OpenAI के 377 गणितीय सवालों पर काम करने के बाद चीन का बड़ा कदम! AI के लिए जुटाएगा 1000 वैज्ञानिक

AI की दुनिया में अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला अब गणित की मुश्किल समस्याओं तक पहुंच गया है। OpenAI के 377 गणितीय सवालों से जुड़े शोध सामने आने के बाद चीन ने 1000 से ज्यादा वैज्ञानिकों का नेटवर्क बनाने की योजना तैयार की है। इस पहल का नेतृत्व एक मशहूर गणितज्ञ कर रहे हैं। आखिर चीन किस तकनीक पर काम करेगा और अमेरिकी AI कंपनियों से कितना पीछे है? जानिए पूरी कहानी।

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चीन गणितीय शोध में AI का इस्तेमाल करने के लिए 1,000 से ज्यादा गणितज्ञों का गठबंधन बना रहा है। (AI से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर)
चीन गणितीय शोध में AI का इस्तेमाल करने के लिए 1,000 से ज्यादा गणितज्ञों का गठबंधन बना रहा है। (AI से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर)

In Short

  • चीन गणित में AI के इस्तेमाल के लिए 1000 से ज्यादा वैज्ञानिकों का नेटवर्क बनाएगा।
  • आठ प्रमुख संस्थान मिलकर गणित के लिए खास AI मॉडल विकसित करेंगे।
  • OpenAI के 377 गणितीय सवालों पर शोध के बाद चीन ने बढ़ाई तैयारी।

By Shakshi:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला तेज होता जा रहा है। अब चीन गणित के क्षेत्र में भी OpenAI और Anthropic जैसी अमेरिकी AI कंपनियों को टक्कर देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए चीन के प्रमुख गणितज्ञों ने बीजिंग में एक नया गठबंधन बनाया है, जिसका लक्ष्य AI की मदद से गणित की मुश्किल समस्याओं को हल करना है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल का नेतृत्व जाने-माने गणितज्ञ और फील्ड्स मेडल विजेता शिंग-तुंग याउ (Shing-Tung Yau) कर रहे हैं। इस गठबंधन का नाम 'द याउ लेबोरेटरी अलायंस फॉर मैथमेटिक्स एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' रखा गया है। इसमें आठ प्रमुख संस्थान शामिल होंगे और 1,000 से ज्यादा वैज्ञानिकों का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य है।

गणित में AI को लेकर चीन की बड़ी तैयारी

इस गठबंधन का मकसद गणित के लिए खास AI मॉडल विकसित करना है। ये मॉडल नई गणितीय संभावनाओं का पता लगाने, जटिल समस्याओं को हल करने और गणितीय प्रमाण तैयार करने में वैज्ञानिकों की मदद करेंगे। साथ ही ऐसे सिस्टम विकसित किए जाएंगे, जिनके तर्क और निष्कर्षों को आसानी से समझा जा सके।

शिंग-तुंग याउ ने गणित में AI की बढ़ती ताकत की तुलना सुनामी से की है। उन्होंने कहा कि एक साल पहले तक उन्हें अंदाजा नहीं था कि AI इतनी तेजी से आगे बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, चीन के गणितज्ञों को इस तकनीक से दूर रहने के बजाय मिलकर इसका इस्तेमाल करना चाहिए।

अमेरिका से कितना पीछे है चीन?

याउ का मानना है कि आम लोगों के इस्तेमाल वाले AI मॉडल बनाने में चीन ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन गणित और फिजिक्स जैसे उन्नत वैज्ञानिक शोध में अमेरिकी कंपनियां अभी काफी आगे हैं। खासकर OpenAI के हालिया काम को देखते हुए चीन को इस अंतर को कम करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में OpenAI ने जिस तरह का काम किया है, उसे देखते हुए दोनों देशों के बीच अंतर काफी बड़ा है। नया गठबंधन इसी अंतर को कम करने और वैज्ञानिक शोध में AI का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।

OpenAI ने 377 गणितीय समस्याओं पर किया काम

चीन की यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब OpenAI ने हाल ही में 377 गणितीय समस्याओं से जुड़े निष्कर्षों पर 700 से ज्यादा शोधपत्र जारी किए हैं। कंपनी ने गणित की जटिल समस्याओं पर AI की क्षमताएं दिखाने का दावा किया है। हालांकि, इन निष्कर्षों की सटीकता को लेकर सवाल भी उठे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI ने 722 गणितीय पांडुलिपियां जारी की थीं। इसके अगले ही दिन एक गलती सामने आने पर तीन पांडुलिपियां वापस लेनी पड़ीं, जबकि 14 अन्य में बदलाव किए गए। गणितज्ञों ने कहा कि ऐसे शोध की अच्छी तरह जांच और पुराने काम को उचित श्रेय देना जरूरी है।

AI से गणित हल करने पर क्यों हो रहा विवाद?

OpenAI की इस पहल का कुछ गणितज्ञ विरोध भी कर रहे हैं। एसोसिएशन फॉर ह्यूमन मैथमेटिक्स ने गणितज्ञों से OpenAI का बहिष्कार करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि गणितज्ञों ने कंपनी से इस तरह का काम करने के लिए नहीं कहा था।

वहीं, Meta भी AI की मदद से गणितीय शोध में आगे बढ़ रही है। कंपनी पहले छह बड़ी गणितीय समस्याओं पर शोधपत्र जारी कर चुकी है। ऐसे में चीन का नया गठबंधन दिखाता है कि AI की प्रतिस्पर्धा अब चैटबॉट और आम उपयोग वाले टूल्स से आगे बढ़कर वैज्ञानिक खोजों तक पहुंच रही है।

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