मार्क ज़ुकेरबर्ग को खुद माफी मांगनी चाहिए...पीएम मोदी का वीडियो हटने पर संसद की IT कमेटी ने मेटा को घेरा
Meta और Facebook पर उठे सवालों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो हटाने का मामला अब संसद की कमेटी तक पहुंच गया है। निशिकांत दुबे ने Zuckerberg से माफी की मांग की है, वहीं जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पूरी कहानी में जानिए क्या हुआ।

In Short
- पीएम मोदी का वीडियो Facebook से करीब 5 घंटे तक हटने के मामले में IT कमेटी ने Meta से जवाब मांगा और 10 दिन में लिखित सफाई देने को कहा।
- निशिकांत दुबे ने Mark Zuckerberg से व्यक्तिगत माफी की मांग की और कहा कि जरूरत पड़ने पर Meta की Safe Harbour Protection पर भी विचार किया जा सकता है।
- Meta ने इसे Technical Glitch बताया, लेकिन सांसदों ने Algorithmic Bias, कंटेंट हटाने की प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने पर सवाल उठाए।
पीएम नरेंद्र मोदी का वीडियो Facebook से कुछ समय के लिए हटने के मामले में Meta की परेशानी बढ़ गई है। संसद की IT कमेटी ने इस मामले पर Meta के अधिकारियों से जवाब मांगा है। कमेटी के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि मार्क ज़ुकेरबर्ग को खुद इस घटना के लिए माफी मांगनी चाहिए। अब इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।
पीएम मोदी का वीडियो 5 घंटे तक Facebook से रहा गायब
निशिकांत दुबे ने सोमवार को हुई बैठक के बाद कहा कि Meta ने खुद माना है कि पीएम मोदी का वीडियो करीब 5 घंटे तक Facebook से हट गया था। यह वीडियो रात 12:30 बजे से सुबह 5 बजे तक प्लेटफॉर्म पर दिखाई नहीं दे रहा था।
उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि ज़ुकेरबर्ग की तरफ से व्यक्तिगत तौर पर माफी आनी चाहिए। दुबे ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो Meta को मिलने वाली सेफ हार्बर प्रोटेक्शन वापस लेने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
सेफ हार्बर प्रोटेक्शन के तहत सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की ओर से डाले गए कंटेंट के लिए सीधे कानूनी तौर पर जिम्मेदार नहीं मानी जाती हैं।
Meta ने बताया टेक्निकल ग्लिच, कमेटी ने मांगी लिखित सफाई
यह मामला उस समय सामने आया था जब पीएम मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए Facebook पर एक पोस्ट शेयर किया था। इसमें पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का जिक्र था। कुछ समय बाद यह वीडियो Facebook से हट गया था।
Meta ने इस घटना को टेक्निकल ग्लिच बताया था और कहा था कि कंटेंट गलती से हट गया था। कंपनी ने बाद में वीडियो को दोबारा प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया था। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने Meta के इस जवाब को पर्याप्त नहीं माना।
संसदीय कमेटी ने अब Meta से इस मामले पर 10 दिन के अंदर लिखित जवाब देने को कहा है।
सोशल मीडिया पर अकाउंटेबिलिटी को लेकर उठे सवाल
बैठक में सांसदों ने Meta के अधिकारियों से एल्गोरिदमिक बायस को लेकर भी सवाल पूछे। सदस्यों ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर कई आपत्तिजनक कंटेंट मौजूद रहते हैं, लेकिन सही कंटेंट को हटाने की शिकायतें सामने आती हैं।
सांसदों ने पूछा कि जब Facebook पर कई गलत कंटेंट मौजूद रहते हैं तो पीएम मोदी का वीडियो किसने हटाया और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
वहीं, विपक्षी सांसदों ने बैठक में कहा कि सोशल मीडिया पर असहमति की जगह बनी रहनी चाहिए और सरकार विरोधी कंटेंट को देश विरोधी नहीं माना जाना चाहिए।
Meta अधिकारियों ने जताया खेद, लेकिन कार्रवाई की मांग जारी
सूत्रों के मुताबिक Meta के अधिकारियों ने कमेटी के सामने इस घटना पर खेद जताया और माफी देने के लिए तैयार होने की बात कही। हालांकि, बीजेपी सांसदों ने कहा कि मामला सिर्फ माफी तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
बैठक में डीपफेक रोकने के लिए Meta के एल्गोरिदम की क्षमता पर भी सवाल उठाए गए। कमेटी ने सोशल और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के रेगुलेशन यानी नियंत्रण से जुड़े मुद्दे पर यह बैठक बुलाई थी।
इस बैठक में गृह सचिव गोविंद मोहन, MeitY सचिव एस कृष्णन और स्नैपचैट, गूगल, एक्स, Meta और यूट्यूब जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।