलर थी, जो अब करीब 1,500 डॉलर रह गई है।

इसके बावजूद लॉन्च सर्विस की अहमियत कम नहीं हुई है। स्पेस इकोनॉमी से जुड़ी लगभग हर गतिविधि के लिए किसी एसेट को ऑर्बिट तक पहुंचाना जरूरी है। दुनिया में लॉन्च सर्विस देने वाली कंपनियों की संख्या सीमित होने के कारण लॉन्च क्षमता पूरे सेक्टर की लागत को प्रभावित कर सकती है।

सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ रहा स्केल

छोटे और सस्ते सैटेलाइट ने लो अर्थ ऑर्बिट में बड़े सैटेलाइट नेटवर्क बनाना आसान किया है। इनका इस्तेमाल कम्युनिकेशन, अर्थ ऑब्जर्वेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और जियोलोकेशन जैसी सेवाओं में किया जा रहा है।

पहले बड़े और महंगे सैटेलाइट का मॉडल ज्यादा हावी था, जिन्हें बनाने और लॉन्च करने में करोड़ों डॉलर खर्च हो सकते थे। अब सैटेलाइट की संख्या बढ़ने के साथ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, जरूरी कंपोनेंट और इन्हें ऑपरेट करने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

ऑर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से नए अवसर

रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेस सेक्टर में भी दूसरे इंडस्ट्रियल सेक्टर की तरह सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है। ग्राउंड स्टेशन, सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क, पोजिशनिंग और टाइमिंग सिस्टम इसके अहम हिस्से हैं।

स्पेस आधारित कनेक्टिविटी और डेटा का इस्तेमाल बढ़ने पर पारंपरिक स्पेस कंपनियों के बाहर के बिजनेस भी इसके ग्राहक बन सकते हैं। भविष्य में यह इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार के लिए इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर जितना जरूरी बन सकता है।

स्पेस डेटा बन सकता है अहम एसेट

अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा एग्रीकल्चर, लॉजिस्टिक्स, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई सेक्टर में इस्तेमाल किया जा सकता है। बेहतर रिजॉल्यूशन और ज्यादा बार तस्वीरें मिलने से इसकी कमर्शियल वैल्यू बढ़ सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, लॉन्च लागत में कमी और बढ़ते कमर्शियलाइजेशन से निवेश और M&A गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में लॉन्च, इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों पर नियंत्रण रखने वाली कंपनियां बढ़ती स्पेस इकोनॉमी में ज्यादा वैल्यू हासिल कर सकती हैं।
 

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