1.5 करोड़ के बॉस स्कैम ने खोली साइबर ठगी की बड़ी साजिश! चीन और पाकिस्तान से जुड़े 4500 सिम कार्ड मिले
अहमदाबाद में 1.5 करोड़ रुपये के बॉस स्कैम की जांच करते हुए पुलिस एक बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क तक पहुंच गई। जांच में 4500 सिम कार्ड, चीन के मालवेयर, हांगकांग और पाकिस्तान कनेक्शन सामने आए हैं। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है।

In Short
- अहमदाबाद के 1.5 करोड़ रुपये के बॉस स्कैम की जांच में बड़ा साइबर नेटवर्क सामने आया।
- पुलिस को आरोपियों से जुड़े करीब 4500 सिम कार्ड और विदेशी कनेक्शन मिले।
- चीन के मालवेयर और पाकिस्तान स्थित कॉल सेंटर से जुड़े तारों की जांच जारी है।
अहमदाबाद में 1.5 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले की जांच ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच में चीन पाकिस्तान और हांगकांग से जुड़े कनेक्शन सामने आए हैं। इस मामले ने दिखाया कि कैसे ठग डिजिटल तरीके से लोगों को निशाना बनाने के लिए बड़ा नेटवर्क चला रहे थे।
मामले की जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि यह सिर्फ एक ठगी नहीं बल्कि एक बड़े साइबर नेटवर्क का हिस्सा था।
कर्मचारी को बॉस बनकर भेजा मैसेज और ठगे 1.5 करोड़ रुपये
जून में अहमदाबाद की एक कंपनी के कर्मचारी को ठगों ने अपना शिकार बनाया। ठगों ने खुद को कंपनी के बड़े अधिकारी यानी बॉस के रूप में पेश किया और पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा। कर्मचारी ने भरोसा करके 1.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 1.3 करोड़ रुपये बरामद कर लिए और पीड़ित को वापस भी कर दिए। लेकिन जांच में सामने आया कि इस ठगी के पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
4500 सिम कार्ड से चल रहा था साइबर ठगी का नेटवर्क
पुलिस ने पश्चिम बंगाल के 24 परगना निवासी इमरान अली प्यादा और कोलकाता के इंजामुल मुजीबर मोल्ला को गिरफ्तार किया। उनके पास से आठ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए। इनमें एक ऐसा डिवाइस भी मिला जिसमें एक साथ चार सिम कार्ड चलाए जा सकते थे।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने करीब 4500 सिम कार्ड साइबर अपराध के लिए जुटाए थे। इन सिम कार्ड का इस्तेमाल अलग-अलग ठगी की गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता था।
चीन के मालवेयर और हांगकांग से जुड़े तार
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी वैसे-वैसे इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आने लगे। पुलिस को पता चला कि इस गिरोह में चीन में तैयार किया गया मालवेयर इस्तेमाल किया जा रहा था और इसका संचालन हांगकांग से जुड़ा हुआ था।
इसके अलावा इस नेटवर्क से जुड़े एक कॉल सेंटर का लिंक इस्लामाबाद तक मिला। ठगी से मिले पैसों को कई देशों के जरिए घुमाया जाता था ताकि पैसों की असली आवाजाही छिपाई जा सके।
251 शिकायतों से सामने आया नेटवर्क का बड़ा दायरा
पुलिस ने आरोपियों से जुड़े मोबाइल नंबरों की जांच नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर की। इसमें सामने आया कि इन नंबरों के खिलाफ पहले से 251 शिकायतें दर्ज थीं।
पुलिस के अनुसार यह पूरा नेटवर्क साइबर क्राइम ऐज अ सर्विस मॉडल पर काम कर रहा था। यानी ठगी के लिए तैयार सिस्टम दूसरे अपराधियों को उपलब्ध कराया जाता था। इसमें ओटीपी की मदद से लेकर डिजिटल फ्रॉड करने तक की सेवाएं दी जाती थीं।
पुलिस ने लोगों को किया सतर्क
अहमदाबाद पुलिस और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। पुलिस ने कहा है कि अगर किसी अनजान नंबर से कोई खुद को बड़ा अधिकारी या बॉस बताकर पैसे मांगता है तो पहले उसकी पहचान जरूर जांच लें।
किसी भी डिजिटल मैसेज या कॉल पर भरोसा करके तुरंत पैसे ट्रांसफर करने से बचना चाहिए, क्योंकि साइबर ठग अब बड़े नेटवर्क के साथ लोगों को निशाना बना रहे हैं।