AI को लेकर बराक ओबामा की चेतावनी! किलर रोबोट नहीं बल्कि ये है असली खतरा- जानें पूरी बात
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती ताकत को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बड़ी चिंता जताई है। उनका कहना है कि आने वाले समय में AI के विकास की रफ्तार अचानक कई गुना बढ़ सकती है। लेकिन उनकी असली चिंता किलर रोबोट नहीं बल्कि एक ऐसा खतरा है जो इंसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।

In Short
- बराक ओबामा ने AI की तेजी से बढ़ती ताकत को लेकर बड़ी चिंता जताई है।
- आने वाले समय में AI की लर्निंग में सेल्फ लर्निंग की हिस्सेदारी 90 फीसदी तक पहुंच सकती है।
- ओबामा के मुताबिक किलर रोबोट से ज्यादा बड़ा खतरा AI के लक्ष्य इंसानों के इरादों से अलग होना है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से आगे बढ़ रहा है। कोई इसे भविष्य की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी बता रहा है तो कोई इससे नौकरियों और इंसानों पर पड़ने वाले असर को लेकर परेशान है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Barack Obama) ने AI को लेकर बड़ी चिंता जताई है। उनका कहना है कि AI कंपनियों की मार्केट वैल्यूएशन में हाइप हो सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि AI टेक्नोलॉजी भी ओवरहाइप्ड है। ओबामा की असली चिंता AI की खुद से सीखने की बढ़ती क्षमता को लेकर है।
ओबामा के समय में ही शुरू हुई थी AI पर चर्चा
ओबामा ने बताया कि उनके राष्ट्रपति रहते 2015-16 के आसपास उनकी एडमिनिस्ट्रेशन ने AI के सामाजिक आर्थिक और नैतिक असर को समझने के लिए एक कमीशन बनाया था। इस कमीशन ने AI को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट भी तैयार की थी।
ओबामा के मुताबिक इसके बाद आई एडमिनिस्ट्रेशन ने इस रिपोर्ट को ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया। उस समय AI को लेकर जिन सवालों पर चर्चा शुरू हुई थी वे अब और बड़े हो चुके हैं।
अब इंसानों के बिना भी सीख रहा है AI
ओबामा के मुताबिक AI की तेजी से बढ़ती ताकत के पीछे रिसर्सिव लर्निंग एक बड़ी वजह है। आसान भाषा में समझें तो AI अब सिर्फ इंसानों से ट्रेनिंग लेकर आगे नहीं बढ़ रहा बल्कि खुद भी सीखने लगा है।
उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले तक AI मॉडल्स की लर्निंग में करीब 90 फीसदी हिस्सा इंसानों के इनपुट का था। लेकिन कुछ ही महीनों में यह बैलेंस बदलकर करीब 50-50 तक पहुंच गया। यानी AI की लर्निंग में अब इंसानों की ट्रेनिंग के साथ उसकी खुद से सीखने की क्षमता भी बड़ी भूमिका निभा रही है।
क्या आने वाले समय में 90 फीसदी खुद सीखेगा AI?
ओबामा का अनुमान है कि आने वाले समय में AI की लर्निंग में करीब 90 फीसदी हिस्सा सेल्फ लर्निंग का हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो AI के विकास की रफ्तार आज के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ सकती है।
उन्होंने इसकी तुलना हॉकी स्टिक जैसी ग्रोथ से की है। इसका मतलब है कि शुरुआत में विकास की रफ्तार धीमी रहती है लेकिन एक समय के बाद अचानक बहुत तेजी से बढ़ने लगती है।
किलर रोबोट नहीं बल्कि ये है असली खतरा
AI के खतरे की बात आते ही किलर रोबोट और इंसानों को खत्म करने वाली मशीनों की चर्चा होने लगती है। ओबामा के मुताबिक ऐसा खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है लेकिन इसकी संभावना कम है।
उनकी असली चिंता AI मिसअलाइनमेंट को लेकर है। यानी ऐसी स्थिति जब AI सिस्टम के लक्ष्य इंसानों के इरादों से अलग हो जाएं।
इसके लिए AI का इंसानों से नफरत करना या उसमें चेतना होना जरूरी नहीं है। अगर AI खुद फैसले लेने लगे और उसके लक्ष्य इंसानों के लक्ष्यों से अलग हो जाएं तो बड़ी समस्या पैदा हो सकती है। यही वजह है कि AI के तेजी से विकास के बीच उसे इंसानों के कंट्रोल में रखना एक बड़ा सवाल बन गया है।