गेमिंग से तेज होता है दिमाग या सिर्फ भ्रम? Elon Musk के बयान ने छेड़ी नई बहस

क्या वीडियो गेम सिर्फ समय की बर्बादी हैं या दिमाग को तेज करने का जरिया भी बन सकते हैं? Elon Musk के एक बयान के बाद इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई है। एक नई स्टडी में गेमिंग और कॉग्निटिव परफॉर्मेंस के बीच दिलचस्प कनेक्शन सामने आया है।

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In Short

  • Elon Musk ने वीडियो गेम खेलने को स्मार्ट बनने से जोड़ते हुए दिया बड़ा बयान
  • स्टडी में ज्यादा गेम खेलने वालों का कॉग्निटिव टेस्ट प्रदर्शन बेहतर पाया गया
  • रिसर्च ने साफ किया कि गेमिंग और बेहतर दिमागी क्षमता के बीच संबंध है, सीधा कारण साबित नहीं हुआ

By Gungun Mishra:

दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल Elon Musk ने वीडियो गेम को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने नई बहस शुरू कर दी है। Musk का कहना है कि वीडियो गेम खेलने वाले लोग ज्यादा स्मार्ट हो सकते हैं। उन्होंने एक स्टडी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वीडियो गेम खेलो या फिर “डंब” रह जाओ, जैसे इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।

Musk का यह बयान उस रिसर्च के बाद आया, जिसमें वीडियो गेम खेलने और बेहतर कॉग्निटिव परफॉर्मेंस के बीच संबंध पाया गया था। हालांकि, स्टडी ने यह साबित नहीं किया कि वीडियो गेम खेलने से सीधे तौर पर इंसान ज्यादा बुद्धिमान बन जाता है।

स्टडी में गेमिंग और दिमागी क्षमता के बीच मिला कनेक्शन

जिस रिसर्च का Musk ने जिक्र किया, उसका नाम “Characterizing the cognitive and mental health benefits of exercise and video game playing” था। यह स्टडी वीडियो गेमिंग, फिजिकल एक्टिविटी, कॉग्निटिव परफॉर्मेंस और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझने के लिए की गई थी।

इस ऑनलाइन स्टडी में शुरुआत में 2,600 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था। बाद में डुप्लीकेट, अधूरे और असामान्य जवाब हटाने के बाद 923 लोगों को अंतिम विश्लेषण में शामिल किया गया। इन प्रतिभागियों की औसत उम्र करीब 55 साल थी।

ज्यादा गेम खेलने वालों ने बेहतर किया प्रदर्शन

रिसर्च में प्रतिभागियों से उनकी गेमिंग आदतों और शारीरिक गतिविधियों को लेकर सवाल पूछे गए। इसके अलावा उनकी मेमोरी, रीजनिंग, ध्यान लगाने की क्षमता, समस्या हल करने की क्षमता, भाषा कौशल और विजुअल स्किल्स से जुड़े कॉग्निटिव टेस्ट भी लिए गए।

नतीजों में सामने आया कि जो लोग ज्यादा समय वीडियो गेम खेलने में बिताते थे, उन्होंने कई कॉग्निटिव टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन किया। खासतौर पर मेमोरी और रीजनिंग से जुड़े टेस्ट में गेमर्स का प्रदर्शन अच्छा रहा।

स्टडी के मुताबिक, जो लोग हफ्ते में कम से कम 5 घंटे किसी गेम को खेलते थे, उनका टेस्ट प्रदर्शन उनकी वास्तविक उम्र के मुकाबले बेहतर था। उनका प्रदर्शन औसतन उन लोगों जैसा था, जो करीब 13.7 साल छोटे थे। वहीं कम गेम खेलने वालों में यह अंतर लगभग 5.2 साल रहा।

रिसर्च ने नहीं कहा कि गेमिंग से दिमाग युवा हो जाता है

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वीडियो गेम खेलने से किसी व्यक्ति का दिमाग सच में 13.7 साल युवा हो जाता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह आंकड़ा सिर्फ कॉग्निटिव टेस्ट में उम्र के हिसाब से प्रदर्शन के अंतर को दिखाता है।

साथ ही यह रिसर्च एक समय पर लोगों की आदतों और प्रदर्शन को देखने वाली स्टडी थी। इसमें कई सालों तक लोगों का लगातार अध्ययन नहीं किया गया। इसलिए यह सिर्फ गेमिंग और बेहतर कॉग्निटिव क्षमता के बीच संबंध दिखाती है, यह साबित नहीं करती कि गेमिंग से ही स्मार्टनेस बढ़ती है।

एक्सरसाइज का असर मानसिक स्वास्थ्य पर दिखा

स्टडी में फिजिकल एक्टिविटी को लेकर भी जानकारी सामने आई। जिन लोगों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह के मुताबिक हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट मध्यम से तेज एक्सरसाइज की, उनमें कॉग्निटिव प्रदर्शन में बड़ा अंतर नहीं दिखा।

हालांकि, ऐसे लोगों ने बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की बात कही और उनमें डिप्रेशन व एंग्जायटी के लक्षण कम पाए गए।

रिसर्च का निष्कर्ष यह नहीं है कि लोग एक्सरसाइज छोड़कर सिर्फ वीडियो गेम खेलें। इसके मुताबिक, अलग-अलग गतिविधियों का दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर अलग-अलग असर हो सकता है। गेमिंग का संबंध कॉग्निटिव परफॉर्मेंस से और फिजिकल एक्टिविटी का संबंध मानसिक स्वास्थ्य से देखा गया है।

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