ChatGPT से पहले Google के पास था अपना AI चैटबॉट, फिर भी क्यों नहीं किया लॉन्च?
Google ने ChatGPT जैसा अपना AI चैटबॉट पहले ही बना लिया था, लेकिन उसे लॉन्च नहीं किया। अब सवाल है कि कंपनी ने ऐसा क्यों किया और OpenAI कैसे आगे निकल गया।

In Short
- OpenAI के कर्मचारी टीबो सोटियॉक्स के मुताबिक Google के पास ChatGPT से करीब एक साल पहले LMChat नाम का AI चैटबॉट तैयार था।
- Google ने सर्च बिजनेस पर असर और AI के गलत जवाबों के डर से इस चैटबॉट को लॉन्च नहीं किया।
- ChatGPT की सफलता के बाद Google ने पहले Bard और फिर Gemini पेश किया।
करीब चार साल पहले OpenAI ने ChatGPT लॉन्च कर दुनिया को चौंका दिया था। यह ऐसा AI चैटबॉट था, जो लोगों से आम बातचीत की तरह जवाब दे सकता था। ChatGPT आने के बाद Google को भी तेजी से अपने AI प्रोडक्ट पर काम करना पड़ा। हालांकि, OpenAI के कर्मचारी थिबॉल्ट ‘टीबो’ सोटियॉक्स के मुताबिक, Google के पास ChatGPT जैसा चैटबॉट पहले से मौजूद था।
ChatGPT से एक साल पहले तैयार था LMChat
AI इंजीनियर चेंग लू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर Google के पूर्व अधिकारी जेफ डीन के एक पुराने इंटरव्यू का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि Google के पास ChatGPT से पहले एक इंटरनल बॉट था, लेकिन कंपनी को नहीं लगा कि यह Google Search से बेहतर है।
इस पोस्ट पर जवाब देते हुए टीबो सोटियॉक्स ने कहा कि वह उस टीम का हिस्सा थे। उनके मुताबिक, Google ने ChatGPT के लॉन्च से करीब एक साल पहले ऐसा ही चैटबॉट तैयार कर लिया था। इसे LMChat कहा जाता था और बाद में इसे एक दूसरा कोडनेम भी दिया गया।
Google ने क्यों रोका लॉन्च?
टीबो का दावा है कि Google अपने चैटबॉट को बाजार में उतारने से घबरा रहा था। कंपनी को डर था कि AI चैटबॉट उसके सर्च कारोबार पर असर डाल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि DeepMind को ऐसे प्रोडक्ट लॉन्च करने से रोका गया, जो Google के मौजूदा बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकते थे।
टीबो ने जुलाई 2024 में Google DeepMind छोड़कर OpenAI जॉइन किया था।
Transformer तकनीक भी Google ने बनाई
आज के ज्यादातर बड़े AI मॉडल जिस तकनीक पर काम करते हैं, उसकी नींव भी Google ने रखी थी। कंपनी ने 2017 में “Attention is All You Need” नाम का रिसर्च पेपर जारी किया था। इसी में Transformer आर्किटेक्चर पेश किया गया था।
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ChatGPT में GPT का मतलब Generative Pre-trained Transformer है। यानी जिस तकनीक ने ChatGPT को संभव बनाया, उसे विकसित करने में Google की बड़ी भूमिका थी। इसके बावजूद कंपनी अपना चैटबॉट समय पर लॉन्च नहीं कर सकी।
गलत जवाबों को लेकर था डर
2022 में Google के CEO सुंदर पिचाई और जेफ डीन ने कहा था कि कंपनी के पास OpenAI जैसी तकनीक मौजूद थी, लेकिन Google के लिए गलत जवाब देने का जोखिम ज्यादा था। लोगों को Google से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा होता है, इसलिए कंपनी AI के गलत या मनगढ़ंत जवाबों को लेकर सावधान थी।
AI की भाषा में इसे hallucination कहा जाता है, जिसमें चैटबॉट बिना सही जानकारी के जवाब बना सकता है।
ChatGPT ने बदल दी AI की रफ्तार
ChatGPT के लॉन्च के बाद Google ने पहले Bard और फिर Gemini पेश किया। इससे पहले Google के पास LaMDA, PaLM और Meena जैसे मॉडल भी थे, लेकिन इन्हें बड़े स्तर पर कंपनी के प्रोडक्ट्स में शामिल नहीं किया गया।
ChatGPT ने पांच दिनों में 10 लाख और दो महीनों में 10 करोड़ यूजर्स हासिल कर लिए। आज OpenAI, Google और Anthropic को सबसे एडवांस AI मॉडल बनाने वाली प्रमुख कंपनियों में गिना जाता है।