AI की रफ्तार धीमी करने की साजिश? OpenAI, Google समेत 4 बड़ी कंपनियों पर मुकदमा; जानिए क्या है पूरा मामला
AI की दुनिया में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। OpenAI, Google और Anthropic समेत चार बड़ी कंपनियों पर अमेरिका में मुकदमा दायर किया गया है। आरोप है कि इन कंपनियों ने मिलकर ऐसा कदम उठाया, जिससे AI के विकास और ग्राहकों पर असर पड़ सकता है। जानिए पूरा मामला।

In Short
- OpenAI, Google, Anthropic और xAI पर मिलकर AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का आरोप लगा है।
- ChatGPT, Claude, Grok और Gemini के चार पेड यूजर्स की ओर से अमेरिका में मुकदमा दायर किया गया है।
- मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि AI की रफ्तार धीमी करने से बाजार में मुकाबला कम हो सकता है और ग्राहकों को नुकसान पहुंच सकता है।
AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। OpenAI, Anthropic, Google और एलन मस्क की SpaceXAI पर AI के विकास की रफ्तार जानबूझकर धीमी करने का आरोप लगा है। इन चारों कंपनियों के खिलाफ अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा दायर किया गया है। आरोप है कि कंपनियों ने आपसी सहमति से AI के विकास की रफ्तार कम करने की कोशिश की है। इससे AI सर्विस के लिए पैसे देने वाले ग्राहकों को नुकसान हो सकता है।
AI की रफ्तार धीमी करने पर क्यों छिड़ा विवाद?
पिछले कुछ समय से AI कंपनियों के बीच नई और ज्यादा ताकतवर टेक्नोलॉजी बनाने की होड़ चल रही है। इसके साथ ही AI की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
OpenAI, Anthropic, Google और SpaceXAI जैसी कंपनियां AI के विकास की रफ्तार धीमी करने की बात करती रही हैं। उनका कहना है कि इससे AI से जुड़े खतरों को समझने और सुरक्षा के बेहतर इंतजाम करने के लिए समय मिल सकेगा।
लेकिन अब इन कंपनियों पर आरोप लगा है कि उन्होंने मिलकर AI की रफ्तार धीमी करने की कोशिश की, जो अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।
किसने दायर किया मुकदमा?
यह मुकदमा अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट की अदालत में दायर किया गया है।
मुकदमा दायर करने वाले वकील ChatGPT, Claude, Grok और Gemini की पेड सर्विस इस्तेमाल करने वाले चार ग्राहकों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इनकी मांग है कि मामले को देशभर के ग्राहकों की ओर से क्लास-एक्शन मुकदमे के रूप में चलाया जाए। इसका मतलब है कि वे अमेरिका में इन AI सर्विस के लिए पैसे देने वाले दूसरे ग्राहकों का भी प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं।
ग्राहकों को कैसे हो सकता है नुकसान?
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि एक-दूसरे से मुकाबला करने वाली कंपनियां मिलकर AI के विकास की रफ्तार कम करने का फैसला नहीं कर सकतीं।
शिकायत के मुताबिक, अगर कंपनियां मिलकर AI के विकास को धीमा करती हैं, तो इससे बाजार में मुकाबला कम हो सकता है। इसका असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो बेहतर AI सर्विस पाने के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं।
मुकदमे में AI के विकास को धीमा करने की मांग वाले एक पुराने बयान का भी जिक्र किया गया है। इसमें सरकारों से वैश्विक स्तर पर ऑटोमेटेड AI के विकास की रफ्तार कम करने के प्रयासों का समर्थन करने की अपील की गई थी।
Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने भी AI से जुड़े खतरों पर एक रिपोर्ट साझा की थी, जिसे OpenAI के सैम ऑल्टमैन, एलन मस्क और Google DeepMind के डेमिस हसाबिस का समर्थन मिला था।
AI की रफ्तार धीमी करने पर किसकी क्या राय?
AI की रफ्तार धीमी करने के मुद्दे पर टेक्नोलॉजी जगत में अलग-अलग राय है।
Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग और Meta के मार्क जुकरबर्ग AI के विकास की रफ्तार कम करने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, वे AI की सुरक्षा और बेहतर तालमेल पर जोर देते हैं।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी AI के विकास को धीमा करने की मांग खारिज कर चुके हैं। उन्होंने इसे 'धोखा' बताया था।
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को AI के विकास में आगे रहना चाहिए, क्योंकि चीन जैसे देश भी तेजी से एडवांस AI सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं।