हिंदी से क्षेत्रीय लहजों तक AI की नई उड़ान, 26 भारतीय भाषाओं को समझेगा इंडिक ट्रांसक्राइब
भारत में अलग-अलग भाषाओं और लहजों को समझने वाली AI टेक्नोलॉजी की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। IIT मद्रास के प्रोफेसर मितेश खापरा ने Indic-Transcribe मॉडल पेश किया है, जो 26 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी को समझने में सक्षम है। यह मॉडल भारत की आवाज आधारित टेक्नोलॉजी को नया विस्तार दे सकता है।

In Short
- IIT मद्रास के प्रोफेसर मितेश खापरा ने Indic-Transcribe AI मॉडल पेश किया है।
- यह मॉडल 26 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी को सपोर्ट करता है और इसमें 1.2 बिलियन पैरामीटर्स हैं।
- Indic-Transcribe को 5 सितंबर 2026 से Bodhan.AI के जरिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
भारत में लोग अलग-अलग भाषाओं, बोलियों और क्षेत्रीय लहजों में बात करते हैं। ऐसे में AI के लिए भारतीय भाषाओं को सही तरीके से समझना हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर मितेश खापरा ने इंडिक ट्रांसक्राइब नाम का एक नया एआई मॉडल पेश किया है, जो भारतीय भाषाओं और बोलने के तरीके को बेहतर तरीके से समझने के लिए तैयार किया गया है। यह मॉडल 26 भारतीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी को भी सपोर्ट करता है और भारत की अलग-अलग आवाजों को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत के लिए तैयार किया गया वॉइस फर्स्ट एआई मॉडल
आईआईटी मद्रास के एसोसिएट प्रोफेसर मितेश खापरा ने एआई4भारत और बोधन एआई के साथ मिलकर इंडिक ट्रांसक्राइब को पेश किया है। यह एक एआई ट्रांसक्रिप्शन मॉडल है, जो बोली गई भाषा को टेक्स्ट में बदलने के लिए बनाया गया है। खापरा ने बताया कि भारत एक वॉइस फर्स्ट नेशन है, जहां लोग कई भाषाओं, लिपियों और अलग-अलग एक्सेंट में बातचीत करते हैं।
इस मॉडल का मकसद ऐसे एआई सिस्टम को तैयार करना है जो भारतीय लोगों के बोलने के तरीके को समझ सके। यह मॉडल उन भाषाओं और आवाजों पर ध्यान देता है, जिन्हें पहले एआई सिस्टम में उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती थी।
26 भारतीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी का सपोर्ट
इंडिक ट्रांसक्राइब मॉडल 26 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी को सपोर्ट करता है। इस एआई मॉडल में 1.2 बिलियन पैरामीटर्स हैं, जो इसे बड़े स्तर का स्पीच टू टेक्स्ट सिस्टम बनाते हैं।
भारत में लोग बातचीत के दौरान कई बार भाषा बदलते रहते हैं या अलग-अलग क्षेत्रीय लहजों में बोलते हैं। ऐसे में सही ट्रांसक्रिप्शन करना आसान नहीं होता। इंडिक ट्रांसक्राइब इसी समस्या को कम करने के लिए बनाया गया है ताकि अलग-अलग उच्चारण और बोलने के तरीकों को ज्यादा बेहतर तरीके से समझा जा सके।
भारतीय भाषाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया मॉडल
अब तक कई एआई मॉडल कुछ चुनिंदा भाषाओं और बोलने के तरीकों पर ज्यादा आधारित रहे हैं। इंडिक ट्रांसक्राइब को भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
यह मॉडल उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो अपनी रोजमर्रा की बातचीत के लिए क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं। अलग-अलग भाषाओं में आवाज पहचानने की क्षमता बढ़ने से ट्रांसक्रिप्शन, पहुंच और वॉइस आधारित एआई टूल्स को फायदा मिल सकता है।
5 सितंबर 2026 से शुरू होगा इस्तेमाल
इंडिक ट्रांसक्राइब को 5 सितंबर 2026 से उपलब्ध कराया जाएगा। इसे बोधन एआई और एआई4भारत के सहयोग से तैयार किया गया है। यूजर्स इस मॉडल को बोधन एआई के जरिए सीधे इस्तेमाल और टेस्ट कर सकेंगे।
इस एआई मॉडल का लक्ष्य भारत में वॉइस टेक्नोलॉजी को ज्यादा आसान और बेहतर बनाना है, ताकि अलग-अलग भाषाओं और लहजों में बोलने वाले लोगों के लिए एआई टूल्स ज्यादा उपयोगी साबित हो सकें।