भारत में AI से नौकरियों पर कितना खतरा? गोल्डमैन सैक्स ने बताया क्यों कम रहेगा असर, जानिए कहां बढ़ेगी चिंता

एआई को लेकर दुनियाभर में नौकरी जाने की चिंता बढ़ रही है, लेकिन गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि भारत पर इसका असर सीमित रह सकता है। बड़ी वर्कफोर्स और फिजिकल कामों की वजह से खतरा कम है, हालांकि सर्विस सेक्टर की कुछ नौकरियों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

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In Short

  • भारत की बड़ी वर्कफोर्स से एआई जॉब रिस्क रहेगा सीमित।
  • सर्विस सेक्टर और कॉल सेंटर नौकरियों पर पड़ सकता है असर।
  • सही तरीके से एआई अपनाने पर बढ़ेगी प्रोडक्टिविटी।

By BT बाज़ार डेस्क:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल से दुनिया भर में नौकरियों को लेकर चिंता बढ़ रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्डमैन सैक्स के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट संत्नु सेनगुप्ता का कहना है कि भारत में एआई की वजह से बड़े स्तर पर नौकरियां जाने का खतरा कई दूसरे देशों की तुलना में कम रहेगा। इसकी वजह भारत की बड़ी वर्कफोर्स है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग ऐसे कामों से जुड़े हैं जहां अभी एआई का सीधा असर नहीं दिख रहा है। हालांकि, सर्विस सेक्टर के कुछ हिस्सों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

भारत की बड़ी वर्कफोर्स बनेगी सुरक्षा कवच

ब्लूमबर्ग से बातचीत में संत्नु सेनगुप्ता ने कहा कि भारत की लेबर फोर्स काफी बड़ी है और इसमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो मैकेनिकल या फिजिकल तरह के काम करते हैं। इसलिए एआई का असर भारत के रोजगार बाजार पर सीमित रहने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि भारत में कंस्ट्रक्शन और रिटेल ट्रेड मिलकर करीब 40% वर्कफोर्स को रोजगार देते हैं। इन सेक्टरों पर फिलहाल एआई का ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। हालांकि, सर्विस सेक्टर में एआई के इस्तेमाल से बदलाव तेजी से देखने को मिल सकते हैं।

सर्विस सेक्टर की नौकरियों पर पड़ सकता है असर

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, एआई के इस्तेमाल से फाइनेंस, हेल्थ केयर, एजुकेशन और बिजनेस सर्विस जैसे सेक्टरों को फायदा मिल सकता है। वहीं पोस्टल और टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर के साथ आईटी सर्विस में कुछ नौकरियों पर दबाव बढ़ सकता है।

खासकर कॉल सेंटर जैसी नौकरियों में एआई की वजह से इंसानों की जगह तकनीक आने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि अगर एआई को सही तरीके और धीरे-धीरे लागू किया जाता है तो इससे होने वाले फायदे संभावित नुकसान से ज्यादा हो सकते हैं।

एआई बढ़ाएगा भारत की प्रोडक्टिविटी

गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक, एआई को सही तरीके से अपनाने पर अगले 10 साल में भारत की कुल प्रोडक्टिविटी में 0.4 प्रतिशत पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है।

संत्नु सेनगुप्ता ने कहा कि अगर एआई को धीरे-धीरे लागू किया जाता है तो अगले पांच साल में इससे मिलने वाले प्रोडक्टिविटी फायदे संभावित नौकरी नुकसान से ज्यादा रहेंगे। यानी एआई भारत के लिए सिर्फ चुनौती नहीं बल्कि आर्थिक विकास का एक जरिया भी बन सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया कि गोल्डमैन सैक्स ने भारत की आर्थिक मजबूती को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। कच्चे तेल पर निर्भरता के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई पिछले महीने थोड़ी बढ़ी, लेकिन यह भारतीय रिजर्व बैंक की 2% से 6% की सीमा के अंदर रही। इसके अलावा वाहन बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, क्रेडिट ग्रोथ दो साल के उच्च स्तर पर रही और जीएसटी कलेक्शन में डबल डिजिट बढ़ोतरी दर्ज की गई।

आरबीआई दिसंबर से बढ़ा सकता है ब्याज दर

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक दिसंबर से ब्याज दर बढ़ाने की शुरुआत कर सकता है। हालांकि, यह फैसला कोर इंफ्लेशन की स्थिति पर निर्भर करेगा।

अगर महंगाई का दबाव धीरे-धीरे बढ़ता है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी दिसंबर और फरवरी की जगह फरवरी और अप्रैल में हो सकती है। सेनगुप्ता के अनुसार, यह बढ़ोतरी का दौर बहुत सीमित रहेगा।

विदेशी मुद्रा जमा और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग से आरबीआई को रुपये की स्थिति संभालने के लिए समय मिलेगा। ऐसे में भारत के लिए एआई और आर्थिक विकास दोनों मोर्चों पर संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।

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