AI ट्रेनिंग के लिए पायरेटेड किताबें डाउनलोड करने पर फंसी Meta! कोर्ट ने मांगे कर्मचारियों के नाम
Meta एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गई है। इस बार मामला AI मॉडल की ट्रेनिंग और पायरेटेड किताबों के इस्तेमाल से जुड़ा है। अमेरिकी अदालत ने कंपनी को ऐसा आदेश दिया है, जिससे कई बड़े अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आखिर क्या है पूरा विवाद और मेटा पर क्या आरोप लगे हैं?

In Short
- AI ट्रेनिंग में पायरेटेड किताबों के इस्तेमाल को लेकर मेटा विवादों में।
- अमेरिकी कोर्ट ने मेटा से फैसले में शामिल कर्मचारियों के नाम मांगे।
- मामले में डायरेक्टर और वाइस प्रेसिडेंट स्तर के अधिकारियों की भी भागीदारी की रिपोर्ट।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अमेरिका की एक अदालत ने कंपनी को उन कर्मचारियों के नाम बताने का आदेश दिया है, जिन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल की ट्रेनिंग के लिए पायरेटेड किताबें डाउनलोड करने की मंजूरी दी थी। यह मामला कॉपीराइट उल्लंघन और AI की ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले डेटा से जुड़ा है।
कोर्ट ने Meta को क्या आदेश दिया?
अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज थॉमस हिक्सन ने Meta को उन सभी कर्मचारियों की पहचान बताने का निर्देश दिया है, जो LibGen और Anna's Archive जैसी वेबसाइटों से किताबें डाउनलोड करने के फैसले में शामिल थे।
अदालत ने साफ किया है कि सिर्फ डाउनलोड करने वाले इंजीनियरों के नाम बताना काफी नहीं होगा। कंपनी को उन लोगों की जानकारी भी देनी होगी, जिन्होंने BitTorrent के जरिए किताबें डाउनलोड करने और उन्हें दूसरे यूजर्स के साथ शेयर करने का फैसला लिया था।
इससे पहले अदालत ने मेटा को अपने सर्वर की कमांड हिस्ट्री सौंपने का आदेश भी दिया था। इससे पता चल सकेगा कि डाउनलोडिंग के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कैसे हुआ था।
क्या है पूरा विवाद?
मेटा के खिलाफ यह कॉपीराइट मामला Entrepreneur Media जैसे पब्लिशर्स और सारा सिल्वरमैन तथा रिचर्ड कैड्री जैसे लेखकों ने उठाया है।
दिलचस्प बात यह है कि अदालत पहले ही AI मॉडल को किताबों से ट्रेनिंग देने को 'फेयर यूज' के दायरे में मान चुकी है। हालांकि, BitTorrent के जरिए कॉपीराइट वाली किताबों को दूसरों तक पहुंचाने का मामला अभी बाकी है।
दरअसल, BitTorrent से कोई फाइल डाउनलोड करने पर उसका कुछ हिस्सा दूसरे यूजर्स के पास भी अपलोड होता रहता है। इसी वजह से पब्लिशर्स का आरोप है कि Meta ने कॉपीराइट वाली किताबों को दूसरों तक भी पहुंचाया।
डाउनलोड किए गए डेटा का 30% हिस्सा हुआ अपलोड?
मेटा के अपने एक्सपर्ट के अनुमान के मुताबिक, अप्रैल से जुलाई 2024 के बीच कंपनी के AWS सर्वर से डाउनलोड किए गए डेटा का करीब 30 फीसदी हिस्सा दूसरे यूजर्स को अपलोड हुआ हो सकता है।
कोर्ट में सामने आए एक इंटरनल रिकॉर्ड में एक कर्मचारी ने Anna's Archive से डेटा डाउनलोड करने के लिए टोरेंट इस्तेमाल नहीं करने की बात कही थी। उसका कहना था कि ऐसा करने से फाइलें बाहर शेयर होंगी, जो कानूनी रूप से सही नहीं होगा।
इसके बावजूद मेटा ने 2022 से 2024 के बीच इन वेबसाइटों से कई बार टोरेंट के जरिए डेटा डाउनलोड किया।
Meta की दलील क्यों नहीं मानी गई?
मेटा ने कहा था कि शुरुआती दो Llama मॉडल के लिए फैसले टीम की आपसी सहमति से लिए गए थे। कंपनी ने डाउनलोडिंग को इंजीनियरों का तकनीकी फैसला बताया।
हालांकि, जज ने यह दलील स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि अगर फैसला पूरी टीम ने लिया था, तो सभी सदस्यों के नाम सामने आने चाहिए।
अब मेटा को 2023 में LibGen और अप्रैल 2024 में Anna's Archive से डेटा डाउनलोड करने के फैसलों में शामिल लोगों की पहचान बतानी होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन फैसलों में डायरेक्टर और वाइस प्रेसिडेंट स्तर के अधिकारियों की भागीदारी भी रही है। इस मामले का असर AI कंपनियों के डेटा जुटाने के तरीकों पर पड़ सकता है।