Google ने टाला Gemini 3.5 Pro का लॉन्च, AI रेस में सामने आई बड़ी अड़चन

एआई रेस में तेजी से आगे बढ़ रहे गूगल को अपने नए जेमिनी मॉडल को लेकर अचानक मुश्किल का सामना करना पड़ा है। कोडिंग परफॉर्मेंस से जुड़ी इस परेशानी ने कंपनी की तैयारी, अंदरूनी कामकाज और बाजार में उसकी पकड़ को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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In Short

  • जेमिनी 3.5 प्रो को जून में लॉन्च किया जाना था, लेकिन कोडिंग टेस्ट में तय गोल पूरे न होने के कारण गूगल ने इसका लॉन्च टाल दिया।
  • ओपनएआई और एंथ्रोपिक के नए और ज्यादा पावरफुल मॉडल आने से गूगल पर एआई रेस में पीछे रहने का दबाव बढ़ गया है।
  • देरी की रिपोर्ट के बाद अल्फाबेट के शेयर करीब 3% गिर गए, जबकि गूगल ने कहा कि जेमिनी 3.5 प्रो की पार्टनर्स के साथ टेस्टिंग अभी जारी है।

By Gaurav Kumar:

Google Gemini 3.5 Pro: AI की दुनिया में Google को अपनी नई तैयारी के दौरान बड़ा झटका लगा है। कंपनी का अगला फ्लैगशिप AI मॉडल Gemini 3.5 Pro तय समय पर लॉन्च नहीं हो पाया। रिपोर्ट के मुताबिक यह मॉडल खासतौर पर कोडिंग के मामले में Google के अंदर तय किए गए गोल पूरे नहीं कर सका। दूसरी तरफ OpenAI और Anthropic लगातार नए और ज्यादा पावरफुल AI मॉडल लॉन्च कर रहे हैं, जिससे Google पर दबाव और बढ़ गया है।

चलिए जानते हैं Alphabet के शेयरों पर इसका कितना असर पड़ा और कंपनी ने क्या जवाब दिया। लेकिन सबसे पहले जानते हैं कि कोडिंग टेस्ट में Gemini 3.5 Pro आखिर कहां पीछे रह गया?

कोडिंग में तय गोल पूरा नहीं कर पाया मॉडल

Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक Gemini 3.5 Pro को जून में लॉन्च किया जाना था। Google CEO सुंदर पिचाई ने मई में Google I/O के दौरान इस मॉडल के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि कंपनी ने इसे अपने काम में इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया है।

लेकिन इंटरनल टेस्टिंग में मॉडल का परफॉर्मेंस तय गोल तक नहीं पहुंच पाया। खासतौर पर कोडिंग में मिले रिजल्ट से Google के इंजीनियर्स खुश नहीं थे। मॉडल की कोडिंग क्षमता सुधारने के लिए पिछले महीने उसके ट्रेनिंग डेटा को भी अपडेट किया गया, लेकिन इसके बाद भी कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला।

ऐसे में सवाल है कि OpenAI और Anthropic की तेज रफ्तार ने Google पर कितना दबाव बढ़ा दिया है?

OpenAI और Anthropic ने बढ़ाया दबाव

Gemini की धीमी रफ्तार ऐसे समय में सामने आई है, जब OpenAI और Anthropic ने GPT-5.6 और Claude Fable 5 जैसे नए AI मॉडल पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये मॉडल इतने एडवांस हैं कि अमेरिका ने शुरुआत में दोनों कंपनियों से इन्हें सीमित तौर पर रिलीज करने के लिए कहा था।

OpenAI अपने Codex को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जबकि कंपनियों के लिए कोडिंग टूल बनाने के मामले में Anthropic पहले से मजबूत माना जाता है। Google के कर्मचारियों को डर है कि कोडिंग में पीछे रहने से कंपनी AI मार्केट में अपनी पकड़ खो सकती है। लेकिन क्या सिर्फ मॉडल का कमजोर परफॉर्मेंस ही देरी की वजह है या Google का बड़ा ढांचा भी काम की रफ्तार धीमी कर रहा है?

कंपनी के बड़े ढांचे से भी हो रही देरी

मौजूदा और पुराने कर्मचारियों के मुताबिक गूगल का बड़ा ढांचा भी मॉडल के लॉन्च में रुकावट बन रहा है। सर्च, मैप्स, यूट्यूब, एंड्रॉयड, गूगल क्लाउड और डीपमाइंड जैसी कई टीमों और स्टेकहोल्डर्स को एक साथ मिलकर काम करना पड़ता है।

टीमों के गोल बार-बार बदलने, एक ही काम पर कई ग्रुप्स के लगे होने और रिसोर्स के लिए आपसी खींचतान के कारण प्रोडक्ट को जल्दी मार्केट में लाना मुश्किल हो रहा है। एक पुराने कर्मचारी ने इसकी तुलना पूरे समुद्र को उबालने की कोशिश से की। लेकिन इस देरी की खबर का गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के शेयरों पर कितना असर पड़ा?

Alphabet के शेयर करीब 3% गिरे

रिपोर्ट सामने आने के बाद गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के शेयर गुरुवार को करीब 3% गिर गए। ट्रेडिंग के दौरान एक समय शेयर लगभग 4% तक नीचे चले गए थे। इससे पता चलता है कि इन्वेस्टर्स गूगल की एआई स्ट्रैटेजी और जेमिनी 3.5 प्रो के लॉन्च में हो रही देरी को लेकर परेशान हैं। लेकिन इस पूरे मामले पर गूगल ने क्या जवाब दिया और मॉडल की टेस्टिंग को लेकर कंपनी ने क्या कहा?

Google ने कहा टेस्टिंग जारी है

गूगल के स्पोक्सपर्सन ने कहा कि कंपनी कई नए मॉडल तेजी से तैयार कर रही है। साथ ही इन्हें कस्टमर्स के लिए कम खर्च वाला बनाने पर भी काम किया जा रहा है। जेमिनी 3.5 प्रो, अपडेटेड फ्लैश मॉडल और दूसरे मॉडल्स की पार्टनर्स के साथ टेस्टिंग चल रही है।

गूगल का कहना है कि सर्च डेटा, टेक्स्ट, इमेज, वीडियो और असली दुनिया की तरह काम करने वाले वर्ल्ड मॉडल्स उसकी बड़ी ताकत हैं। कंपनी ने यह भी बताया कि उसके करीब 75% कोड अब एआई की मदद से तैयार किए जाते हैं और उन्हें इस्तेमाल करने से पहले जांचा जाता है। हालांकि कंप्यूटिंग पावर की कमी और टैलेंट के एंथ्रोपिक जैसी एआई लैब्स में जाने के कारण गूगल की मुश्किलें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

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