BTIndia@100: लैब से बाजार तक कैसे पहुंचे Deep Tech? इंडस्ट्री के दिग्गजों ने बताईं बड़ी चुनौतियां

भारत के डीप टेक स्टार्टअप अब सिर्फ नई टेक्नोलॉजी बनाने तक सीमित नहीं हैं। उनके सामने अगली बड़ी चुनौती टेस्टिंग सर्टिफिकेशन मैन्युफैक्चरिंग और बाजार तक पहुंचने की है। इंडस्ट्री के फाउंडर्स का कहना है कि इसके लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत सप्लाई चेन सही बिजनेस मॉडल और फंडिंग जरूरी होगी।

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By Gaurav Kumar:

BusinessTodayIndia@100Summit: भारत का डीप टेक सेक्टर अब उस दौर से आगे बढ़ रहा है जहां सिर्फ यह साबित करना जरूरी था कि भारतीय इंजीनियर मुश्किल टेक्नोलॉजी बना सकते हैं। अब बड़ी चुनौती यह है कि ये स्टार्टअप अपनी तकनीक को लैब से निकालकर बाजार तक कैसे पहुंचाएं और लंबे समय तक कारोबार कैसे टिकाएं।

BusinessTodayIndia@100Summit में हुई चर्चा के दौरान स्पेस प्रोपल्शन और ड्रोन सेक्टर से जुड़े स्टार्टअप फाउंडर्स ने टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सरकारी खरीद सप्लाई चेन और लंबे समय तक मिलने वाली फंडिंग की जरूरत पर जोर दिया।

टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन में लग रहा ज्यादा समय

डी प्रोपल्स के फाउंडर और सीईओ सौरव झा ने कहा कि डीप टेक कंपनियों के लिए सबसे जरूरी बात टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की रफ्तार बढ़ाना है।

उनके मुताबिक सरकार की मदद सिर्फ ग्रांट तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शुरुआती दौर में सरकार को खरीदार की भूमिका भी निभानी चाहिए ताकि कंपनियों को अपने प्रोडक्ट बेहतर करने और आगे बढ़ाने का मौका मिले।

उन्होंने कहा कि कई बार कंपनियों को नेशनल टेस्टिंग फैसिलिटी का इंतजार करना पड़ता है जिससे डेवलपमेंट धीमा हो जाता है।

टेक्नोलॉजी के साथ बिजनेस मॉडल भी जरूरी

अग्निकुल कॉसमॉस के को फाउंडर और सीईओ श्रीनाथ रविचंद्रन ने कहा कि एक स्तर के बाद सिर्फ इंजीनियरिंग पर ध्यान देना काफी नहीं है।

उनके मुताबिक स्टार्टअप्स को यह भी समझना होगा कि उनकी टेक्नोलॉजी से कारोबार कैसे बनेगा सप्लाई चेन कैसी होगी और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को मैन्युफैक्चरिंग में कैसे बदला जाएगा।

उन्होंने कहा कि भारत में काम करने वाली कंपनियां स्पेसएक्स या दूसरी विदेशी कंपनियों का मॉडल सीधे कॉपी नहीं कर सकतीं क्योंकि यहां की परिस्थितियां अलग हैं।

बाहरी फंडिंग पर पूरी निर्भरता सही नहीं

गरुड़ एयरोस्पेस के फाउंडर और सीईओ अग्निश्वर जयप्रकाश ने फंडिंग को लेकर अलग नजरिया रखा। उन्होंने कहा कि डीप टेक कंपनियों को पूंजी जरूर चाहिए लेकिन फाउंडर्स को हर जरूरत के लिए बाहरी फंडिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने गरुड़ के कस्टमर फंडेड मॉडल और भारत में विकसित प्रोडक्ट्स को विदेशी बाजारों में ले जाने की कोशिश का उदाहरण दिया।

अब असली परीक्षा स्केल की

भारत के पास रॉकेट प्रोपल्शन सिस्टम और एडवांस ड्रोन जैसी टेक्नोलॉजी बनाने की क्षमता बढ़ी है। लेकिन अगली चुनौती इन तकनीकों को टेस्ट सर्टिफाई मैन्युफैक्चर बेचने और बड़े स्तर पर ले जाने की है।

यही तय करेगा कि भारत के डीप टेक स्टार्टअप सिर्फ अच्छी टेक्नोलॉजी बनाने तक सीमित रहते हैं या मजबूत कमर्शियल कंपनियों के रूप में आगे बढ़ते हैं।
 

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