साइबर फ्रॉड पर बड़ा एक्शन: हेल्पलाइन 1930 होगी AI से अपग्रेड, ठगी रोकने और पैसे रिकवरी सिस्टम को मिलेगा नया बूस्ट
भारत में डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़े हैं। फर्जी निवेश स्कीम, फिशिंग लिंक और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे साइबर अपराध के मामलों से निपटने के लिए 1930 हेल्पलाइन और संबंधित सिस्टम को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने AI आधारित सिस्टम बनाया है। पढ़िए पूरी स्टोरी

In Short
- साइबर ठगी रोकने के लिए सरकार का नया मास्टरप्लान
- साइबर फ्रॉड के खिलाफ बड़ा एक्शन प्लान
- साइबर अपराध रोकने के लिए AI पर आधारित होगा सिस्टम
- ठगी रोकने और पैसे रिकवरी सिस्टम को मिलेगा नया बूस्ट
भारत में बढ़ते साइबर वित्तीय ठगी के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और संबंधित सिस्टम को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की। सरकार का फोकस शिकायतों का तेज निपटारा, तुरंत कार्रवाई और ठगी गई रकम को जल्द से जल्द रोकने पर रहा।
1930 हेल्पलाइन में AI अपग्रेड से बदलेगा पूरा सिस्टम
बैठक में तय किया गया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा। इसका मकसद शिकायत दर्ज होने के समय को कम करना, कॉल रूटिंग को स्मार्ट बनाना और धोखाधड़ी के पैटर्न की पहचान तेजी से करना है। मल्टी लेंग्वेज सपोर्ट और रियल-टाइम अपडेट सिस्टम भी इसमें शामिल होगा। सरकार का मानना है कि इससे पीड़ितों को तुरंत सहायता मिलेगी और आर्थिक नुकसान को रोका जा सकेगा।
राज्यों के कॉल सेंटर और राष्ट्रीय बैकअप सिस्टम
समीक्षा बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे 1930 कॉल सेंटरों को तकनीकी और मानव संसाधन के स्तर पर मजबूत किया जाएगा। साथ ही एक राष्ट्रीय कॉल सेंटर बनाया जाएगा, जो उन कॉल्स को संभालेगा जिन्हें राज्य स्तर पर समय पर रिस्पॉन्स नहीं मिल पाता। इससे शिकायतों के लंबित रहने की समस्या कम होगी और हर मामले में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
ठगी रोकने और पैसे रिकवरी सिस्टम को नया बूस्ट
सरकार की मनी रिस्टोरेशन और शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत अब तक करीब एक लाख लोगों को राहत मिली है। इसके तहत 94 लाख बैंक खातों की पहचान और अपलोडिंग की जा चुकी है, जिससे धोखाधड़ी वाले लेन-देन को ट्रैक और रोकने में मदद मिल रही है। बैठक में म्यूल बैंक खातों पर सख्त निगरानी और अनावश्यक रूप से फ्रीज किए गए खातों को जल्द खोलने के निर्देश भी दिए गए।