भारत बन सकता है AI MedTech का ग्लोबल लीडर, लेकिन पहले दूर करनी होंगी ये 3 बड़ी रुकावटें

भारत ने AI आधारित हेल्थकेयर के लिए मजबूत आधार तैयार किया है, लेकिन AI-इनेबल्ड मेडिकल टेक्नोलॉजी अभी पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर बड़े स्तर पर क्लिनिकल इस्तेमाल तक नहीं पहुंच पा रही हैं। रिपोर्ट ने डेटा, रेगुलेशन और पेमेंट सिस्टम को इसकी तीन बड़ी चुनौतियां बताया है।

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In Short

  • AI-इनेबल्ड मेडटेक के बड़े स्तर पर इस्तेमाल में अभी कई रुकावटें
  • बिखरा हेल्थ डेटा, बदलता रेगुलेशन और कमजोर रीइंबर्समेंट सिस्टम बड़ी चुनौती
  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और IndiaAI मिशन से भारत ने तैयार किया आधार

By Gaurav Kumar:

AI in Healthcare: भारत में हेल्थकेयर सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल की जमीन तैयार हो चुकी है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर अस्पतालों और इलाज की रोजमर्रा की प्रक्रिया का हिस्सा बनाने में अभी कई मुश्किलें हैं। एक नए नॉलेज पेपर के मुताबिक, AI से जुड़े कई मेडिकल टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट पायलट स्तर पर अच्छे नतीजे दिखा चुके हैं, लेकिन बहुत कम समाधान रेगुलर क्लिनिकल इस्तेमाल तक पहुंच पाए हैं।

अब AI की क्षमता साबित करना बड़ी चुनौती नहीं

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को नई दिल्ली में 'इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026' के नौवें संस्करण में "AI in MedTech: Revolutionising Healthcare Through Artificial Intelligence" नाम का पेपर जारी किया। इसे प्रैक्सिस ग्लोबल अलायंस और FICCI ने मिलकर तैयार किया है।

पेपर के मुताबिक, अब सवाल यह नहीं है कि AI काम कर सकता है या नहीं। असली चुनौती ऐसा सिस्टम तैयार करने की है, जिससे इसे बड़े पैमाने पर हेल्थकेयर में इस्तेमाल किया जा सके।

MedTech में AI के लिए बड़ा मौका

रिपोर्ट में मेडटेक को भारत में AI अपनाने के लिए सबसे तत्काल और बड़े स्तर पर लागू होने वाले मौकों में से एक बताया गया है। मेडिकल डिवाइस इलाज के दौरान क्लिनिकल डेटा तैयार करते हैं और AI की मदद से इस डेटा का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

इससे बीमारी की पहचान, डॉक्टरों के फैसले लेने और काम करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। भारत में मेडिकल डिवाइस के साथ-साथ स्पेशलिस्ट एक्सपर्ट्स की कमी भी एक चुनौती है। ऐसे में मेडिकल डिवाइस में सीधे AI जोड़कर मरीजों के करीब बेहतर स्क्रीनिंग और क्लिनिकल फैसलों में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट में AI-इनेबल्ड डायग्नोस्टिक्स को बड़े स्तर पर इस्तेमाल होने वाला पहला अहम एप्लीकेशन बताया गया है।

रास्ते में हैं तीन बड़ी रुकावटें

रिपोर्ट ने AI-इनेबल्ड मेडटेक के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां बताई हैं। इनमें बिखरा हुआ हेल्थ डेटा और सीमित सबूत, बदलता रेगुलेशन और पर्याप्त रीइंबर्समेंट व खरीद सिस्टम का अभाव शामिल है।

हेल्थ डेटा का अलग-अलग जगह बिखरा होना और रियल-वर्ल्ड सबूतों की कमी से क्लिनिकल वैलिडेशन, रेगुलेटरी मंजूरी और बाद की निगरानी मुश्किल हो सकती है। वहीं, AI सिस्टम में लगातार होने वाले अपडेट के लिए ऐसे नियमों की जरूरत है जो पूरे लाइफसाइकल को ध्यान में रखें।

भारत के पास पहले से मजबूत आधार

पेपर के अनुसार, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, IndiaAI मिशन, हेल्थ AI के लिए ओपन डेटा प्लेटफॉर्म और नेशनल मेडिकल डिवाइसेस पॉलिसी 2023 जैसी पहलें भारत के लिए आधार तैयार कर चुकी हैं।

रिपोर्ट का कहना है कि इन पहलों को बेहतर सबूत, स्पष्ट रेगुलेशन, रीइंबर्समेंट और खरीद सिस्टम से जोड़ना जरूरी है। अगर ये सभी चीजें साथ विकसित होती हैं तो AI-इनेबल्ड मेडटेक हेल्थकेयर डिलीवरी की बुनियादी परत बन सकता है और भारत जिम्मेदार AI मेडटेक के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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