12 महीने में 500% महंगी हुई मेमोरी कीमतें, जोहो के श्रीधर वेम्बू ने दी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री को चेतावनी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती मांग के बीच मेमोरी कीमतों में बड़ा उछाल आया है। जोहो के श्रीधर वेम्बू ने कहा कि पिछले 12 महीनों में मेमोरी की कीमतें 500 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। अब टेक कंपनियों को कम मेमोरी में बेहतर सॉफ्टवेयर बनाने की जरूरत पड़ सकती है।

In Short
- जोहो के श्रीधर वेम्बू ने कहा पिछले 12 महीनों में मेमोरी कीमतें 500 प्रतिशत तक बढ़ीं
- DDR5 और DDR4 रैम किट की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया
- एआई के दौर में डेवलपर्स को ज्यादा मेमोरी एफिशिएंट सॉफ्टवेयर बनाने की जरूरत
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने कंप्यूटिंग की दुनिया का खर्च बदल दिया है। अब इसका असर टेक कंपनियों के लिए जरूरी मेमोरी पर भी दिखने लगा है। बढ़ती रैम कीमतों ने सॉफ्टवेयर और एआई प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। जोहो के फाउंडर और सीईओ श्रीधर वेम्बू ने भी इस बढ़ते खर्च को लेकर चेतावनी दी है।
मेमोरी कीमतों में आया बड़ा उछाल
श्रीधर वेम्बू ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पिछले 12 महीनों में मेमोरी की कीमतें 500 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं और अब ये अपने सबसे निचले स्तर से करीब 10 गुना ज्यादा हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मेमोरी कीमतों के साथ एआई टोकन कीमतों में बढ़ोतरी ने कंपनियों के लिए बिजनेस चलाना मुश्किल बना दिया है।
वेम्बू ने बताया कि जोहो ने अभी तक अपनी सर्विस की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, लेकिन बढ़ते खर्च को लंबे समय तक संभालना आसान नहीं होगा। इसी वजह से टेक कंपनियों के लिए मेमोरी की बढ़ती कीमत एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
रैम कीमतों में कितनी हुई बढ़ोतरी
टॉम्स हार्डवेयर के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2025 से अगस्त 2026 के बीच डीडीआर5 मेमोरी की कीमतों में काफी तेजी आई है। 2x16GB 4800 MT/s किट की औसत कीमत 90 डॉलर से बढ़कर 425 डॉलर हो गई, यानी इसमें 372 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
वहीं 2x32GB 5600 MT/s किट की कीमत 191 डॉलर से बढ़कर 1118 डॉलर पहुंच गई, जिसमें 485 प्रतिशत का उछाल आया। 6000 MT/s 2x32GB किट की कीमत 222 डॉलर से बढ़कर 1272 डॉलर हो गई, यानी इसमें 473 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
DDR4 मेमोरी भी हुई महंगी
सिर्फ डीडीआर5 ही नहीं बल्कि डीडीआर4 मेमोरी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। 2x8GB 3200 MT/s किट की कीमत 63 डॉलर से बढ़कर 163 डॉलर हो गई।
इसके अलावा 2x16GB 3200 MT/s किट 105 डॉलर से बढ़कर 281 डॉलर और 2x32GB 3600 MT/s किट 300 डॉलर से बढ़कर 789 डॉलर हो गई। इन किट्स की कीमतों में करीब 120 प्रतिशत से लेकर लगभग 180 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
एआई की वजह से बढ़ी मेमोरी की मांग
एआई कंपनियों को बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर और मेमोरी की जरूरत होती है। जैसे-जैसे एआई सर्विस और इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे मेमोरी की मांग भी बढ़ रही है।
वेम्बू का कहना है कि पुराने समय में प्रोग्रामिंग लैंग्वेज इस सोच के साथ बनाई गई थीं कि मेमोरी लगभग मुफ्त जैसी उपलब्ध रहेगी। लेकिन अब महंगी होती मेमोरी के दौर में यह सोच बदलने की जरूरत है।
सॉफ्टवेयर को ज्यादा मेमोरी एफिशिएंट बनाने की जरूरत
श्रीधर वेम्बू ने कहा कि अब इंडस्ट्री को ज्यादा मेमोरी एफिशिएंट प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और बेहतर कंपाइलर की जरूरत है। उनका मानना है कि कोड की सेफ्टी और डेवलपर की सुविधा जरूरी है, लेकिन इसकी वजह से ज्यादा मेमोरी खर्च होना सही नहीं है।
उनके मुताबिक एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डेवलपर्स को सिर्फ ज्यादा हार्डवेयर पर निर्भर रहने के बजाय सॉफ्टवेयर को ज्यादा एफिशिएंट बनाने पर ध्यान देना होगा।