ई-बुक पढ़कर कमाई का झांसा, केरल में 1.25 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप
केरल में ई-बुक पढ़कर पैसे कमाने का ऑफर कई लोगों के लिए महंगा साबित हुआ। टास्क पूरा करने पर कमाई और नए सदस्य जोड़ने पर कमीशन का वादा किया गया था। अब 106 लोगों ने करीब 1.25 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप लगाते हुए साइबर पुलिस से शिकायत की है।

In Short
- केरल में 106 लोगों ने करीब 1.25 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी का लगाया आरोप
- NTL App पर ई-बुक पढ़ने के बदले हर किताब पर 25 रुपये देने का था वादा
- पुलिस ने FIR दर्ज की, मामले के तार ब्रिटेन से जुड़े होने का शक
केरल में ई-बुक पढ़कर आसान कमाई का वादा करने वाली एक ऑनलाइन स्कीम पर बड़ा फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगा है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 100 से ज्यादा लोगों ने दावा किया है कि उन्हें छोटे-छोटे शुरुआती भुगतान दिखाकर स्कीम से जोड़ा गया और बाद में उनकी कमाई तक पहुंच बंद कर दी गई। कुल ठगी करीब 1.25 करोड़ रुपये की बताई जा रही है।
हाल ही में कम से कम 106 लोगों ने तिरुवनंतपुरम रूरल साइबर पुलिस स्टेशन में सामूहिक शिकायत दी है।
कई जिलों से सामने आए मामले
साइबर सेल अधिकारियों के मुताबिक इस तरह के टास्क बेस्ड फ्रॉड के मामले केरल के अलग-अलग हिस्सों में सामने आए हैं। खासतौर पर तिरुवनंतपुरम और कोल्लम में ज्यादा शिकायतें मिली हैं।
शुरुआती शिकायत विथुरा पुलिस के पास पहुंची थी। पुलिस को शक है कि इस मामले के तार ब्रिटेन से जुड़े किसी बड़े नेटवर्क तक जा सकते हैं।
कैसे काम करती थी पूरी स्कीम?
पुलिस के मुताबिक इस फर्जीवाड़े का तरीका दूसरे टास्क बेस्ड स्कैम जैसा ही था, जिनमें लोगों से होटल रेटिंग या रिव्यू जैसे काम कराए जाते हैं। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां NTL App नाम के एक ऐप का इस्तेमाल किया गया।
सबसे पहले व्हाट्सऐप के जरिए ऐप डाउनलोड करने का लिंक किसी ऐसे व्यक्ति को भेजा जाता था, जिसकी इलाके में अच्छी पहचान हो और जो ज्यादा लोगों को जोड़ सके।
ऐप में अलग-अलग मेंबरशिप लेवल थे। इनमें एंट्री फीस 1,800 रुपये से शुरू होकर कई लाख रुपये तक जाती थी।
ई-बुक पढ़ने पर 25 रुपये का वादा
स्कीम में शामिल होने के बाद सदस्यों को हर दिन ई-बुक पढ़ने का टास्क दिया जाता था। एक किताब पूरी करने पर 25 रुपये देने का वादा किया जाता था। इसके अलावा नए सदस्य जोड़ने वाले व्यक्ति को भी कमीशन मिलता था।
जितने ज्यादा लोग जोड़े जाते, उतनी ज्यादा कमीशन कमाई दिखाई जाती थी।
ऐप में दिखती थी कमाई, लेकिन निकासी बंद
पुलिस के मुताबिक ऐप में दिखाई जाने वाली कमाई असल में वर्चुअल थी। सदस्यों से कहा गया था कि वे केवल बुधवार को पैसे निकाल सकते हैं।
कुछ पीड़ितों ने बताया कि शुरुआत में उन्हें भुगतान मिला भी, लेकिन बाद में ट्रांसफर बंद हो गए। इसके बाद जब ऐप ही खुलना बंद हो गया तो लोगों को ठगी का शक हुआ और वे पुलिस के पास पहुंचे।
एक पीड़ित के मुताबिक कुछ लोगों ने इस स्कीम में लाखों रुपये लगाए थे। उनका आरोप है कि ठगों ने एक अमेरिकी कंपनी की जानकारी का इस्तेमाल करके भरोसा बनाया।
पुलिस को बड़े नेटवर्क का शक
शिकायतकर्ताओं ने थोलिकोड के रहने वाले सनौफर को मुख्य संदिग्ध बताया है। आरोप है कि उसने लोगों को स्कीम में शामिल होने के लिए मनाया।
हालांकि विथुरा SHO Vaisakh D. के मुताबिक सनौफर बड़े नेटवर्क की सिर्फ एक कड़ी हो सकता है। पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जानकारी साइबर सेल को सौंप दी है।
साइबर अधिकारियों की फिर चेतावनी
साइबर क्राइम अधिकारियों का कहना है कि टास्क बेस्ड ऑनलाइन फ्रॉड को लेकर पहले भी कई बार चेतावनी दी जा चुकी है। इसके बावजूद ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
सबसे ज्यादा शिकायतें तिरुवनंतपुरम और कोल्लम से आई हैं, जबकि मलप्पुरम और कोझिकोड समेत कुछ अन्य जिलों से भी इसी तरह के मामले रिपोर्ट हुए हैं।