एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन पर लगे पब्लिक चार्जिंग पोर्ट से फ़ोन चार्ज करते हैं? ये गलती बैंक अकाउंट कर सकती है खाली

जहां भी पब्लिक USB चार्जिंग पोर्ट दिखे वहां फोन लगाना भारी पड़ सकता है। साइबर ठग जूस जैकिंग के जरिए आपके फोन में सेंध लगाकर बैंकिंग डिटेल्स OTP और पर्सनल डेटा तक पहुंच सकते हैं। आखिर ये स्कैम कैसे होता है और इससे अपने फोन को कैसे सुरक्षित रखें? पढ़िए पूरी खबर।

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In Short

  • पब्लिक USB चार्जिंग पोर्ट से फोन चार्ज करना जूस जैकिंग का खतरा बढ़ा सकता है।
  • साइबर ठग बैंकिंग डिटेल्स OTP और पर्सनल फोटो तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
  • बचाव के लिए अपना चार्जिंग एडेप्टर USB डेटा ब्लॉकर या पावर बैंक इस्तेमाल करें।

By Gaurav Kumar:

Phone Charging Scam: स्मार्टफोन आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन गया है। ऑनलाइन पेमेंट से लेकर कॉल और दूसरे जरूरी काम फोन से ही होते हैं। ऐसे में बैटरी खत्म होने पर लोग जहां चार्जिंग पोर्ट दिखता है वहीं फोन चार्ज करने लगते हैं।

एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन और बस स्टैंड जैसी जगहों पर पब्लिक चार्जिंग पोर्ट आसानी से मिल जाते हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी है क्योंकि साइबर ठग इनके जरिए फोन में मौजूद जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं।

क्या है जूस जैकिंग?

पब्लिक USB चार्जिंग स्टेशन के जरिए होने वाले इस तरह के साइबर अटैक को जूस जैकिंग कहा जाता है। इसमें साइबर ठग सार्वजनिक जगह पर लगे USB चार्जिंग स्टेशन से छेड़छाड़ कर सकते हैं या नकली चार्जिंग स्टेशन तैयार कर सकते हैं।

जब कोई यूजर ऐसे USB पोर्ट में अपना फोन लगाता है तो चार्जिंग के साथ उसका डिवाइस ठगों के लगाए सिस्टम से भी कनेक्ट हो सकता है।

बैंकिंग डिटेल्स से OTP तक हो सकता है निशाना

USB केबल का इस्तेमाल सिर्फ फोन चार्ज करने के लिए नहीं होता। इससे डेटा भी ट्रांसफर किया जा सकता है। साइबर ठग इसी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

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USB के जरिए फोन में मैलवेयर इंस्टॉल होने पर फोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है। इसमें बैंकिंग डिटेल्स, OTP और पर्सनल फोटो जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं।

चार्जिंग स्टेशन से कैसे होती है छेड़छाड़?

साइबर ठग चार्जिंग स्टेशन या USB पोर्ट के अंदर छोटा हार्डवेयर या छिपा हुआ कंप्यूटर डिवाइस लगा सकते हैं। जैसे ही फोन ऐसे पोर्ट से जुड़ता है वह इस डिवाइस से भी कनेक्ट हो सकता है।

खतरा तब और बढ़ सकता है जब चार्जिंग के दौरान फोन की स्क्रीन पर 'Trust this device' या 'Allow Data Transfer' जैसा विकल्प आए और यूजर गलती से उसे मंजूरी दे दे। इसके बाद फोन में खतरनाक मैलवेयर इंस्टॉल कर डेटा तक पहुंच बनाई जा सकती है।

जूस जैकिंग से कैसे बचाएं अपना फोन?

पब्लिक USB पोर्ट की जगह अपना चार्जिंग एडेप्टर इस्तेमाल किया जा सकता है। एडेप्टर को सीधे इलेक्ट्रिक सॉकेट में लगाकर फोन चार्ज करें। इलेक्ट्रिक सॉकेट से बिजली मिलती है लेकिन डेटा ट्रांसफर नहीं होता।

USB डेटा ब्लॉकर भी एक विकल्प है। यह USB के डेटा पिन को ब्लॉक कर देता है और फोन तक सिर्फ पावर पहुंचने देता है। इसके अलावा सफर के दौरान अपना पावर बैंक साथ रखना भी काम आ सकता है। इससे पब्लिक USB चार्जिंग पोर्ट इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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