भारत में CCI की जांच पर Apple का बड़ा आरोप! कहा- बिना स्वतंत्र जांच के तैयार की गई पूरी रिपोर्ट

एप्पल ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की एंटीट्रस्ट जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की है। कंपनी का आरोप है कि जांच में विरोधी कंपनियों के आरोप और यूरोपीय संघ की रिपोर्ट की नकल की गई। साथ ही, एप्पल ने भारत में अपनी कम बाजार हिस्सेदारी और बढ़ते निवेश का भी हवाला दिया।

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By Aryan Sharma:

अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी एप्पल (Apple) ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कंपनी का आरोप है कि उसके खिलाफ चल रही एंटीट्रस्ट जांच में CCI के अधिकारियों ने खुद से जांच करने के बजाय दूसरी कंपनियों के लगाए आरोपों को सीधे कॉपी-पेस्ट कर दिया।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल ने 25 जून को CCI के सामने अपना जवाब दाखिल किया है। कंपनी ने मांग की है कि इस जांच रिपोर्ट को रद्द किया जाए, क्योंकि उसके मुताबिक यह रिपोर्ट निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के आधार पर तैयार नहीं की गई है।

एप्पल ने अपनी दलील में एक और बड़ा दावा किया है। कंपनी का कहना है कि CCI के महानिदेशक (DG) ने अपनी जांच रिपोर्ट में यूरोपीय संघ (EU) के 2024 के फैसले में इस्तेमाल किए गए ग्राफिक्स और चार्ट तक की सीधी नकल कर ली। एप्पल का आरोप है कि भारतीय जांच अधिकारियों ने यूरोप की रिपोर्ट को आधार बना लिया, जबकि भारत का बाजार, नियम और कारोबारी माहौल यूरोप से बिल्कुल अलग है।

भारत में 6% से भी कम बाजार हिस्सेदारी का दावा

एप्पल ने कहा कि भारत के स्मार्टफोन बाजार में उसकी हिस्सेदारी 6% से भी कम है। ऐसे में कंपनी का कहना है कि उसका बाजार पर कोई दबदबा (Dominant Position) नहीं है, इसलिए उस पर प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन का आरोप सही नहीं है।

विरोधी कंपनियों के आरोपों को 'कॉपी-पेस्ट' करने का आरोप

एप्पल का आरोप है कि जांच के दौरान मैच ग्रुप (Tinder की पैरेंट कंपनी), PhonePe और Paytm जैसी कंपनियों के आरोपों की CCI ने खुद से जांच नहीं की। कंपनी का कहना है कि जांच रिपोर्ट में इन कंपनियों के बयान लगभग वैसे ही शामिल कर दिए गए। ऐपल ने यह भी दावा किया कि उसे पूरी जांच के दौरान अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया।

भारत में तेजी से बढ़ा iPhone प्रोडक्शन

एप्पल ने अपनी दलील में भारत में बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग का भी जिक्र किया। कंपनी के मुताबिक, 2022 में दुनिया के कुल iPhone उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 6% थी, जो 2026 तक बढ़कर 26% होने की उम्मीद है। इसके अलावा कंपनी ने बताया कि पिछले पांच साल में उसने भारत से 51 अरब डॉलर के iPhone का निर्यात किया है।

ऐपल ने चेतावनी दी कि अगर App Store के नियमों में जबरदस्ती बदलाव किया गया, तो इससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। कंपनी का कहना है कि इसका असर भारत के डिजिटल कारोबार और विदेशी निवेश पर भी पड़ सकता है। इस मामले की अगली गोपनीय सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी।
 

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