डॉक्टर-इंजीनियर छोड़िए... AI के दौर में ये नए करियर बन रहे युवाओं की पहली पसंद, जानें कहां हैं बड़े मौके

भारत का जॉब मार्केट तेजी से बदल रहा है। डॉक्टर, इंजीनियर या सरकारी नौकरी जैसे पारंपरिक विकल्पों के अलावा एआई, डेटा और डिजिटल कारोबार नए करियर के रास्ते खोल रहे हैं। इस बदलाव में सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि अलग-अलग कौशल का मेल युवाओं के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रहा है।

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In Short

  • एआई, डेटा और डिजिटल कारोबार पारंपरिक नौकरियों से आगे नए करियर विकल्प पैदा कर रहे हैं।
  • अब तकनीक के साथ डिजाइन, मनोविज्ञान, स्पोर्ट्स साइंस और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों की समझ भी अहम हो रही है।
  • बदलते जॉब मार्केट में डिग्री के साथ व्यावहारिक अनुभव, समस्या सुलझाने की क्षमता और लगातार नए कौशल सीखना जरूरी है।

By Gaurav Kumar:

कई पीढ़ियों तक करियर चुनने का मतलब अक्सर डॉक्टर, इंजीनियर, बैंकर, शिक्षक या सरकारी कर्मचारी जैसे पारंपरिक विकल्पों में से किसी एक को चुनना था। अब तस्वीर बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा आधारित तकनीक और डिजिटल कारोबार ऐसे नए करियर बना रहे हैं, जिनकी कल्पना कुछ साल पहले तक मुश्किल थी।

मुंबई की यूनिवर्सल एआई यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर साइमन मैक के मुताबिक, भारत का नौकरी बाजार अब पारंपरिक तकनीकी भूमिकाओं से आगे बढ़ रहा है। नए करियर पुराने पेशों की नकल नहीं हैं, बल्कि नई समस्याओं और नई तकनीकों के कारण पैदा हो रहे हैं।

 AI अब सिर्फ टेक सेक्टर तक सीमित नहीं

शुरुआत में एआई को मुख्य रूप से तकनीकी क्षेत्र की क्षमता माना जाता था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल वित्त, शिक्षा, खुदरा कारोबार और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है।

इस बदलाव से ऐसे पेशेवरों की मांग बन रही है, जो तकनीक के साथ किसी खास उद्योग की समझ भी रखते हों। उदाहरण के लिए, एआई और डेटा साइंस की पढ़ाई करने वाला छात्र सिर्फ तकनीकी नौकरी तक सीमित नहीं है। वह बिजनेस से जुड़ी भूमिकाओं में भी जा सकता है। इसी तरह डिजाइन, मनोविज्ञान, स्पोर्ट्स साइंस और लिबरल आर्ट्स के छात्र भी अपने क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल को समझकर नए करियर विकल्प तलाश सकते हैं।

 अलग-अलग कौशल का मेल बना रहा नई नौकरियां

साइमन मैक ने बिजनेस टुडे से कहा कि भारतीय नौकरी बाजार तेजी से विविध हो रहा है और इसका युवाओं की करियर योजना पर बड़ा असर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, करियर विकास अब कुछ चुनिंदा उद्योगों तक सीमित नहीं है। तकनीक, डिजिटल कारोबार और उभरते क्षेत्र अलग-अलग कौशल को जोड़कर नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

कंप्यूटर साइंस, एआई, डेटा साइंस, मैनेजमेंट, डिजाइन, मनोविज्ञान, स्पोर्ट्स साइंस, लिबरल आर्ट्स और रचनात्मक क्षेत्रों के बीच अब पहले से ज्यादा तालमेल दिखाई दे रहा है।

 सिर्फ डिग्री काफी नहीं

नौकरी बाजार बदलने के साथ सिर्फ डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं रह गया है। व्यावहारिक अनुभव, समस्या सुलझाने की क्षमता, संवाद कौशल, उद्यमिता और अलग-अलग क्षेत्रों के साथ काम करने की क्षमता भी अहम होती जा रही है।

मैक के मुताबिक, मजबूत बुनियादी समझ, व्यावहारिक अनुभव, अलग-अलग विषयों को जोड़कर देखने का नजरिया और लगातार नए कौशल सीखना युवाओं को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रख सकता है। युवाओं के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि करियर चुनते समय सिर्फ नौकरी के पारंपरिक नामों पर ध्यान देने के बजाय यह देखना ज्यादा जरूरी होगा कि तकनीक उनकी रुचि वाले क्षेत्र से कहां और कैसे जुड़ रही है।

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