AI की रफ्तार से पीछे छूट रहे इंसान! दुनिया के सिर्फ 5,000 लोगों को मिल रही सबसे एडवांस AI सिस्टम तक पहुंच
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। AI रिसर्चर आंद्रेज कारपैथी ने ऐसी टेक्नोलॉजी को लेकर बड़ा दावा किया है, जो सालों का मुश्किल काम कुछ हफ्तों में पूरा कर सकती है। हालांकि, इस तकनीक तक बेहद कम लोगों की पहुंच है। आखिर इंसानों के सामने कौन सी नई चुनौती खड़ी हो रही है?

In Short
- AI रिसर्चर आंद्रेज कारपैथी का दावा, सिर्फ 5,000 लोगों के पास दुनिया के सबसे एडवांस AI सिस्टम की पहुंच।
- AI की मदद से अब सालों में पूरे होने वाले मुश्किल काम कुछ ही हफ्तों में किए जा सकते हैं।
- AI की बढ़ती रफ्तार से इंसानों के सामने नई चुनौती, इसके तैयार किए नतीजों को समझना और जांचना हो रहा मुश्किल।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया तेजी से बदल रही है। अमेरिका में अब सुपर इंटेलिजेंस की भी चर्चा होने लगी है। AI की ताकत इतनी तेजी से बढ़ रही है कि इंसानों के लिए इसकी रफ्तार के साथ चलना मुश्किल होता जा रहा है। AI रिसर्चर आंद्रेज कारपैथी के मुताबिक, दुनिया में फिलहाल करीब 5,000 लोगों के पास ही ऐसे एडवांस AI सिस्टम की पहुंच है, जो बेहद मुश्किल काम कुछ ही हफ्तों में पूरे कर सकते हैं।
ये AI सिस्टम हजारों AI एजेंट्स को एक साथ काम पर लगा सकते हैं। इसके अलावा मुश्किल सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट, वैज्ञानिक खोज और गणित से जुड़ी जटिल समस्याओं को हल करने में भी मदद कर सकते हैं।
सालों का काम अब कुछ हफ्तों में
आंद्रेज कारपैथी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि दुनिया की आबादी का करीब 0.00006% हिस्सा यानी लगभग 5,000 लोग ही ऐसे अत्याधुनिक AI सिस्टम का इस्तेमाल कर पा रहे हैं।
उनके मुताबिक, जिन कामों को पूरा करने में पहले इंडस्ट्री के सबसे अनुभवी प्रोफेशनल्स को कई साल लग जाते थे, अब AI की मदद से वही काम कुछ हफ्तों में किए जा सकते हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि AI की क्षमता इतनी तेजी से बढ़ रही है कि इंसानों के लिए उसके काम को समझना और जांचना मुश्किल होता जा रहा है।
दुनिया में कितने लोग कर रहे AI का इस्तेमाल?
आंद्रेज कारपैथी ने AI इस्तेमाल करने वालों को अलग-अलग समूहों में बांटा है। उनके अनुमान के मुताबिक, दुनिया में करीब 6 अरब लोग यानी लगभग 75% आबादी ने अभी तक लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) का बहुत कम इस्तेमाल किया है।
वहीं, करीब 1 से 2 अरब लोग मुफ्त AI टूल्स का इस्तेमाल इंटरनेट पर जानकारी खोजने, लिखने और चैटबॉट से जुड़े सामान्य कामों के लिए करते हैं।
इसके अलावा करीब 2 करोड़ लोग प्रोग्रामिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में प्रोफेशनल काम के लिए एडवांस AI मॉडल इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इनमें से ज्यादातर लोगों के पास भी सबसे शक्तिशाली AI सिस्टम की सीधी पहुंच नहीं है।
AI की रफ्तार से क्यों बढ़ रही चिंता?
आंद्रेज कारपैथी के मुताबिक, जब हजारों AI एजेंट एक साथ किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम करते हैं, तो वे इतनी ज्यादा जानकारी और नतीजे तैयार करते हैं कि इंसानों के लिए उनकी समीक्षा करना चुनौती बन जाता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि लोग कई महीने पुराने OpenAI-Hugging Face मामले की जांच और समझने में अब भी लगे हुए हैं। इसी तरह एडवांस गणित से जुड़े 722 शोध पत्रों को समझने में गणितज्ञों को काफी समय लग सकता है।
इंसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
आंद्रेज कारपैथी का कहना है कि असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि AI कितनी तेजी से काम कर सकता है। बड़ी चुनौती यह है कि इंसान उसके तैयार किए गए नतीजों को कितनी जल्दी समझ, जांच और उनका विश्लेषण कर सकते हैं।
उनके मुताबिक, आम लोगों ने अभी इन शक्तिशाली सिस्टम का अनुभव नहीं किया है। ज्यादातर प्रोफेशनल्स को AI से सीमित फायदा मिल रहा है, जबकि कुछ चुनिंदा लोग इसकी तेजी से बढ़ती क्षमताओं को करीब से देख रहे हैं।