ट्रंप का एक बयान और बिखबर गया भारतीय शेयर बाजार! 2% टूटा सेंसेक्स और निफ्टी - ₹8.6 लाख करोड़ स्वाहा
खबर लिखे जानें तक सेंसेक्स सुबह 11:08 बजे तक 1.95% या 1426.14 अंक टूटकर 71,708.18 अंक पर ट्रेड कर रहा था वहीं एनएसई 1.94% या 439.10 अंक गिरकर 22,240.30 पॉइंट पर कारोबार कर रहा था।

Stock Market Today: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध पर दिए गए बयान ने निवेशकों को राहत नहीं दी। उल्टा, कोरिया से जापान तक एशियाई बाजारों में 4% तक की गिरावट देखी गई। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा और पिछले सत्र की तेजी के बाद बाजार में तेज बिकवाली लौट आई।
ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका अगले दो-तीन हफ्तों में ईरान पर 'बहुत कड़ा हमला' करेगा, लेकिन संघर्ष खत्म होने की कोई समयसीमा नहीं दी।
खबर लिखे जानें तक सेंसेक्स सुबह 11:08 बजे तक 1.95% या 1426.14 अंक टूटकर 71,708.18 अंक पर ट्रेड कर रहा था वहीं एनएसई 1.94% या 439.10 अंक गिरकर 22,240.30 पॉइंट पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स का मार्केट कैप इस समय तक 8,61,022.83 लाख करोड़ रुपये घट गया।
तेल और बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई चिंता
तनाव का सीधा असर कमोडिटी और बॉन्ड मार्केट पर दिखा। ब्रेंट क्रूड 4.64% उछलकर 105.85 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.36% तक मजबूत हुई। इससे इक्विटी निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।
भारतीय बाजार में बीएसई सेंसेक्स 872 अंकों की गिरावट के साथ 72,262 पर खुला और कुछ ही सेकंड में करीब 1,400 अंक टूट गया। वहीं निफ्टी 296 अंक गिरकर 22,383 पर आ गया।
बड़े शेयरों में दबाव
सेंसेक्स में सन फार्मा, इंटरग्लोब एविएशन, अदानी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और इटरनल जैसे शेयर 3-4% तक टूटे। एसबीआई, ट्रेंट और अल्ट्राटेक सीमेंट में भी 3% तक गिरावट आई। हालांकि एचसीएल टेक्नोलॉजीज मामूली बढ़त के साथ एकमात्र गेनर रहा।
एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि ट्रंप के बयान पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। वे अपने रुख में कभी भी बदलाव कर सकते हैं।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के देवार्ष वकिल के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी लगभग बंद है, जिससे रोजाना 10-15 मिलियन बैरल तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है। यह इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक बन सकता है।
ग्लोबल व्यापार पर डबल झटका संभव
नोमुरा की अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने चेतावनी दी कि अगर ईरान के समर्थन से हौती विद्रोही रेड सी शिपिंग को निशाना बनाते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर दोहरा दबाव पड़ेगा। बाब-अल-मंदेब और स्वेज नहर पहले से ही वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालते हैं। वैकल्पिक केप ऑफ गुड होप रूट लंबा और महंगा साबित होगा।
रुपये पर दबाव
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बताया कि 1 अप्रैल को विदेशी निवेशकों ने 8,331 करोड़ रुपये की बिकवाली की। महंगा कच्चा तेल, बढ़ता व्यापार घाटा और गिरता रेमिटेंस मिलकर रुपये पर दबाव बना रहे हैं।