क्या AI बन सकता है इंसानियत के लिए बड़ा खतरा? एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया भर में नई बहस छिड़ गई है। सैम ऑल्टमैन के एक बयान के बाद एक्सपर्ट्स ने इंसानों के भविष्य, नौकरियों और साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। आखिर AI कितना खतरनाक हो सकता है और इसके फायदे किस कीमत पर मिलेंगे? जानिए पूरी रिपोर्ट।

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In Short

  • AI से इंसानियत खत्म होने की आशंका को लेकर एक्सपर्ट्स ने गंभीर चेतावनी दी है।
  • एक स्टडी में AI से मानवता के खत्म होने या गंभीर तबाही की मीडियन आशंका 5% बताई गई।
  • AI के बढ़ते इस्तेमाल से नौकरियों, साइबर सुरक्षा और डीपफेक फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है।

By Gungun Mishra:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से हमारी जिंदगी का हिस्सा बन रहा है। पढ़ाई, नौकरी, इलाज और कारोबार जैसे कई क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। लेकिन इसके फायदों के साथ कुछ बड़े खतरे भी सामने आ रहे हैं। अब एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर AI पर सही नियंत्रण नहीं रखा गया, तो यह इंसानों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

सैम ऑल्टमैन के बयान से शुरू हुई बहस

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में कहा कि AI के फायदे हासिल करने के लिए दुनिया को कुछ बुरी घटनाओं को भी स्वीकार करना होगा। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि उनका इशारा किन खतरों की तरफ था।

उनके इस बयान के बाद AI की सुरक्षा और इसके भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

क्या AI से खत्म हो सकती है इंसानियत?

Think360.AI के सीईओ अमित दास ने 2024 की एक स्टडी का जिक्र किया। इसमें 2,778 AI रिसर्चर्स शामिल थे। सर्वे में जवाब देने वालों का मीडियन अनुमान था कि AI से मानवता के खत्म होने या इसी स्तर की गंभीर तबाही की संभावना 5% है।

अमित दास ने कहा कि इतना खतरा भी बहुत बड़ा है। उनके मुताबिक, अगर किसी विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका 5% हो, तो कोई उसमें बैठना नहीं चाहेगा।

वहीं, एंथ्रोपिक के सेफ्टी लीड इवान हुबिंगर ने अगले दशक में AI से मानवता खत्म होने की आशंका 10% बताई है। हालांकि, एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग इस तरह की आशंकाओं से सहमत नहीं हैं।

साइबर फ्रॉड और डीपफेक का बढ़ेगा खतरा

साइबर सिक्योरिटी कंपनी मिनीऑरेंज के सीईओ अनिर्बान मुखर्जी के मुताबिक, AI की मदद से फिशिंग, डीपफेक, वॉयस क्लोनिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी को अंजाम देना आसान हो सकता है।

भारत में भी यह चिंता बढ़ रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक, 2024 में साइबर क्राइम के 1,01,928 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से 17.9% ज्यादा थे।

नौकरियों पर भी मंडरा रहा संकट

AI का असर रोजगार पर भी पड़ सकता है। layoffs.fyi के मुताबिक, 2026 में अब तक 300 से ज्यादा टेक कंपनियों में 1.30 लाख से अधिक कर्मचारियों की छंटनी हुई है।

न्यूटन स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी के को-फाउंडर निशांत चंद्रा का कहना है कि AI शुरुआती स्तर की नौकरियों को इतनी तेजी से प्रभावित कर सकता है कि कर्मचारियों को नए स्किल सीखने का पर्याप्त समय नहीं मिलेगा।

AI के फायदे भी हैं बड़े

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि AI से इलाज, शिक्षा, वैज्ञानिक खोज और कारोबार में बड़े बदलाव आ सकते हैं। यह कर्मचारियों का समय बचाकर उन्हें ज्यादा रचनात्मक काम करने का मौका दे सकता है।

हालांकि, ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट के डॉ. एन विवेक का कहना है कि AI के फायदे किसी भी नुकसान को सही नहीं ठहरा सकते। सबसे जरूरी सवाल यह है कि AI से फायदा किसे मिलेगा और इसके नुकसान की कीमत किसे चुकानी पड़ेगी।

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