AI से बढ़ानी है बिजनेस की ग्रोथ? एक्सपर्ट ने बताईं 5 ऐसी गलतियां जो कंपनियों को पड़ सकती हैं भारी
कंपनियां AI टूल्स और ऑटोमेशन को तेजी से अपना रही हैं, लेकिन सिर्फ काम की स्पीड बढ़ना ही सफलता नहीं है। गलत वर्कफ्लो, कमजोर रिव्यू सिस्टम और जिम्मेदारी की कमी बड़ा जोखिम बन सकती है। जानिए वे पांच गलतियां, जो AI से मिलने वाले फायदे को नुकसान में बदल सकती हैं।

In Short
- सिर्फ काम की स्पीड बढ़ने से बिजनेस वैल्यू नहीं बनती, इसके लिए पूरे वर्कफ्लो को बदलना जरूरी है।
- AI से काम ऑटोमेट करने के साथ रिव्यू सिस्टम और अकाउंटेबिलिटी भी साफ तय होनी चाहिए।
- रूटीन काम हटाते समय कंपनियों को कर्मचारियों की लर्निंग, जजमेंट और भविष्य के लीडर तैयार करने पर भी ध्यान देना होगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब कंपनियों की मीटिंग और प्लानिंग का बड़ा हिस्सा बन चुका है। कंपनियां कोपायलट, AI असिस्टेंट और ऑटोनॉमस एजेंट तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन सिर्फ नए टूल लगाने से बिजनेस नहीं बदलता। असली फायदा तभी मिलेगा, जब कंपनियां काम करने, फैसले लेने, रिव्यू करने और जिम्मेदारी तय करने के पूरे तरीके को दोबारा डिजाइन करेंगी। इसी बदलाव को समझने के लिए इन पांच गलतियों पर ध्यान देना जरूरी है।
प्रोडक्टिविटी को बिजनेस वैल्यू समझना
एक्सेंचर के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और ट्रैवल एंड हॉस्पिटैलिटी बिजनेस के पूर्व ग्लोबल डेटा एंड AI लीड सतीश विश्वनाथन के मुताबिक, कंपनियां तेज काम को बेहतर बिजनेस रिजल्ट मान लेती हैं। कोई कर्मचारी तीन घंटे की रिपोर्ट 20 मिनट में बना दे, तो इसे सीधे फायदा नहीं कहा जा सकता।
असली वैल्यू तभी बनेगी, जब बचा हुआ समय ज्यादा जरूरी काम में लगे, दूसरे बॉटलनेक हटें और आखिर में बिजनेस आउटकम बेहतर हो। पुराने वर्कफ्लो में AI जोड़ने से काम तेज हो सकता है, लेकिन नतीजे जरूरी नहीं कि बेहतर हों।
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काम ऑटोमेट किया लेकिन रिव्यू नहीं बदला
AI कुछ ही सेकंड में कंटेंट तैयार कर सकता है, लेकिन उसकी एक्युरेसी, कॉन्टेक्स्ट और कम्प्लीटनेस जांचना अभी भी जरूरी है। कई कंपनियों ने काम तैयार करने की प्रक्रिया ऑटोमेट कर दी है, लेकिन वेरिफिकेशन अब भी पूरी तरह मैनुअल है।
इससे काम खत्म नहीं होता, बल्कि उसका रूप बदल जाता है। कर्मचारियों को AI आउटपुट जांचने, गलती सुधारने, रिकॉर्ड रखने और गवर्नेंस में ज्यादा समय देना पड़ता है। रिव्यू सिस्टम को बदले बिना AI की प्रोडक्टिविटी का बड़ा हिस्सा खत्म हो सकता है।
ऐसा काम हटाना जिससे भविष्य के लीडर बनते हैं
जूनियर प्रोफेशनल रिसर्च, ड्राफ्टिंग, एनालिसिस, बार-बार प्रैक्टिस और गलतियों से सीखकर आगे बढ़ते हैं। अगर AI ये सभी काम करने लगे, तो कंपनियां अनजाने में उस अप्रेंटिसशिप को खत्म कर सकती हैं, जिससे भविष्य के एक्सपर्ट, मैनेजर और लीडर तैयार होते हैं।
आज की एफिशिएंसी बढ़ाने के चक्कर में कंपनियां कल के लिए जरूरी ह्यूमन जजमेंट कमजोर कर सकती हैं। इसलिए हर काम को हटाने के बजाय यह देखना जरूरी है कि कर्मचारियों की सीखने की प्रक्रिया कैसे बचाई जाए।
अकाउंटेबिलिटी साफ नहीं रखना
AI से जुड़े एक फैसले में मॉडल, AI एजेंट, मैनेजर और टेक्नोलॉजी वेंडर जैसे कई पक्ष शामिल हो सकते हैं। लेकिन गलती होने पर जिम्मेदारी पूरी टेक्नोलॉजी चेन में बांटी नहीं जा सकती।
हर AI वर्कफ्लो में साफ होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर कौन बीच में दखल देगा, AI के काम का रिव्यू कौन करेगा और अंतिम नतीजे की जिम्मेदारी किसकी होगी। अकाउंटेबिलिटी तय नहीं होने पर AI से जुड़े जोखिम तेजी से बढ़ सकते हैं।
सिर्फ AI टूल सीख लेना काफी मानना
कुछ कर्मचारी अपने मौजूदा काम को बचाने पर ध्यान दे रहे हैं, जबकि कुछ को लगता है कि कुछ AI टूल सीख लेने से उनका करियर सुरक्षित हो जाएगा। विश्वनाथन के अनुसार, दोनों सोच पर्याप्त नहीं हैं।
रूटीन काम आसान होने के साथ कर्मचारियों की असली वैल्यू जजमेंट, कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम सॉल्विंग, बेहतर फैसले लेने और इंटेलिजेंट सिस्टम के साथ काम करने में होगी। कंपनियों को AI को सिर्फ ऑटोमेशन नहीं, बल्कि कॉग्निटिव और ऑर्गनाइजेशनल ट्रांसफॉर्मेशन के रूप में देखना होगा।