पानी और आसमान के बीच नई तकनीक, यूरेका की एंट्री से बदल सकता है कार्गो ट्रांसपोर्ट का तरीका

बेंगलुरु की स्टार्टअप एस्पेरा इंडस्ट्रीज ने यूरेका नाम का ऑटोनॉमस एम्फीबियस विमान पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह पानी से टेक ऑफ और लैंडिंग कर सकता है और कार्गो डिलीवरी का समय हफ्तों से घटाकर घंटों तक लाने में मदद कर सकता है।

Advertisement
AI generated image

In Short

  • यूरेका को 1,000 किलोग्राम पेलोड के साथ 2,000 किलोमीटर तक उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • विमान पानी को रनवे की तरह इस्तेमाल कर सकता है और इसमें रिट्रैक्टेबल हाइड्रोफॉइल्स दिए गए हैं।
  • कंपनी का लक्ष्य कार्गो डिलीवरी की लागत एक डॉलर प्रति टन किलोमीटर से नीचे लाना है।

By Gaurav Kumar:

बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी एस्पेरा इंडस्ट्रीज ने अपने पहले विमान यूरेका की घोषणा की है। कंपनी के मुताबिक यह एक ऑटोनॉमस एम्फीबियस एयरक्राफ्ट है, यानी ऐसा विमान जिसे बिना पायलट के उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है और जो पानी पर भी टेक ऑफ और लैंडिंग कर सकता है। इसका मकसद कार्गो डिलीवरी को तेज करना और पारंपरिक एयर फ्रेट के मुकाबले लागत कम करना है।

हफ्तों का सफर घंटों में करने का दावा

एस्पेरा इंडस्ट्रीज की फाउंडर और सीईओ खुशी मित्तल ने शनिवार को यूरेका की घोषणा की। उनके मुताबिक आज सामान भेजने के दो आम तरीकों में बड़ा अंतर है। समुद्री रास्ते से माल पहुंचने में कई हफ्ते लग सकते हैं जबकि हवाई रास्ता काफी महंगा पड़ता है। कंपनी का दावा है कि यूरेका कार्गो पहुंचाने का समय हफ्तों से घटाकर घंटों तक ला सकता है।

मित्तल के मुताबिक दुनिया के कुल व्यापार का करीब 80 फीसदी हिस्सा अभी भी समुद्री रास्ते से होता है। शिपिंग में देरी का असर कम करने के लिए फैक्ट्रियां तीन से छह हफ्ते तक का बफर स्टॉक भी रखती हैं।

एक टन कार्गो उड़ाना काफी महंगा

मित्तल ने कहा कि एक टन सामान को हवाई रास्ते से भेजने की लागत समुद्री शिपिंग के मुकाबले करीब 20 गुना ज्यादा होती है। उनका कहना है कि उड़ान की लागत एक इंजीनियरिंग समस्या है।

यूरेका को 1,000 किलोग्राम पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के मुताबिक यह विमान समुद्र तल से करीब 6,500 फीट की ऊंचाई पर ऑटोनॉमस तरीके से उड़ सकता है और इसकी बताई गई रेंज 2,000 किलोमीटर है।

पानी को ही रनवे बनाने की योजना

मित्तल के मुताबिक दुनिया के 193 देशों में से 150 देशों के पास समुद्री तट है। उन्होंने यह भी कहा कि शहर, बंदरगाह और फैक्ट्रियां ऐतिहासिक रूप से पानी के आसपास विकसित होती रही हैं।

यूरेका को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पानी को रनवे की तरह इस्तेमाल कर सके। कंपनी के मुताबिक इससे एयरपोर्ट या नए इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होगी।

पुराने सीप्लेन डिजाइन से अलग

मित्तल ने बताया कि 1950 के दशक में सीप्लेन के इस्तेमाल में कमी आई थी क्योंकि उनके स्टेप्ड हल से उड़ान के दौरान ड्रैग पैदा होता था। यूरेका में इस स्टेप की जगह रिट्रैक्टेबल हाइड्रोफॉइल्स दिए गए हैं। इन्हीं की मदद से विमान पानी पर टेक ऑफ और लैंडिंग कर सकता है।

लागत कम करने पर कंपनी का फोकस

एस्पेरा के मुताबिक यूरेका के पहले विमान का लक्ष्य कार्गो डिलीवरी की लागत एक डॉलर प्रति टन किलोमीटर से नीचे रखना है। बड़े फ्लीट स्तर पर कंपनी इस लागत को 50 सेंट से भी नीचे लाने की उम्मीद कर रही है।

मित्तल का कहना है कि अगर ये आंकड़े हासिल होते हैं तो जरूरी, जल्दी खराब होने वाले और ज्यादा कीमत वाले सामान के लिए हवाई परिवहन एक ज्यादा आम विकल्प बन सकता है।

Read more!
Advertisement