भारत बन सकता है 'डिजिटल गुलाम'! AI को लेकर Sarvam के को-फाउंडर ने दी चेतावनी, बताया कैसे टलेगा खतरा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन विदेशी तकनीक पर बढ़ती निर्भरता को लेकर एक अहम चेतावनी सामने आई है। Sarvam के को-फाउंडर विवेक राघवन का कहना है कि अगर भारत ने अपने AI सिस्टम विकसित नहीं किए, तो देश 'डिजिटल कॉलोनी' बन सकता है। आखिर उन्होंने ऐसा क्यों कहा और युवाओं को क्या सलाह दी? जानिए।

In Short
- विदेशी AI पर निर्भरता भारत को 'डिजिटल कॉलोनी' बना सकती है: राघवन।
- भारत को अपने AI मॉडल और भारतीय भाषाओं पर ध्यान देना होगा।
- AI से नौकरियां बदलेंगी, युवाओं को नई स्किल सीखने की सलाह।
अगर भारत ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी विकसित नहीं की और विदेशी तकनीक पर निर्भर रहा, तो देश के सामने 'डिजिटल कॉलोनी' बनने का खतरा पैदा हो सकता है। यह चेतावनी Sarvam के को-फाउंडर डॉ. विवेक राघवन ने दी है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने AI मॉडल, डेटा और कंप्यूटिंग सिस्टम पर नियंत्रण रखना होगा।
ग्वालियर में छात्रों को संबोधित करते हुए Sarvam के को-फाउंडर डॉ. विवेक राघवन ने भारत के AI भविष्य को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि देश को सिर्फ विदेशी AI टूल्स इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी तकनीक भी तैयार करनी होगी।
राघवन ने युवाओं से कहा, "आप इस देश का भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान हैं।" उनका मानना है कि भारत की तकनीकी दिशा तय करने में युवाओं की अहम भूमिका होगी।
आधार की तरह भारत को बनाना होगा अपना AI
विवेक राघवन ने आधार प्रोजेक्ट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वह एक दशक से ज्यादा समय तक इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे और पहली आधार पहचान जारी होने से लेकर एक अरबवीं पहचान तक की यात्रा देखी।
उनके मुताबिक, जिस तरह भारत ने करोड़ों लोगों के लिए आधार जैसी व्यवस्था तैयार की, उसी तरह देश को अपने AI मॉडल और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसा AI बनाना होना चाहिए, जिसे भारतीय लोग भारत के लिए तैयार करें और बाद में पूरी दुनिया इस्तेमाल कर सके।
भारतीय भाषाओं में AI क्यों जरूरी?
राघवन ने कहा कि AI का फायदा सिर्फ अंग्रेजी जानने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर AI आपकी भाषा में काम नहीं करता, तो वह आपके लिए सही मायने में उपयोगी नहीं है।
उन्होंने बताया कि सस्ते AI टूल्स से शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, कानूनी सलाह और सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।
AI से नौकरियों पर क्या पड़ेगा असर?
राघवन ने माना कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से कुछ नौकरियां खत्म हो सकती हैं, जबकि कई नौकरियों का स्वरूप बदल जाएगा। उन्होंने युवाओं को लगातार नई स्किल सीखने और खुद को बदलती टेक्नोलॉजी के हिसाब से तैयार करने की सलाह दी।
साथ ही उन्होंने AI से जुड़े फ्रॉड, गलत जानकारी और साइबर सुरक्षा के खतरों से बचाव पर भी जोर दिया।
युवाओं को दी खास सलाह
राघवन ने छात्रों से AI के साथ प्रयोग करने, सवाल पूछने और नई चीजें सीखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सिर्फ जवाब याद रखने के बजाय सही सवाल पूछने की क्षमता ज्यादा अहम होगी।
भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लक्ष्य का जिक्र करते हुए उन्होंने युवाओं से कहा कि बदलाव लाने के लिए उम्र, पद या किसी की अनुमति का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।