मिनटों में मिलने वाला लोन बन सकता है मुसीबत, जानें कैसे पहचानें फर्जी Loan App

मोबाइल पर तुरंत मिलने वाला Quick Loan मुश्किल समय में मदद कर सकता है, लेकिन लापरवाही भारी पड़ सकती है। फर्जी लोन ऐप आपके पैसे के साथ निजी जानकारी को भी खतरे में डाल सकते हैं। लोन लेने से पहले लेंडर की पहचान, ऐप की विश्वसनीयता और सभी चार्ज की जांच करना जरूरी है।

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In Short

  • क्विक लोन ऐप से लोन लेने से पहले लेंडर की पहचान और उसकी विश्वसनीयता जांचना जरूरी है क्योंकि फर्जी ऐप डेटा और पैसे दोनों को खतरे में डाल सकते हैं।
  • सिर्फ Google Play Store पर मौजूद होने से कोई लोन ऐप भरोसेमंद नहीं हो जाता है। डेवलपर डिटेल प्राइवेसी पॉलिसी और यूजर रिव्यू जरूर जांचें।
  • कम ब्याज के ऑफर पर तुरंत फैसला न लें। APR प्रोसेसिंग फीस और कुल चुकाने वाली रकम समझने के बाद ही लोन लें।

By Gaurav Kumar:

मोबाइल फोन पर कुछ ही मिनटों में मिलने वाला क्विक लोन मुश्किल समय में मददगार लग सकता है, लेकिन बिना जांच-पड़ताल के ऐसे लोन ऐप का इस्तेमाल करना भारी पड़ सकता है। किसी भी ऐप को Aadhaar, PAN, बैंक अकाउंट या दूसरी निजी जानकारी देने से पहले यह समझना जरूरी है कि लोन देने वाला प्लेटफॉर्म असली और भरोसेमंद है या नहीं।

डिजिटल लोन लेते समय सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि पैसा कितनी जल्दी मिलेगा। सबसे जरूरी है कि लोन देने वाली कंपनी की पहचान और उसकी विश्वसनीयता की जांच की जाए।

आसान लोन ऑफर के पीछे छिपा हो सकता है खतरा

कई बार क्विक कैश के नाम पर ऐसे ऐप सामने आते हैं जो खुद को असली लेंडर की तरह पेश करते हैं। ये ऐप कम ब्याज पर लोन देने का दावा करते हैं, लेकिन बाद में फीस और दूसरे चार्ज जोड़ दिए जाते हैं।

ऐसे में लोन लेने वाले व्यक्ति को उम्मीद से ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है। सिर्फ आसान इंटरफेस और जल्दी अप्रूवल देखकर किसी ऐप पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।

लोन ऐप डाउनलोड करने से पहले करें जांच

किसी भी लोन ऐप को इस्तेमाल करने से पहले उसके डेवलपर का नाम, ऐप की जानकारी, प्राइवेसी पॉलिसी, कस्टमर सपोर्ट और यूजर रिव्यू जरूर जांचने चाहिए।

सिर्फ Google Play Store या दूसरे ऐप स्टोर पर मौजूद होना किसी ऐप के भरोसेमंद होने की गारंटी नहीं है। ऐप में दी गई कंपनी की जानकारी को उसकी आधिकारिक वेबसाइट से मिलाना भी जरूरी है। अगर कंपनी का नाम, संपर्क जानकारी या दूसरी डिटेल में अंतर दिखे तो सावधान हो जाना चाहिए।

प्रतीकात्मक तस्वीर

RBI से करें लेंडर की पहचान की पुष्टि

डिजिटल लोन लेते समय सबसे अहम सवाल यह है कि पैसा वास्तव में कौन दे रहा है। जिस बैंक या NBFC के नाम पर लोन दिया जा रहा है, उसकी सही जानकारी और रेगुलेटेड स्टेटस जांचना जरूरी है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह देखना चाहिए कि लोन ऐप किसी रेगुलेटेड बॉडी से जुड़ा है या नहीं। इसके लिए RBI के आधिकारिक स्रोतों और उपलब्ध डिजिटल लेंडिंग जानकारी की जांच की जा सकती है।

जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगने वाले ऐप से बचें

अगर कोई लोन ऐप कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग, मीडिया फाइल्स या दूसरी निजी जानकारी का एक्सेस मांगता है तो बिना समझे अनुमति नहीं देनी चाहिए।

KYC के लिए कुछ जरूरी परमिशन की जरूरत हो सकती है, लेकिन हर तरह की निजी जानकारी मांगना सामान्य नहीं माना जा सकता। किसी भी परमिशन को देने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह क्यों मांगी जा रही है और उसका इस्तेमाल कैसे होगा।

सिर्फ कम ब्याज देखकर न लें फैसला

लोन लेते समय सिर्फ कम इंटरेस्ट रेट देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। लोन की पूरी लागत समझना जरूरी है। इसमें APR, प्रोसेसिंग फीस, दूसरे चार्ज, रीपेमेंट शेड्यूल, अवधि और कुल चुकाई जाने वाली रकम को ध्यान से देखना चाहिए।

कई बार कम ब्याज का दावा करने वाले लोन में अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाते हैं, जिससे कुल भुगतान काफी बढ़ सकता है।

लोन लेने से पहले कुछ मिनट की सावधानी जरूरी

डिजिटल लोन लेने से पहले ऐप की जानकारी, लेंडर की पहचान और प्राइवेसी पॉलिसी की जांच करना जरूरी है। भरोसेमंद लेंडर को यह साफ बताना चाहिए कि वह कौन-सा डेटा ले रहा है और उसका इस्तेमाल किस लिए किया जाएगा।

क्विक लोन तभी फायदेमंद है जब उसके पीछे मौजूद लेंडर भरोसेमंद हो। जल्दबाजी में लिया गया आसान लोन बाद में महंगा साबित हो सकता है।

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