एलन मस्क की Starlink का इंतजार, इधर Jio ने बनाया तगड़ा प्लान! जानें 6 लाख गांवों तक कैसे पहुंचेगा इंटरनेट
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। एलन मस्क की Starlink जहां अपनी सर्विस लॉन्च करने के लिए बाकी मंजूरियों का इंतजार कर रही है, वहीं मुकेश अंबानी की Jio ने 1,600 सैटेलाइट का बड़ा प्लान पेश किया है। इस योजना से देश के लाखों गांवों तक इंटरनेट पहुंचाने की तैयारी है। जानिए पूरा प्लान।

In Short
- रिलायंस Jio ने भारत में करीब 1,600 सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशन बनाने का प्लान पेश किया।
- Jio का लक्ष्य 6 लाख से ज्यादा गांवों और दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाना है।
- एलन मस्क की Starlink को भारत में सर्विस शुरू करने के लिए अभी बाकी नियामकीय मंजूरियों का इंतजार है।
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर मुकाबला तेज होता दिख रहा है। एक तरफ एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) भारत में अपनी सर्विस शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियों का इंतजार कर रही है। वहीं दूसरी तरफ मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने बड़ा प्लान तैयार किया है। कंपनी देशभर में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए करीब 1,600 सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशन का नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रही है।
Jio ने क्या बनाया है प्लान?
रिलायंस जियो ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट योजना पेश की।
कंपनी इस प्रोजेक्ट को 'सॉवरेन सैटेलाइट कनेक्टिविटी' नाम दे रही है। इसके तहत करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट का नेटवर्क बनाने की योजना है।
LEO सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा में काम करते हैं। जियो इसके साथ देशभर में 23 ग्राउंड स्टेशन भी बनाना चाहती है, जो अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट को जमीन पर बने नेटवर्क से जोड़ेंगे।
6 लाख से ज्यादा गांवों तक इंटरनेट पहुंचाने की तैयारी
जियो की योजना देश के उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने की है, जहां मोबाइल टावर लगाना या फाइबर केबल बिछाना मुश्किल है।
कंपनी के मुताबिक, इस नेटवर्क का मकसद 6 लाख से ज्यादा गांवों के साथ दूरदराज के इलाकों, द्वीपों और सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा समुद्री इलाकों में भी इंटरनेट सेवाएं पहुंचाने की योजना है।
मोबाइल नेटवर्क के साथ कैसे काम करेगा सैटेलाइट इंटरनेट?
जियो अपने सैटेलाइट नेटवर्क को मौजूदा मोबाइल टावर और फाइबर नेटवर्क के साथ जोड़ना चाहती है।
कंपनी की योजना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल दूरदराज के इलाकों के अलावा विमान सेवाओं, समुद्री परिवहन, सरकारी कामकाज, रक्षा और आपदा प्रबंधन में भी किया जाए।
ग्रामीण इलाकों में सीधे मोबाइल डिवाइस पर कॉलिंग की सुविधा देना भी कंपनी के विजन का हिस्सा है।
जियो का कहना है कि वह सैटेलाइट नेटवर्क की डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग, टेस्टिंग, लॉन्चिंग और संचालन जैसी पूरी प्रक्रिया भारत में ही रखना चाहती है।
भारत में Starlink की एंट्री कहां अटकी है?
जियो का यह प्लान ऐसे समय सामने आया है, जब एलन मस्क की स्टारलिंक भारत में अपनी कमर्शियल सर्विस शुरू करने के लिए बाकी मंजूरियों का इंतजार कर रही है।
स्टारलिंक को GMPCS लाइसेंस और IN-SPACe की मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, कंपनी को अभी कुछ नियामकीय शर्तें पूरी करनी हैं। स्पेक्ट्रम आवंटन भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।
हाल ही में एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत में कुछ बड़े कारोबारी स्टारलिंक की एंट्री रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
सरकार ने क्या कहा?
संचार मंत्रालय के मुताबिक, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट समेत सभी टेलीकॉम सेवाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया निष्पक्ष है और सभी कंपनियों पर समान नियम लागू होते हैं।
सरकार ने बताया कि Starlink, Jio Satellite Communications और भारती समर्थित Eutelsat OneWeb की नियामकीय प्रक्रिया लगभग एक ही चरण में है। तीनों कंपनियों की सुरक्षा संबंधी जांच जारी है।
Starlink ने भी शुरू की तैयारी
स्टारलिंक भी भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में SpaceX की अधिकारी लॉरेन ड्रेयर ने बताया कि कंपनी भारत में 20 गेटवे साइट तैयार कर चुकी है। इन साइट्स पर सैकड़ों एंटीना लगाए गए हैं।
कंपनी ने भारतीय यूजर्स का डेटा देश के भीतर रखने के लिए खास सुरक्षा इंतजाम भी तैयार किए हैं।
फिलहाल जियो ने अपना बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क प्लान पेश किया है, जबकि स्टारलिंक जरूरी मंजूरियां पूरी करने में जुटी है। हालांकि, जियो ने इस प्रस्तावित नेटवर्क के लॉन्च की तारीख नहीं बताई है।