BT Infra Summit 2026: भारत के इंफ्रा सेक्टर को बदलने वाली टेक्नोलॉजी कौन-सी? एक्सपर्ट्स ने बताया बड़ा फॉर्मूला
भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर का काम तेजी से बढ़ रहा है। Business Today Infrastructure Summit 2026 में एक्सपर्ट्स ने बताया कि अब बड़े प्रोजेक्ट्स को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी, AI और डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल जरूरी होगा। साथ ही मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले इंफ्रा पर भी फोकस करना होगा।

भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है। रेलवे, सड़क, पावर और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर में बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। लेकिन इन प्रोजेक्ट्स को और बेहतर बनाने के लिए अब टेक्नोलॉजी और डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ाना होगा। Business Today Infrastructure Summit 2026 में एक्सपर्ट्स ने कहा कि आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए टेक्नोलॉजी के साथ-साथ टिकाऊ समाधान भी जरूरी होंगे।
इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में टेक्नोलॉजी की बढ़ेगी भूमिका
Kone Elevator India and South Asia के MD अमित गोसाईं ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर और फैक्ट्रियां बनाने में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बहुत जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा कि बिजनेस इंफॉर्मेशन मॉडलिंग (BIM) जैसी टेक्नोलॉजी बड़े ही नहीं, बल्कि छोटे कारोबारों और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए भी काफी मददगार हो सकती है। इससे किसी प्रोजेक्ट की प्लानिंग और काम को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।
गोसाईं ने बताया कि उनकी इंडस्ट्री में IoT और AI की मदद से लिफ्ट में आने वाली खराबी का पहले ही पता लगाया जा सकता है। इससे समस्या होने से पहले ही उसे ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सड़क और पुल जैसे प्रोजेक्ट्स में भी किया जा सकता है।
तेज काम के साथ मजबूत इंफ्रा भी जरूरी
एक्सपर्ट्स ने कहा कि टेक्नोलॉजी से काम जल्दी हो सकता है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता।
Jindal Stainless के चीफ सेल्स ऑफिसर राजीव गर्ग ने टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मुंबई में फुट ओवर ब्रिज गिरने की घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि जांच में जंग लगने यानी करोजन को एक बड़ी वजह बताया गया था।
इसके बाद रेलवे ने ज्यादा समय तक चलने वाले बेहतर मटेरियल तैयार करने के लिए स्टेनलेस स्टील इंडस्ट्री के साथ काम किया। गर्ग ने बताया कि कंपनी ने कुछ नए मटेरियल तैयार किए, जिनकी टेस्टिंग और मंजूरी के बाद अब उनका इस्तेमाल कई पुलों में किया जा रहा है।
भारत बना ग्लोबल कंपनियों के लिए बड़ा बाजार
समिट में मौजूद एक्सपर्ट्स ने कहा कि भारत में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से कंपनियों के लिए नए मौके बन रहे हैं।
Hitachi India के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर भारत कौशल ने कहा कि पहले कंपनियों का फोकस भारत से सामान बाहर भेजने पर था, लेकिन अब भारत में ही इतने बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं कि यह ग्लोबल कंपनियों की रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है।
इंफ्रा विकास से सुधरी सप्लाई चेन
KPT Pipes के MD अंकुर पेरिवाल ने कहा कि देश में हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से सप्लाई चेन में काफी सुधार आया है।
उन्होंने बताया कि पहले दक्षिण कोरिया और मिडिल ईस्ट से आने वाला कच्चा माल मुंबई और मुंद्रा से देहरादून पहुंचने में 7-9 दिन लगते थे, लेकिन अब इसमें करीब 20 फीसदी तक कमी आई है।
उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में सामान पहुंचाने का समय भी घटा है। करीब 10 साल पहले चेन्नई तक सामान पहुंचने में 10 दिन लगते थे, जबकि अब यह काम 5-6 दिन में हो रहा है।
हालांकि, पेरिवाल ने कहा कि चीन जैसी स्थिति तक पहुंचने के लिए भारत को एक्सपोर्ट बढ़ाने पर अभी काफी काम करना होगा और इसमें 15-20 साल लग सकते हैं।