AI के बाद Assignment का दौर खत्म? IIT Kanpur Director ने बताया अब कैसे बदलेगा छात्रों की पढ़ाई का तरीका
AI के बढ़ते इस्तेमाल से IITs में पढ़ाई और छात्रों को परखने का तरीका बदल सकता है। IIT Kanpur के Director Manindra Agrawal का कहना है कि AI Models आसानी से Assignments हल कर रहे हैं। ऐसे में पुराने Assignment System की जगह सीखने और Assessment के नए तरीके अपनाने की जरूरत है।

In Short
- IIT Kanpur Director के मुताबिक AI के कारण Assignment से सीखने का पुराना तरीका लगभग खत्म हो रहा है।
- AI Tools छात्रों को Mathematics जैसे विषय अपनी रफ्तार से समझने और सीखने में मदद कर सकते हैं।
- AI और 3D Printing से Engineering students के लिए Design को असली Model में बदलना आसान और तेज हो सकता है।
AI अब सिर्फ Technology की दुनिया नहीं बदल रहा, बल्कि छात्रों के पढ़ने और सीखने का तरीका भी बदल रहा है। IIT Kanpur के Director Manindra Agrawal ने India Today Digital को दिए इंटरव्यू में बताया कि AI के कारण पुराने तरीके से दिए जाने वाले Assignments का महत्व कम हो रहा है। उनके मुताबिक अब शिक्षण संस्थानों को पढ़ाई और छात्रों को परखने के नए तरीके खोजने होंगे।
Mathematics में क्यों थी दिलचस्पी?
Manindra Agrawal ने बताया कि उन्हें शुरू से Mathematics पसंद था। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि गणित में जवाब साफ होता है। कोई बात या तो सही होती है या गलत, बीच में ज्यादा उलझन नहीं होती।
Computer Science की पढ़ाई के दौरान उन्हें पता चला कि इसका एक हिस्सा Theoretical Computer Science है, जिसका Mathematics से गहरा संबंध है।
उन्होंने बताया कि उन्हें Programming में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी। तीसरे साल तक उन्होंने तय कर लिया था कि वह Programming में अपना करियर नहीं बनाएंगे। इसके बाद उन्होंने Computer Science के Mathematics वाले हिस्से में Research करने का फैसला किया।
भारत में Mathematics को कैसे मजबूत किया जाए?
Agrawal के मुताबिक भारत में Mathematics पर काम करने वाले कई अच्छे संस्थान पहले से मौजूद हैं। लेकिन बड़ी जरूरत छात्रों की Training को मजबूत करने की है। कई संस्थानों में अच्छे Researchers और PhD Programs हैं, लेकिन वहां मौजूद Experts का ज्ञान बड़ी संख्या में युवा छात्रों तक नहीं पहुंच पाता।
उनका मानना है कि भारत को ऐसे Mathematics Institutes की जरूरत है, जहां Research के साथ छात्रों की अच्छी Training भी हो। IITs और दूसरे बड़े संस्थान भी इसमें अपनी भूमिका बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि Mathematics के नए क्षेत्रों पर भी काम बढ़ाना होगा और इनमें से कई का संबंध AI से है।
AI के कारण Assignment का दौर खत्म?
शिक्षा पर AI के असर को लेकर Agrawal ने कहा कि Assignment से सीखने का पुराना तरीका लगभग खत्म हो चुका है। इसकी वजह आसान है। आज AI Models किसी Assignment के सवालों को काफी अच्छे तरीके से हल कर सकते हैं। ऐसे में छात्र खुद जवाब तैयार करने के बजाय AI का इस्तेमाल कर सकता है।
इसलिए केवल Assignment देखकर यह समझना मुश्किल हो सकता है कि छात्र ने विषय वास्तव में कितना समझा है। उनके मुताबिक अब संस्थानों को छात्रों को सिखाने और उनकी समझ जांचने के दूसरे तरीके खोजने होंगे।
AI से पढ़ाई आसान भी हो सकती है
Agrawal ने AI को सिर्फ समस्या नहीं बताया। उनके मुताबिक AI Tools छात्रों के लिए सीखने के नए रास्ते भी खोल रहे हैं। मान लीजिए किसी युवा छात्र की Mathematics के किसी खास विषय में दिलचस्पी है। वह AI Tool से लगातार सवाल पूछकर उस विषय को अपनी रफ्तार से समझ सकता है।
Teacher हर समय किसी एक छात्र के लिए मौजूद नहीं हो सकता, लेकिन AI Tool के साथ छात्र जरूरत के हिसाब से लगातार बातचीत कर सकता है। इससे सीखने का अनुभव ज्यादा व्यक्तिगत हो सकता है।
Design और चीजें बनाना भी होगा आसान
AI का एक और बड़ा फायदा Design और Engineering में दिखाई दे सकता है। Agrawal ने उदाहरण दिया कि पहले किसी छात्र के लिए mechanical और electronic parts वाला कोई device बनाना काफी मुश्किल और समय लेने वाला काम था।
अब AI Tools और 3D Printing की मदद से यह काम तेज हो सकता है। छात्र पहले design तैयार कर सकता है और AI Tool उसे 3D Printer के लिए जरूरी प्रक्रिया में बदलने में मदद कर सकता है।
Electronics में भी AI किसी design के आधार पर circuit diagram या PCB layout तैयार करने में मदद कर सकता है। इससे छात्रों के लिए अपने ideas को असली product या model में बदलना पहले से आसान हो सकता है।
IITs को बदलना होगा पढ़ाई का तरीका
Agrawal के मुताबिक शिक्षा में AI का असर अभी शुरुआती दौर में है। आने वाले कुछ वर्षों में इसके और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
इसलिए IITs और दूसरे शिक्षण संस्थानों को भी AI के हिसाब से खुद को बदलना होगा। पुराने Assignments पर निर्भर रहने के बजाय छात्रों की असली समझ, Problem Solving और नए ideas पर ज्यादा ध्यान देना पड़ सकता है।