AI इस्तेमाल में आगे भारत, लेकिन अपने मॉडल बनाने में दुनिया से काफी पीछे
भारत AI इस्तेमाल करने वाले बड़े बाजारों में शामिल है, लेकिन अपने ताकतवर AI मॉडल बनाने में अभी पीछे है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच OpenRouter पर भारत से भेजे गए AI काम का 94 प्रतिशत अमेरिका या चीन में बने मॉडल्स पर गया। भारत का सबसे मजबूत मॉडल Sarvam 105B है।

In Short
- भारत का 94 प्रतिशत AI काम अमेरिका या चीन में बने मॉडल्स पर गया
- Artificial Analysis की रैंकिंग में 11 देशों में भारत नौवें स्थान पर है
- Artificial Analysis की रैंकिंग में 11 देशों में भारत नौवें स्थान पर है
भारत में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अपने बड़े AI मॉडल बनाने के मामले में देश अभी काफी पीछे है। Bloomberg Businessweek के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच भारतीय डेवलपर्स ने OpenRouter के जरिए जितना AI काम भेजा, उसका 94 प्रतिशत अमेरिका या चीन में बने मॉडल्स पर गया।
11 देशों में भारत नौवें नंबर पर
Artificial Analysis 610 AI मॉडल्स को ट्रैक करती है और फिलहाल बिक रहे 257 मॉडल्स में सिर्फ दो भारत में बने हैं। दोनों मॉडल Bengaluru की कंपनी Sarvam के हैं।
20 अगस्त 2026 के डेटा के मुताबिक, भारत का सबसे अच्छा मॉडल Sarvam 105B है, जिसे 100 में से 11.9 स्कोर मिला। Anthropic के Claude Opus 5 का स्कोर 63.1 और चीन के Kimi K3 का 59.7 है। सबसे मजबूत मॉडल के आधार पर 11 देशों की सूची में भारत नौवें नंबर पर है।
हालांकि Sarvam के स्कोर पूरे टेस्ट के बजाय अनुमान पर आधारित हैं। फिर भी रैंकिंग नहीं बदलती।
दुनिया से करीब दो साल पीछे
OpenAI का o1-preview सितंबर 2024 में 11.9 से ज्यादा स्कोर कर चुका था। यानी भारत का सबसे अच्छा मॉडल लगभग उस स्तर पर है, जहां दुनिया के टॉप मॉडल दो साल पहले थे।
257 उपलब्ध मॉडल्स में 171 का स्कोर Sarvam 105B से ज्यादा है। जनवरी से अमेरिका ने 113 और चीन ने 91 मॉडल लॉन्च किए, जबकि भारत ने सिर्फ दो मॉडल जोड़े।
भारत की ताकत है कम कीमत
Sarvam 105B की बड़ी ताकत इसकी कीमत है। Claude Opus 5 पर 10 डॉलर वाला काम Sarvam पर करीब सात सेंट में हो सकता है। इसके मॉडल डाउनलोड करके मुफ्त में भी चलाए जा सकते हैं।
भारत AI का बड़ा यूजर
सात महीनों में भारत ने OpenRouter पर करीब 9 ट्रिलियन टोकन प्रोसेस किए और दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बाजार बना। इनमें 51 प्रतिशत काम अमेरिकी और 43 प्रतिशत चीनी मॉडल्स पर गया।
भारतीय भाषाओं का सवाल
Artificial Analysis के नौ टेस्ट कोडिंग, रीजनिंग और सामान्य ज्ञान जैसी क्षमताएं मापते हैं, लेकिन भारतीय भाषाओं को नहीं। Sarvam का फोकस भोजपुरी, मराठी, तमिल जैसी भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल पर है, जो इस ग्लोबल स्कोर में पूरी तरह नहीं दिखता।
Nandan Nilekani की अलग राय
Infosys के सह-संस्थापक Nandan Nilekani का मानना है कि भारत को सिर्फ बड़े frontier मॉडल बनाने की दौड़ में नहीं फंसना चाहिए। उनके मुताबिक, भारत AI की “use-case capital” बन सकता है।
Stanford AI Index के अनुसार, 2025 में दुनिया में 58 प्रतिशत कर्मचारी नियमित रूप से AI इस्तेमाल कर रहे थे, जबकि भारत समेत कई देशों में यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से ज्यादा था।
सरकार IndiaAI Mission के जरिए GPU उपलब्ध करा रही है। लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ है भारत AI का बड़ा इस्तेमालकर्ता है, पर अपने बड़े AI मॉडल बनाने की रफ्तार अभी धीमी है।