बंद होने वाली है डिजिटल दुनिया की रफ्तार? समुद्र के नीचे बिछी केबल पर नया संकट, अब देना होगा 'टोल टैक्स'
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अब इंटरनेट को लेकर नई चिंता सामने आ गई है। समुद्र के नीचे बिछी उन केबल्स पर खतरा मंडरा रहा है, जिनसे दुनिया का बड़ा डिजिटल नेटवर्क चलता है। अगर हालात बिगड़े, तो इसका असर भारत समेत कई देशों की इंटरनेट स्पीड और ऑनलाइन सेवाओं पर पड़ सकता है।

दुनिया भर में ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अब इंटरनेट की एक नई चिंता सामने आ रही है। हाल ही में ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी ने कहा कि हम इंटरनेट केबल पर टोल वसूलेंगे। यानी समुद्र के नीचे बिछी फाइबर केबल का इस्तेमाल करने के लिए कंपनियों को टैक्स देना पड़ेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे बिछा है इंटरनेट केबल नेटवर्क
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ तेल का मार्ग नहीं है, बल्कि इसके नीचे एक बड़ा इंटरनेट केबल नेटवर्क बिछा हुआ है। यह नेटवर्क एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ता है। अगर यहां कोई दिक्कत आती है, तो इसका असर कई देशों के इंटरनेट कनेक्शन और डिजिटल डेटा ट्रैफिक पर पड़ेगा।
भारत के लिए यह रास्ता काफी महत्तवपूर्ण है क्योंकि ओपन सोर्स इंटेलिजेंस और टेली जियोग्राफी के डेटा के अनुसार, भारत समेत कई एशियाई देशों की इंटरनेट ट्रैफिक इसी मार्ग से गुजरती है। इसका मतलब है कि अगर ईरान टोल लागू करता है या केबल्स पर कोई रोक लगाता है, तो भारत में इंटरनेट धीमा या ठप हो सकता है।
इंटरनेट ठप होने का मतलब है भारत में बड़े पैमाने पर काम रुकना। कंपनियों और सरकारी नेटवर्क के लिए यह डेटा ट्रांसफर और डिजिटल सेवाओं पर सीधा असर डाल सकता है। इंटरनेट भारत की डिजिटल रफ्तार को एक पल में रोक सकता है।
डिजिटल दुनिया पर असर
दुनिया भर में अधिकांश इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी फाइबर केबल्स से होता है। जमीन पर दिखने वाला इंटरनेट असल में इसी केबल नेटवर्क पर निर्भर है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कोई रुकावट पैदा होगी तो ग्लोबल इंटरनेट, क्लाउड सेवाएं, ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल व्यापार सेवाएं सब पर असर पड़ेगा।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस स्थिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए। केवल सैन्य तनाव ही नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। कंपनियों को इसके लिए बैकअप और रूट डायवर्जन जैसे प्लान तैयार रखने चाहिए।